रेलवे के अंतर्गत इस कंपनी ने कीर्तिमान बनाया, पहाड़ों के नीचे 1 KM लंबी सुरंग रिकॉर्ड टाइम में बनाई

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Rishikesh Karnaprayag Railway Tunnel
Indian Railways Completes Tunneling on Rishikesh-Karanprayag Rail Line in Record 26 days. The Larsen And Turbo (L and T) team Completed it.

Delhi: भारतीय रेल दुनिया की सबसे बड़ी रेल नेटवर्क में से एक मानी जाती है। वैसे तो देश के कोने-कोने में पहले से रेलवे स्टेशंस एवं ट्रेन की सुविधा उपलब्ध है। परंतु अब उन्हें और आधुनिक बनाने की प्रयास शुरू हो चुके हैं। जिसके चलते देश के कुछ ऐसे हिस्से हैं, जो भौगोलिक दृष्टि से काफी चैलेंजिंग हैं। जिनमें उत्तराखंड है, चारों तरफ पहाड़ एवं गहरी-गहरी खाई के चलते यह पर रेल नेटवर्क का विकास कार्य रुका हुआ था।

अब रेलवे ने आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए एक प्राइवेट कंपनी स्कोर अपना काम सौंप दिया। इसी में एलएनटी ने भी रेलवे के एक प्रोजेक्ट को कंप्लीट करने का कांटेक्ट लिया है। जिसके अंतर्गत अभी हाल ही में उत्तराखंड (Uttarakhand) के एक रेल प्रोजेक्ट के अंतर्गत 1 किलोमीटर से लंबी सुरंग (Tunnel) तैयार कर दी वह भी सिर्फ 26 दिनों में। आइए जानते हैं, इस प्रोजेक्ट के बारे में डिटेल से।

उत्तराखंड में यह सुरंग शिवपुरी से ब्यासी के मध्य बनी है

उत्तराखंड में रेलवे लाइन के नेटवर्क (Railway Line Network) को बढ़ाने के लिए ऋषिकेश से पहाड़ों के नीचे से होते हुए करणप्रयाग तक रेल लाइन प्रोजेक्ट (Rishikesh Karnaprayag Rail line Project) का काम शुरू कर दिया गया है। रेलवे के अनुसार इसमें 16000 करोड से भी अधिक का खर्च होगा।

भौगोलिक दृष्टि से यह काफी कठिन और एक चैलेंजिंग प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इसीलिए लाइन में यह 1 किलोमीटर की सुरंग शिवपुरी से ब्यासि के बीच में तैयार की गई है। जिसे एलएनटी कंपनी ने रिकॉर्ड टाइम में महज 26 दिनों के अंदर कंप्लीट कर डाला।

इस अचीवमेंट के लिए रेलवे डिपार्टमेंट के साथ साथ उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी जी ने भी एलएनटी की पीठ थपथपाई है। इस सुरंग की कुल लंबाई लगभग 1012 मीटर बताई गई है।

पूरा प्रोजेक्ट करीब 125 किलोमीटर लंबा है

उत्तराखंड के इस रेल लाइन प्रोजेक्ट 2 में लगभग 125 किलोमीटर लंबी ट्रैक बिछाने का काम किया जा रहा है। जिसमें सबसे चैलेंजिंग है, इसमें 100 किलोमीटर की रेल लाइंस सुरंग के अंदर से होकर के गुजरेगी। इस प्रोजेक्ट के जरिए उत्तराखंड के चार प्रमुख स्टेशनों को जोड़ा जा रहा है, तो यह लाइन गढ़वाल, टिहरी, करणप्रयाग एवं देवप्रयाग से होकर गुजरेगी।

रेलवे की नई रेल लाइन के जरिए एक ओर भारतीय रेल का विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड के नागरिकों के लिए बहुत सुविधाजनक हो जाएगा। 12 महीने इनके जरिए यात्री सफर कर सकेंगे खास करके जब बर्फ की वजह से रोड ब्लॉक हो जाती हैं तब यह रेल लाइन वरदान साबित होंगी।

भविष्य में चार धाम यात्रा को भी जोड़ा जाएगा रेलवे नेटवर्क से

आपको बताना चाहेंगे इस रेल प्रोजेक्ट 2 के अंतर्गत रेलवे का टारगेट है 12 नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण करना। इसके लिए 17 सुरंगों को बनाना होगा। जिनमें से 11 सुरंगों की चौड़ाई व्यास 8 मीटर के करीब रखी जाएगी। दूरी की बात करें तो यह लगभग 6 किलोमीटर लंबी होंगी।

आपको जानकार हैरानी होगी कि अभी तक रेलवे ने 35 किलोमीटर लंबी सुरंगों का निर्माण ऑलरेडी कर लिया है। आने वाले समय में तीर्थ यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के चारो धाम को रेलवे नेटवर्क के द्वारा जोड़ने की कवायत भी शुरू हो गई है। यह निश्चय ही भविष्य के कल्याणकारी प्रोजेक्ट साबित होंगे। इनसे उत्तराखंड टूरिज्म का विकास कई गुना हो जाएगा, जिससे वहां के लोगों की आमदनी भी बढ़ेगी।

एलएनटी है देश की एक अग्रणी और भरोसमंद कंपनी

दोस्तों आपको बताना चाहेंगे एलएनटी कंपनी (L and T Company) का इतिहास भारत में बहुत पुराना है दरअसल इस कंपनी की स्थापना 1946 में ब्रिटिश से आए दो दोस्त जिनके नाम हैनिंग हॉल्क लार्सन, सोरन क्रिस्टियन टूर्बो था। जिस वजह से इन्होंने अपनी कंपनी का नाम लार्सन एंड टूब्रो रखा।

आजादी के बाद इस कंपनी ने देश में अपने पैर पसारना शुरू किए और आज लगभग हर क्षेत्र में यह एक लीडिंग ब्रांड बन चुका है। वैसे यह कहना गलत नहीं होगा कि भले इसकी शुरुआत विदेश से आए दो दोस्तों ने की थी, परंतु आज यह पूर्ण रूप से भारतीय कंपनी के तौर पर काम कर रही है।

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