
Dahanu: आज देश की महिलाएं हर क्षेत्र में अपना डंका बजा रही है, टीचर से लेकर किसी बड़ी इंटरनेशनल कंपनी के सीईओ जैसी पोस्ट पे भी अपना रोल अदा कर रही। ऐसे में महिला चाह ले तो उम्र के किसी भी पड़ाव में अपने आप को ऊंचा उठा सकती है।
ऐसी ही आज की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं। जिसमें एक महिला जिन्होंने 67 वर्ष की उम्र में निर्णय लिया की बिजनेस की तरफ आगे जाना है, अपने पति के व्यापार को सपोर्ट करने के उद्देश्य से, और महज कुछ ही सालों में खड़ा कर दिया एक राष्ट्रीय स्तर का फूड प्रोसेसिंग ब्रांड (Food Processing Brand)।
आज ना केवल वह सफल है, बल्कि अपने जरिए गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार दे रही है। बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करें रही। Age Is Just A Number की कहावत को चरितार्थ करते हुए आइए जानते हैं श्रीमती लतिका पाटिल की कहानी (Latika Patil)।
महाराष्ट्र के इस गांव की रहने वाली है श्रीमती लतिका
जानकारी के अनुसार यह कहानी है महाराष्ट्र राज्य के छोटे से गांव दहानू (Dahanu, Maharashtra) की। इनके पति का नाम श्रीमान अच्युत पाटिल है। लतिका जी बिजनेस वूमेन (Business Woman) बनने से पहले 2015 तक एक सरकारी अधिकारी के तौर पर नौकरी करती रही है।
आम तौर पर देखा गया है कि रिटायरमेंट के पश्चात लोग आराम की जिंदगी बिताना पसंद करते हैं। लेकिन इसके उलट लतिका (Latika) जी ने रिटायरमेंट के बाद आज लगभग 67 वर्ष की उम्र में निर्णय लिया कि, अब पति के व्यापार में उनकी मदद करने के उद्देश्य से बिजनेस किया जाए। इस तरह रिटायरमेंट के बाद उन्होंने एक बिजनेस वूमेन के तौर पर अपने कैरियर को दोबारा से गति प्रदान की और यहां पर भी वह सफल रही।
परिवार में सालों से होती आ रही है चीकू की खेती
लतिका जी के पति श्री अच्युत बताते हैं कि वह पिछले 20 वर्षों से चीकू की खेती करते आ रहे हैं। इनके पास करीब 4 एकड़ का चीकू फार्महाउस है। उस पूरे गांव में ज्यादातर परिवारों में चीकू की खेती (Sapota Farming) का ही चलन है।
अपने फॉर्म हाउस से निकले चीकू को यह आसपास की कृषि मंडियों में बेचने का काम करते थे। चुकी देखा यह गया है कि चीकू एक ऐसा फल है जो, यदि समय पर उपयोग नहीं किया गया तो बहुत जल्दी खराब हो जाता है। इसलिए जब यह फल बच जाते थे, तो चुकी को सूखा करके बेचने का काम करने लगे परंतु इस प्रोसेस में भी उन्हें शत-प्रतिशत सफलता नहीं मिल पा रही थी।
20 साल से फूड प्रोसेसिंग करने के बावजूद नहीं मिल रही थी सफलता सोलर ड्रायर ने किया कमाल
पिछले 20 सालों से चीकू को सुखाकर के बेचने का काम कर रहे थे। परंतु उसमें उनके प्रोडक्ट की क्वालिटी मार्केट के अनुरूप नहीं बन पा रही थी। ऐसे में जब श्रीमती लतिका जी ने इस समस्या को करीब से समझना शुरू किया, तो उन्होंने पाया कि धूप में सुखाने का जो तरीका है वह पर्याप्त नहीं है।
इसके निवारण के दौरान ही इनके पुत्र निनाद ने बताया कि यदि सोलर ड्रायर का इस्तेमाल किया जाए तो इन फलों को कम समय में अच्छी गुणवत्ता के साथ सुखाया जा सकता है। फिर क्या था उन्होंने तुरंत 1 सोलर ड्रायर मशीन खरीदी और यह निर्णय उनके लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ।
औरा ग्रीन ब्रांड आज देशभर में ऑनलाइन पहुंचा रहा अपने फूड प्रोसेस प्रोडक्ट, खोला आउटलेट
आगे। चल के लतिका जी ने गांव के अन्य लोगों को भी इस काम में जोड़ना शुरू किया। जिससे वह अपने प्रोडक्शन को बढ़ा सकें। इस काम को और बेहतर करने के लिए बकायदा लतिका जी ने अलग-अलग इंस्टिट्यूट से सोलर ड्रायर मशीन को चलाने की ट्रेनिंग ली।
फूड प्रोसेसिंग से संबंधित कुछ अन्य कोर्सेज भी उन्होंने किए। सीखने से जो ज्ञान अर्जन किया उसके सही इस्तेमाल से आज उनके पास 20 से ज्यादा सोलर ड्रायर उपलब्ध है, जिनकी कीमत प्रति मशीन 40000 RS से अधिक होती है। वही अपने इस ब्रांड का नाम उन्होंने और औरा ग्रीन (Aura Green Cafe) रखा है। जिसकी मार्केटिंग अपने पुत्र निनाद के जरिए करवाती हैं।
आज इस डिजिटल दुनिया में लोग घर बैठकर होम डिलीवरी के जरिए औरा ग्रीन के सारे प्रोडक्ट ऑर्डर कर सकते हैं। आप भी ऑर्डर करना चाहे तो निनांद के इस नंबर 7021437213 पे ऑर्डर कर बुला सकते हैं चीकू से संबंधित कोई भी प्रोडक्ट।



