
Mahoba: आजकल सोशल मीडिया का प्लेटफार्म काफी बड़ा प्लेटफार्म हो गया है लोग इसका इस्तेमाल काफी ज्यादा मात्रा में कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि यह प्लेटफार्म काफी उपयोगी साबित हो रहा है। एक समय छोटी-बड़ी चीजों को अन्य लोगों तक पहुंचने में काफी समय लगता था, परंतु आज का समय ऐसा है कि एक क्षण में यहां की खबर देश के कोने कोने में पहुंच जाती है।
वैसे तो सोशल मीडिया में आए दिन कुछ ना कुछ मस्ती मजाक या फिर प्रेरणा देने वाली चीजें वायरल होती हैं। परंतु आज की इस वायरल तस्वीर में कुछ अलग ही है। यह तस्वीर प्रेरणा, भावुक कर देने वाली और लोगों को राह दिखाने वाली तस्वीर है। लड़कियों के लिए समस्याएं आज से नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही है।
कहते हैं लड़कियां पराई होती हैं, माता-पिता के घर में रहे तो लड़कियां ससुराल की अमानत होती है और ससुराल में रहे तो बोलते हैं पराए घर से आई है। लड़कियों के पास इस दुनिया में खुद का कुछ नहीं है, परंतु वह देने के लिए बहुत कुछ रखती हैं। मां के रूप में हो या फिर बहन के रूप में या एक बेटी के रूप में बेटियां हर रूप में अपना प्यार बिखेरती है। आज की कहानी है उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की जहां एक बेटी ससुराल से पहले परीक्षा देने पहुंची।
यूपी की बेटी ने बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान को किया कर
बताया जा रहा है कि यह घटना उत्तर प्रदेश राज्य के महोबा (Mahoba) शहर की है, जहां शादी के पश्चात विदाई के वक्त एक बिटिया परीक्षा देने पहुंची। बेटी के बिदाई को दूल्हा और सारे बराती उसके परीक्षा (Exam) देने तक इंतजार करते रहे।
जानकारी के अनुसार वीर भूमि राजकीय महाविद्यालय की छात्रा रंजना b.a. तृतीय वर्ष की छात्रा है। जिस वक्त उनकी शादी थी, उसी वक्त उनके तृतीय वर्ष के परीक्षा का आयोजन हो गया था, ऐसे में उन्होंने परीक्षा को पहली प्राथमिकता दी और उसके बाद शादी को महत्व दिया।
रंजना (Ranjana) ने अपनी विदाई से पहले पेपर हॉल में पहुंचकर पेपर दिया, उसके बाद रंजना के मायके वालों ने उसे ससुराल के लिए बड़ी ही धूमधाम से विदा किया। भारत सरकार के द्वारा चलाई जा रही बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ योजनाओं को साकार करने में इस बिटिया ने अपना बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस मामले ने माता-पिता की सीमा को गर्व से चौड़ा किया
उत्तर प्रदेश के महोबा की इस मामले में बिटिया के माता पिता को अपनी बेटी पर गर्व करने का मौका दिया। जानकारी के अनुसार वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय की बीए तृतीय वर्ष की छात्रा रंजना कुमारी बताती है, कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के 2 वर्ष बड़े ही आराम से व्यतीत किए और तीसरे वर्ष में उनके माता-पिता ने अपनी बेटी की शादी रचाने का फैसला लिया।
आगे भी कहती है कि जिस वक्त उनकी शादी होना था। उस वक्त परीक्षा भी आयोजित होनी थी। परंतु उन्हें लगा कि शादी के आगे पीछे परीक्षा समाप्त हो जाएगी, परंतु ऐसा नहीं हुआ, बल्कि जिस दिन रंजना की विदाई होना था उसी दिन रंजना का 11:00 बजे से 2:00 बजे तक परीक्षा होना था।
दूल्हा और बारातियों ने किया दुल्हन का इंतजार
जब रंजना को परीक्षा के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने अपने परिवार को अपनी परीक्षा के बारे में बताया तब उनके माता-पिता ने कहा कि शादी को अब आगे नहीं बढ़ाया जा सकता इसीलिए शादी तो होगी ही तब रंजना ने फैसला लिया कि वह शादी भी करेंगे और परीक्षा भी देंगे।
उन्होंने शादी के जोड़े में ही अपने b.a. थर्ड ईयर की परीक्षा दी और तब तक रंजना के दूल्हा और बारातियों ने रंजना का इंतजार किया। रंजना के इस फैसले ने समाज के साथ-साथ देश की अन्य बेटियों के लिए भी एक प्रेरणा बनी।
रंजना महाविद्यालय की मेधावी छात्रों में शामिल है
रचना के दूल्हा जिनका नाम राजेश कुमार कहते हैं कि उन्हें रंजना का इंतजार करने में कोई भी दिक्कत परेशानी नहीं हुई बल्कि उन्हें खुशी थी कि उनकी पत्नी समाज के लिए एक प्रेरणा बन रही है पढ़ाई के साथ साथ जीवन के अन्य फर्जों को भी भली-भांति निभा रही हैं।
रंजना की कॉलेज के प्राचार्य जिनका नाम सुशील बाबू है उनका कहना है कि रंजना उनके कॉलेज की काफी होनहार और मेधावी छात्रा है। वे कहते हैं कि हाथों में मेहंदी और लाल जोड़े में रंजना को पेपर हॉल में देख उन्हें बेहद खुशी हुई क्योंकि ऐसा करना हर किसी के लिए संभव नहीं होता। रंजना के इस कारनामे को देखकर हर कोई उनकी सराहना कर रहा है।



