
Raipur: भारत देश में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। गाय से प्राप्त तत्व जैसे गोबर गोमूत्र और दुग्ध सबसे पवित्र माना जाता है। पूजा स्थानों में भी सबसे पहले गाय के गोबर (Cow Dung) का पूजन किया जाता है। उनके स्थान को गाय के गोबर से लीप कर शुद्ध माना जाता है। गाय से प्राप्त तत्व वर्तमान समय में व्यापार का एक माध्यम बन गया है। यह माध्यम लोगों को कुछ ही समय में करोड़पति बना देता है।
आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको छत्तीसगढ़ के उन महिलाओं के बारे में बताएंगे जो गोबर से ढेरों उत्पाद बनाकर मार्केट में बेचती है और लाखों रुपए का लाभ कमाती हैं। इतना ही नहीं इन महिलाओं द्वारा निर्मित गोबर के टाइल्स की मांग मार्केट में बहुत ज्यादा है, तो आइए जाने महिलाओं को कैसे आईडिया आया इस काम का।
महिलाओं का रोजगार का साधन
छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंत्री द्वारा चलाई जा रही गोबर खरीदी योजना के तहत महिलाओं को बढ़िया रोजगार मिल गया है। एक समय ऐसा था कि महिलाएं अपने घरेलू काम से फुर्सत होने के बाद कोई अन्य काम नहीं कर पाती थी, परंतु आज की स्थिति यह है कि यह महिलाएं घर के काम के बाद घर के बाहर का काम करती है और घर को आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं।
छत्तीसगढ़ की महिलाएं गोबर से कई प्रकार के उत्पादों (Cow Dung Products) का निर्माण कर रहे हैं जैसे बिजली चप्पल उपले जैविक खाद और ना जाने क्या-क्या। अब तो महिलाएं इस गोबर से घरों पर लगने वाली टाइल्स का भी निर्माण कर रही हैं जिसकी मार्केट में इस समय काफी ज्यादा मांग है।
स्व सहायता समूह ने दिलाया महिलाओ को रोजगार
जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर के अंतर्गत आने वाला गोकुल नगर में एक गौठान है और उस गौठान की देखभाल स्व सहायता समूह की महिलाएं करती हैं। देखभाल के साथ-साथ महिलाएं गोबर से 30 प्रकार के उत्पादों का निर्माण करती हैं, जो मार्केट में अच्छे दाम पर बिकते हैं। महिलाएं इसी समूह के माध्यम से आज आत्मनिर्भर बन रही हैं।

इस समूह में लगभग 13 महिलाएं काम करती हैं। गाय के गोबर के लकड़ी, कंडे, धुप, हवन सामग्री, खाद, गुलाल, मूर्तियां, गमले, टाइल्स, आदि प्रोडक्ट मार्केट में काफी तेजी से बिकते हैं, क्योंकि यह उत्पाद इको फ्रेंडली है। जिस वजह से लोग इन्हें खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं।
समूह की महिलाओं ने बताया कि उन्होंने कुछ ऐसे प्रोडक्ट का भी निर्माण किया जो पूरे विश्व में पहली बार बने हैं जैसे गोबर से निर्मित चप्पल सूटकेस घड़ियां पेंटिंग आदि। महिलाएं बताती हैं कि 1 वर्ष में करीब 300000 RS तक कमा लेती हैं।
छत्तीसगढ़ शासन की योजना पर बना गौठान
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) शासन की तरफ से चलाई जा रही फ्लैगशिप योजना “नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी” में गोकुल नगर में 2.5 एकड़ जमीन में गौठान बनाया गया है। इस गौठान में गाय के गोबर को बेचा नहीं जाता बल्कि इस गोबर से स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले उत्पाद बनाए जाते हैं।
इन उत्पाद से महिलाएं लाखों रुपए का मुनाफा कमाते हैं और आपस में एक समान बांट लेती हैं। स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि उनके उस गौठान में करीब 400 देसी गाय हैं जो प्रतिदिन 3000 किलोग्राम गोबर करती हैं।
@chennaicorp Marina Beach this morning. Cleaners have dry brooms no access to water to clear cow dung and dog poop. Broken and mismatched tiles at many spots. Corporation abd citizens, let us be ashamed of our inability to maintain public places. pic.twitter.com/gTedN9hIaY
— californiasam (@californiasam) July 19, 2022
इस गोबर से 30 प्रकार के प्रोडक्ट बनाती हैं, इन प्रोडक्ट में उनका सबसे खास प्रोडक्ट है गोबर के टाइल्स (Cow Dung Tiles) जो वर्तमान समय में काफी तेजी से बेचे जा रहे हैं। स्व सहायता समूह की एक महिला ने बताया कि उनके पति के देहांत के बाद उन्हें घर चलाना काफी मुश्किल हो गया था 6 महीने तक उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा जब उन्होंने गोबर से उत्पादों का निर्माण शुरू किया तब से वे अच्छी तरह अपना घर परिवार चला रहे हैं।
बजट का ब्रिफकेश छाया भारत में
वर्ष 2021-22 में छत्तीसगढ़ राज्य के बजट के लिए गोबर के ब्रिफकेस का इस्तेमाल किया गया था जो रायपुर के गोकुल नगर के गौठान में निर्मित किया गया था। स्व सहायता समूह की महिला नामित पाल ने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर ब्रीफकेस का निर्माण किया था। इस ब्रीफकेस ने महिलाओं को पूरे भारत में सम्मानित कराया था। आज भी इस ब्रीफकेस की चर्चाएं भारत में होती हैं।



