
Giridih: कहते हैं लोहा भी आग में तप कर हथौड़े से पिट-पिटकर मूल्यवान बनता है। इसी प्रकार इंसान का संघर्ष है, जो इंसान को मूल्यवान बनाता है। एक इंसान भी अपने जीवन के संघर्ष की आग में जलता है और आगे बढ़ता है दुनिया का हर व्यक्ति अपने अच्छे और बेहतरीन भविष्य के लिए बेहद संघर्ष में जीवन व्यतीत करता है।
व्यक्ति युवावस्था से जीवन का संघर्ष समझने लगता है। युवा अपने अपने भविष्य के क्षेत्र में मेहनत करते हैं और अपने लक्ष्य को पाने की कोशिश करते हैं, कई युवा व्यापार करते हैं तो कुछ प्राइवेट नौकरी और कुछ प्रशासनिक नौकरी की तैयारी में रहते हैं।
वर्तमान समय के युवाओं में यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) के लिए काफी ज्यादा झुकाव देखा। यूपीएससी की परीक्षा देश की सबसे जटिल परीक्षा है, वह इसलिए क्योंकि यह परीक्षा तीन चरणों में होती है पहला चरण प्रारंभिक परीक्षा दूसरा मुख्य परीक्षा और तीसरा साक्षात्कार। यदि किसी उम्मीदवार ने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा निकाल ली और साक्षात्कार में फेल हो गया तो वह व्यक्ति दुबारा से पहले चरण से शुरू करेगा।

यही कारण है कि व्यक्ति बार बार फेल होने के बाद इस परीक्षा से हतोत्साहित होने लगता है, कई बार तो युवा इस क्षेत्र में भविष्य बनाने की उम्मीद को छोड़ देते हैं और अन्य चीजों में अपना भविष्य खोजते हैं। परंतु कुछ ऐसे उम्मीदवार भी होते हैं, जो कई दफा फेल होने के बाद भी इस परीक्षा को अपना जीवन मानते हैं और परिश्रम में लगे रहते हैं।
रवि कुमार के संघर्ष की कहानी
बताया जा रहा है कि रवि कुमार (Ravi Kumar) भारत के झारखंड (Jharkhand) राज्य के गिरिडीह (Giridih) जिले के निवासी हैं। रवि कुमार ने ऑल इंडिया लेवल पर यूपीएससी की परीक्षा में 38 व रैंक हासिल किया है, जिससे चारों तरफ उनकी चर्चाएं हैं। बताया जा रहा है कि रवि कुमार बचपन से ही काफी होनहार विद्यार्थी रहे हैं।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा गिरिडीह ऐसे ही पूरी हुई है, उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए फिर धनबाद गए जहां उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियर की पढ़ाई की उसके बाद उन्होंने जमकर मेहनत कर दूसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा को पास कर लिया। कॉलेज की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने 1 वर्ष तक टाटा मोटर्स कंपनी में काम किया।
यूपीएससी की तैयारी की दिल्ली से
उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा और उच्च शिक्षा अपने ही निजी निवास के आस पास रहकर पूरी की परंतु अपने सपने की पदवी याने यूपीएससी की नौकरी के लिए उन्होंने दिल्ली को चुना जहां वे राजेंद्र नगर में रहकर अपनी यूपीएससी की तैयारी की। बच्चों की शिक्षा और उनके उज्जवल भविष्य में माता-पिता उनके बराबर ही और उनसे ज्यादा ही मेहनत करते हैं।

रवि कुमार बताते हैं कि उनके पिता की एक छोटी सी बर्तन की दुकान (Utensil shop) है, जिससे उन्होंने अपने परिवार को पाला और उन्हें पढ़ाया इसीलिए आज रवि कुमार जो कुछ भी है, उस सब का श्रेय वे अपने माता-पिता को देते। रवि कुमार का कहना है कि यदि माता-पिता उनकी ताकत है तो गुरुजनों ने उन्हें सही रास्ता दिखाया और मंजिल तक पहुंचने के लिए उनके साथ मेहनत की।
माता पिता की उम्मीदों पर खरा उतरा बेटा
कहते हैं एक बच्चे की सफलता में उसके माता-पिता का एक बहुत बड़ा हाथ होता है। यह बात पूरी तरह सत्य है क्योंकि एक बच्चे की पहली गुरु उसकी मां होती है मां ही होती है, जो अपने बच्चों को प्रेम से लाड प्यार से पालकर बड़ा करती है और उसके उज्जवल भविष्य की कामना करती है। पिता उस छत की तरह होता है, जो हर मौसम में अपने बच्चे की ढाल बनकर खड़ा रहता है और उसके भविष्य को लेकर हमेशा अपना अच्छा कार्य करने की कोशिश करता है।

जब रवि कुमार की मां से पूछा गया कि आप खुश है, तो उनकी आंखों से आंसू छलक उठे। वह कहती हैं कि उनका बेटा पढ़ाई के चलते काफी समय उनसे दूर रहा है। इसीलिए आज वे अपने बेटे की सफलता से बेहद खुश है उनका कहना है कि उनका बेटा बचपन से ही काफी होशियार रहा है।
बहन के सपोर्ट से मिली ताकत रवि कुमार को
रवि कुमार बताते हैं कि मैं जब भी डिमोटिवेट हुए तब उनकी बहन ने उन्हें मोटिवेट किया और आगे बढ़ने के लिए हमेशा सपोर्टिव रहे। पूजा कुमारी रवि कुमार की बड़ी बहन है, जो इस समय बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। कहते हैं भाई बहन का रिश्ता बहुत ही मजबूत रिश्ता होता है जितना भी लड़ते हैं, उतना ही एक दूसरे की परवाह करते हैं रवि कुमार और पूजा कुमारी में भी यही देखने को मिलता है।



