राजस्थान में यहाँ ऐसा मेला लगता है, जहां महिलाएं 40 से 50 लाख रुपए के गहने पहनकर घूमती है

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Rajasthan Unique Fair
Unique fair of Rajasthan where women use Rs 40-50 lakh Jewellery. Rajasthan ke Jodhpur ka unique mela. Jewellery festival Mela of Rajasthan.

Jodhpur: राजस्थान (Rajasthan) राज्य अपनी संस्कृति और सभ्यता के कारण अन्य राज्यों से अलग दिखाई पड़ता है। राज्य में महिलाओं का पहनावा और वहां का खानपान लोगों को खूब भाता है। राजस्थान भारत का सबसे बड़ा पर्यटक राज्य माना जाता है, क्योंकि इस राज्य में खूबसूरत के लिए है जो हर राज्य से इस राज्य को पृथक करते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि आज के समय में राजस्थान है, एकमात्र ऐसा राज्य जहां इतिहास के राजा-रानी की कहानियां का साक्ष्य है। यह बात सत्य है कि आज भी राजस्थान में कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां पुराने समय में राजा रानी की तरह उपयोग होने वाले महल और उस समय के बर्तन देखने को मिलते हैं।

वैसे तो हर महिलाओं को साथ सिंगार का बेहद शौक होता है, महिलाएं सोने से बने जेवरात पहनने के लिए काफी उत्सुक होती हैं। इस राज्य की महिलाएं अन्य महिलाओं से बहुत अलग है इस राज्य की हर महिला ऊपर से लेकर नीचे तक सोने से लदी हुई देखने को मिलती हैं। खास मौकों पर महिलाएं सोने से बने हर जेवरात पहनती हैं इन्हीं में से एक है मेला।

राजस्थान के जोधपुर के मेले की खासियत

जैसा कि हम जानते हैं कि समय के साथ चीजों में काफी ज्यादा परिवर्तन देखने को मिला है। गांव और शहरों के बीच पहले काफी ज्यादा अंतर था, परंतु आज के समय में गांव और शहरों में कोई विशेष अंतर नहीं रह गया है। परंतु राजस्थान आज भी अपनी परंपरा और संस्कृति को लेकर आगे बढ़ रहा है।

राजस्थान के जोधपुर (Jodhpur) में हर वर्ष एक मेला आयोजित होता है, जिसमें महिलाएं करीब 40 से 5000000 RS का जेवर पहनकर इस मेले में घूमती है और मेले का लुफ्त उठाती है। शहरों में आज के समय महिलाएं सोना और चांदी पहन कर घर से कभी बाहर नहीं निकलती।

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चारों में इतनी लूट है कि महिलाएं अपने कानों में और गले में पतली सी चैन और छोटे-छोटे इयररिंग्स भी नहीं पहनती। परंतु राजस्थान का यह मेला इतना विशेष है कि महिलाएं ऊपर से लेकर नीचे तक सोने से लदी हुई एक गांव से दूसरे गांव में ऐसे घूमती हैं जैसे पूरे राज्य में वे अकेले हैं।

बिश्नोई समाज का मेला

बताया जा रहा है कि राजस्थान के जोधपुर के खेजड़ली गांव में हर वर्ष यह मेला (Rajasthan Unique Fair) आयोजित किया जाता है। यह मेला (Mela) विश्नोई समाज की महिलाओं का होता है, जिसमें विश्नोई समाज की महिलाएं भीड़भाड़ से भरे इस मेले में ऊपर से लेकर नीचे तक भारी भरकम सोने के बने जैवरातों को पहन कर घूमती है।

Gold Jewelry
Gold Jewelry File Photo From Pixabay.

इस मेले में विश्नोई समाज की महिलाएं पूरे राजस्थान के आस-पास के गांव से एकत्रित होकर इस मेले में जमा होती है। यह एक प्रकार का समाज मिलाव कार्यक्रम होता है जिसमें एक समाज की सभी महिलाएं और पुरुष आपस में मिलते हैं। यह गहने इतने महंगे होते हैं कि इनकी कीमत सुनकर आपके भी होश उड़ जाएंगे।

इस मेले में दिखती है राजस्थान की परंपरा

जैसे जैसे समय बीत रहा है वैसे वैसे भारत के कई राज्यों में पाश्चात्य सभ्यता ने अपना पैर पसारा है। पाश्चात्य सभ्यता का कुछ असर राजस्थान में भी देखने को मिलता है। इसीलिए राजस्थान के पुराने समय के जेवर आज कई महिलाओं के पास देखने नहीं मिलती आज भी पारंपरिक जेवरात विश्नोई समाज की महिलाओं के पास देखने मिलते हैं।

इन जेवरातो (Jewellery) को आप इस मेले के दौरान कई महिलाओं के पास देख सकते। स्थान का प्रसिद्ध आभूषण आड आभूषण है जिसे महिलाएं अपने गले में पहनते हैं यह काफी वजनदार आभूषण होता है परंतु इस राज्य के पहनावे की शोभा इसी आभूषण से आती है। इस राज्य में गहनों को ही संपन्नता और समृद्धता का प्रतीक माना जाता है।

राजस्थान का 1787 का इतिहास

जैसा कि हम जानते हैं कि विश्नोई समाज पर्यावरण का रक्षक कहलाता है। इसी पर आधारित राजस्थान का सन 1787 का इतिहास भी काफी प्रसिद्ध है। बताया जाता है कि वर्ष 1787 में पेड़ों की कटाई के लिए गए लोगों का विरोध बिश्नोई समाज के लोगों ने किया था।

खेजड़ली गांव (Khejarli Village) के तात्कालिक महाराजा के आदेश पर लोगों ने खेजडली गांव के वनों की कटाई करनी चाही, परंतु विश्नोई समाज के 363 लोगों ने अपनी जान निछावर कर पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए वनों की कटाई नहीं होने दी।

पर्यावरण के प्रति प्रेम और पर्यावरण के लिए जान गवाने वाले लोगों की याद में हर वर्ष इस मेले का आयोजन किया जाता जिसमें पूरा विश्नोई समाज एकत्रित होकर उन लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं। साथ ही वनों की रक्षा के लिए प्रण लेते हैं।

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