
सुप्रीम कोर्ट ने आज अयोध्या मसले को लेकर सभी पक्षों को बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि वो 18 अक्टूबर के बाद अयोध्या मामले में अपने पक्ष पेश करने के लिए एक भी Extra दिन नहीं दे सकता है। आज अयोध्या मासले में सुनवाई का 33वां दिन है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमे Summary लिखने में चार सप्ताह का टाइम लगेगा इसलिए निश्चित की गई समय सीमा को नहीं बढ़ाया जा सकता।
रंजन गोगोई ने बताता कि अगर 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी नहीं होती तो निर्णय देने का मौका समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आज का दिन मिलाकर हमारे पास सुनवाई के लिए काफी कम समय बचा हैं। उन्होंने कहा कि अगर निर्णय 4 सप्ताह में सुनाया जाता है तो ये एक चमत्कार से कम नही होगा।
इससे पहले 18 सितंबर को रंजन गोगोई ने सभी पक्षों को अयोध्या मामले में 18 अक्टूबर तक अपनी दलीले समाप्त करने का आदेश दिया था। अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनवाई के 26 वें दिन 18 सितंबर को सभी पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखने का अपनी Scheduling Submit किया जिसके बाद इस ये तारीख निश्चित की गई।
रंजन गोगोई ने बताया था हम सभी 18 अक्टूबर तक सुनवाई खत्म करने के लिए एक संयुक्त कोशिश करेंगे। उन्होंने यह भी इन्फॉर्मेशन कि अदालत सुनवाई के लिए एक घंटे का समय बढ़ा सकती है और आवश्यकता पड़ने पर शनिवार को भी सुनवाई कर सकती है और सुनवाई खत्म कर सकती है।
Ayodhya land dispute case: Supreme Court said that it cannot give an extra day after October 18 for parties to complete their submissions in the case. Today is the 32nd day of hearing in the case. pic.twitter.com/Bj7H67fXrO
— ANI (@ANI) September 26, 2019
न्यायालय ने ये भी स्पष्ट किया था कि अयोध्या की कार्यवाही अभी भी गोपनीय तरीके से की जाएगी। कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया था कि अगर दोनो पक्ष मध्यस्थता पैनल का सहारा लेकर मामले को निपटाने का विचार रख सकते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं और कोर्ट के सामने समझौता प्रस्तुत कर सकते हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं ऐसे में वो अयोध्या मामले को अपने रिटायर होने से पहले ही सुलझाने का पूरा प्रयास करेंगे। 6 अगस्त को मध्यस्था में कामयाब न होने के बाद अयोध्या मामले में प्रतिदिन सुनवाई का निर्णय लिया गया था।



