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Aligarh: जहां चाह वहां राह यह कहावत आपने सुनी होगी लेकिन यह सिर्फ उनके लिए काम करती है जो स्वयं अपने लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं। आपने अक्सर सुना होगा लोग कहते हैं उन्हें आगे बढ़ने के मौके नहीं मिले परंतु सत्य येही है कि मौके हर किसी को मिलते हैं, बस लोग उसे पहचान नहीं। वो ज्यादातर समय अपनी समस्या को ही सुनाने में लगा देते हैं। अगर समाधान का प्रयास करें तो दुनिया में कोई भी काम असंभव नहीं है।
पिछले कई सालों से अगर हम सफल लोगों के इतिहास को उठाकर देखें, तो लगभग सभी लोगों ने अपने बड़े करियर की शुरुआत जीरो से ही की, ना तो उनके पास पर्याप्त साधन थे और ना ही रिसोर्सेज, उसके बावजूद वह आज सफलता के मुकाम पर पहुंच चुके हैं। हमारी आज की कहानी भी ऐसी ही एक महिला के बारे में है जो मजदूरी से व्यापारी बन गई।
यह कहानी है उस महिला की जो पति के साथ करती रही मजदूरी
आज की कहानी है आशा देवी की जो कुछ साल पहले तक अपने पति के साथ उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ (Aligarh) के अंतर्गत टप्पल ब्लॉक स्थित खंडेहा गांव (Khandeha Village) में मजदूरी का काम किया करती थी। इस काम से शाम तक इतना पैसा तो वह कमा लेते थे कि अपने परिवार का पेट पाल सकें।
लेकिन आशा देवी को शुरू से ही यह बात खल रही थी कि, दिन-रात मेहनत के बावजूद वह परिवार को एक अच्छा स्तर नहीं दे पा रही। परिवार में कई लोगों से इस बारे में मशवरा करने के बाद भी किसी ने भी कोई समाधान नहीं दिया। क्योंकि सभी लोग मजदूरी वर्ग से आते थे, तो उनमें शिक्षा का भी अभाव था और बड़ी सोच भी लिमिटेड रखते थे।
अपने इस आइडिया को साकार करने लगा दी जीवन भर की पूंजी, सरकार से भी मिली मदद
आशा देवी (Aasha Devi) के लगातार सोच और प्रयास का नतीजा यह था कि, उन्हें एक दिन आइडिया आया आरो द्वारा वाटर प्यूरीफायर का प्लांट (Water Purification Plants) लगाया जाए। और इसके द्वारा प्रोसेस किया गया फिल्टर वाटर अलग-अलग दुकानों और कारखानों में पहुंचाया जाए तो प्रॉफिटेबल होगा।
यह बात सोचने में आसान लग रही परंतु, यह एक बड़े इन्वेस्टमेंट का काम था और एक मजदूर होते हुए इतना पैसा इकट्ठा करना आशा जी के लिए सरल नहीं था। इसके लिए उन्हें सरकार से 52000 RS का लोन प्राप्त हुआ एवं अपनी जीवन भर की पूंजी लगभग डेढ़ लाख रुपए मिलाकर आरो प्लांट की नीव डाली।
आज पूरा परिवार मिलकर करता है यह व्यापार
वाटर फिल्टर (Water Filter) रेडी करने के बाद सबसे बड़ा टास्क था, पानी को अलग अलग जगह डिस्ट्रीब्यूट करना। इसके लिए सीआरपी एवं ए पी की मदद से कुछ सरकारी संस्थानों तक पानी पहुंचाने का काम मिला। उन्हीं के रिकमेंडेशन पर टप्पल ग्राम के कुछ व्यापारियों ने भी आशा देवी के इस आरो प्लांट से पानी लेना प्रारंभ कर दिया। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही समय में उनका यह व्यापार जम गया।
आज पूरा परिवार आशा देवी के आईडिया की सराहना कर रहा एवं मिलकर के सभी लोग इस आरो वाटर प्लांट को मैनेज करते हैं। परिवार का कोई सदस्य प्लांट ऑपरेट करता है, तो कोई सदस्य मार्केट में डिस्ट्रीब्यूशन का कार्य कर रहा। आमदनी की बात करें तो अब आर्थिक रूप से काफी मजबूत हो चला है आशा जी का परिवार।
यह सब संभव हो पाया है एक विलेज एंटरप्रेन्योर प्रोग्राम के तहत
आशा जी जब अपने काम की तलाश में थी, तब उन्हें मदद मिली एक संस्था जिसका नाम था कम्युनिटी रिसोर्ट पर्सन एंटरप्राइज प्रमोशन द्वारा। इनके ही गाइडेंस से आशा जी को एस वी ई पी प्रोग्राम अर्थात स्टार्ट अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम की जानकारी मिली।
अभी तक राज्य की 15000 से ज्यादा महिलाएं इस प्रोग्राम के जरिए एक सफल बिजनेस वूमेन (Business Woman) बन चुकी है। करीब 18 जिलों में चलने वाला ये मिशन जल्द ही पूरे राज्य में लागू होने वाला है। भानु गोस्वामी जो इस मिशन के डायरेक्टर है।
उनके अनुसार यह मिशन साधारण महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं जहां एक आम महिला को ना केवल सरकार के जरिए लोन मुहैया हो जाता है, बल्कि उन्हें दिशानिर्देश भी प्राप्त हो रहा। आप भी अपने आसपास ऐसे किसी अवसर की तलाश कर सकते हैं आगे बढ़ने के लिए।



