यहाँ के छोटे से गांव में किसान परिवार में जन्मे बेटे ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में पूरे राज्य में टॉप किया

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assistant professor exam
Farmer son 1st rank in Rajasthan assistant professor exam. Shankar Singh Potliya got first rank in Assistant Professor selection exam in RPSC.

Barmer: दोस्तों एक इंसान को इंसान बनने में सबसे बड़ा रोल उसके गुरु का होता है। जब एक बालक जन्म लेता है तो उसका प्रथम गुरु उसकी मां होती है जिससे उसे शुरुआती शिक्षा प्राप्त होती है। लेकिन इसके आगे वह भविष्य में ऊंचाइयों पर जाने के लिए जो शिक्षा प्राप्त करता है, वह उसे किसी शिक्षक या गुरु से ही मिलता है।

हमारे भारतीय संस्कृति में भी गुरु को बहुत ही उच्च स्थान दिया गया है। यहां तक कहा गया कि अगर किसी दिन भगवान सामने हो तो वह शिष्य यह कहता है कि मैं पहले भगवान को प्रणाम करूं या उस गुरु को जिसने मुझे भगवान से मिलने में मदद की।

आधुनिक संसार में इन गुरुओं को हम शिक्षक या टीचर के रूप में स्कूल और कॉलेज में देखते हैं। वैसे तो कई लोग शिक्षक का जॉब इनकम के परपस से ही करते हैं, परंतु आज भी बहुत से ऐसे लोग हैं, जो समाज की बेहतर उन्नति के उद्देश्य से शिक्षक बनना चाहते हैं।

Rajasthan Public Service Commision
Rajasthan Public Service Commision File Photo

आज की हमारी कहानी ऐसे ही एक इंसान की है, जो राजस्थान में एक साधारण परिवार से आते हैं और बचपन से उनका उद्देश्य था कि, एक दिन शिक्षक बनके बच्चों को ऐसी शिक्षा दें कि वह स्कूल कॉलेज से निकल के समाज को एक बेहतर दिशा दे सकें। अपने इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने राजस्थान (Rajasthan) की आरपीएससी एग्जाम (RPSC Exam) में स्टेट टॉप किया।

राजस्थान के इस गांव से ताल्लुक रखते हैं हमारे आज के ये नायक

आपको बताना चाहेंगे कि हम जिस शख्स की बात कर रहे हैं उनका पूरा नाम शंकर सिंह पोटलिया (Shankar Singh Potliya) है। ये राजस्थान राज्य के अंतर्गत आने वाले बाड़मेर (Barmer) जिला के छोटे से ग्राम श्रीरामवाला के रहने वाले हैं। इनके पिताजी एक बहुत ही साधारण किसान हैं, जो किसानी के जरिए अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे हैं। वही शंकर सिंह की माताजी एक ग्रहणी है।

शंकर सिंह द्वारा राजस्थान में आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) सिलेक्शन एग्जाम में स्टेट टॉप (State Top) करने के बाद से पूरा परिवार काफी प्रसन्न है और उनके पिताजी को लगता है कि शंकर ने ना केवल उनके बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन किया है। आज गांव का हर परिवार अपने बच्चों को आगे बढ़ने के लिए शंकर सिंह की मिसाल दे रहे हैं।

शुरुआती शिक्षा गांव से ही परंतु आगे की पढ़ाई के लिए शहर का रुख किया

शंकर ने बातचीत के दौरान बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई में पांचवी तक की एजुकेशन गांव की सरकारी स्कूल से हुई परंतु आगे दसवीं की पढ़ाई आदर्श विद्या मंदिर चौहटन से करनी पड़ी। वही 12वीं की पढ़ाई इन्होंने महर्षि गौतम स्कूल जोधपुर से कंप्लीट की।

इसके बाद ग्रेजुएशन करने के लिए उन्होंने गांव छोड़ शहर के ओर रुख किया और राजस्थान यूनिवर्सिटी के अंतर्गत जयपुर शहर से इन्होंने अपनी स्नातक डिग्री प्राप्त की। शंकर सिंह बचपन से ही एक मेधावी विद्यार्थी थे इसलिए उनके शिक्षकों ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आगे बढ़ते रहने की सलाह दी।

सितंबर 2021 में आयोजित आरपीएससी के एंट्रेंस एग्जाम में किया टॉप

जानकारी के अनुसार मिले आंकड़ों में पता चलता है कि शंकर सिंह जी ने असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास विषय के लिए 2020 में राजस्थान सरकार द्वारा निकाली गई आरपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर एंट्रेंस एग्जाम में आवेदन किया था जिसकी परीक्षा 2021 में हुई।

परिणाम आने पर पता चला शंकर सिंह जी को 200 अंकों में से 150 अंक प्राप्त हुए। इसके बाद इंटरव्यू राउंड भी इन्होंने क्वालीफाई कर लिया। जब रिजल्ट पब्लिश हुआ तब स्वयं उन्हें भी यकीन नहीं था कि उनकी रैंक ऑल ओवर राजस्थान में फर्स्ट आई है।

शंकर सिंह का उद्देश्य लोगों को अच्छी शिक्षा एवं ज्ञान का प्रचार प्रसार करना

शंकर सिंह बताते हैं कि उनकी पढ़ाई में रुचि देखते हुए परिवार वालों का रुझान था कि वह आईएएस या आईपीएल जैसे किसी कैडर के लिए ट्राई करें, परंतु उनका बचपन से उद्देश रहा है कि शिक्षक बनकर समाज को बेहतर बनाने में मैं अपना योगदान प्रदान करूं। इसके लिए अधिनस्त चयन बोर्ड दिल्ली मैं इनकी थर्ड रैंक आने के बावजूद भी उन्होंने यह जॉब छोड़ दी क्योंकि वह एक शिक्षक की तरह ही समाज में मिसाल बनना चाहते थे।

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