
Pithoragarh: भारत देश में कई सारे पर्यटन क्षेत्र है, उत्तराखंड की हर एक जगह दर्शनीय हैें। अक्सर लोग बर्फीली पहाड़ियां और वहां की खूबसूरती को काफी ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे में अक्सर लोग उत्तराखंड और वहां के इलाकों में जाना काफी ज्यादा पसंद करते हैं।
उत्तराखंड के शहरों में नैनीताल, मसूरी, ऋषिकेश, कौसानी काफी ज्यादा प्रसिद्ध है। तभी यहां पर घूमने वाले लोगों की भी कभी कम नहीं होती। परंतु क्या आपने कभी सोचा है कि उत्तराखंड में कोई ऐसी जगह होगी, जो पर्यटकों की दृष्टि से दूर होगी और वह जगह खूबसूरती का करिश्मा होगी।
दोस्तों ऐसी ही एक जगह है, जो उत्तराखंड मैं ही मौजूद है। हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के 1 गांव (Village) जिसका नाम मुन्सियारी (Munsyari) है। वहां के स्थानीय लोग इस गांव को हिमनगरी में कहते हैं। दिल्ली से 300 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ है। जहां से 7200 फीट की ऊंचाई पर बसा मुंसियारी गांव से ट्रेकिंग के लिए कई ट्रैक प्रारंभ होते हैं, तो आइए जाने और क्या है खास इस शहर में।
मुनस्यारी की राहे है काफी आसान
आपको बता दें मुनस्यारी तक पहुंचने का रास्ता काफी सरल है, आप दिल्ली से हल्द्वानी तक बस या ट्रेन से आसानी से आ सकते हैं। पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के लिए आपको सीधी बस मिल जाती है। जहां से आप सीधा मुंस्यारी तक का सफर तय करेंगे। पिथौरागढ़ से मुंसियारी तक का रास्ता करीब 5 घंटे का है। आपके यह 5 घंटे काफी आसानी से कट जाएंगे, क्योंकि मुंस्यारी का रास्ता भी काफी खूबसूरत है।
Football exist everywhere in India.
This football pitch is located in remote village Munsyari, Uttarakhand.
We need a right direction, genuine efforts and collaborative approach to achieve our untapped football potential.
Picture courtesy: Johar FC pic.twitter.com/alQ1DKh23f
— Shaji Prabhakaran (@Shaji4Football) June 8, 2022
इस शहर का इतिहास एक म्यूजियम बयां करता है, जिसकी स्थापना वहां के रिटायर्ड प्रोफेसर शेर सिंह पंगते ने की है। इन्होंने इस म्यूजियम की स्थापना की और यही वह शख्स है, जो 1949 से लेकर 1992 तक का इतिहास जानते हैं।
ट्राइबल म्यूजियम हेरिटेज बनाने के पीछे का सच
ट्राईबल म्यूजियम हेरिटेज (Tribal Heritage Museum Munsiyari) क्यों बनाया गया, इसके पीछे काफी इंटरेस्टिंग कहानी है, स्थानीय लोग बताते हैं कि ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले से मुंसियारी के साथ-साथ नेपाल और तिब्बत में सेंधा नमक, गुड, कपास और एलुमिनियम मोटरसाइकिल आदि का व्यापार काफी जोरों शोरों से चलता था।
#Munsiyari lies in the easternmost hill region, #Pithoragarh, Uttarakhand and houses a tribal heritage museum that showcases rare exhibits depicting the culture, history, tradition and lifestyle of the local tribal and pastoral communities. pic.twitter.com/CSCVXJVoeE
— Rural Tourism India (@RuralTourismIND) April 8, 2022
व्यापारिक दृष्टि से मुनस्यारी काफी स्ट्रांग जगह थी, इसीलिए ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) ने यहां की खासियत को देखते हुए दो विशेष काम को अंजाम दिया। पहला वहां के बच्चों को शिक्षित करना और दूसरा मुनस्यारी से नेपाल और तिब्बत तक जाने वाले मार्ग को बेहतर तरीके से निर्मित करना।
वर्ष 1962 में चीन ने तिब्बत पर अपना अधिपत जमा लिया और भारत और तिब्बत के बीच हो रहे व्यापार को बंद कर दिया। जब व्यापार बंद हो गया, तो वहां के लोगों को रोजगार मिलना भी बंद हो गया, जिससे वह काफी परेशान हुए तभी सरकार ने उन्हें आरक्षण प्रदान किया और नौकरी मुहैया कराई।
Dr. Sher Singh Pangti, a Professor acting as the guardian of #bhotiya legacy.
Tribal #Heritage Museum #Munsiyari @sanjayuvacha @AlPallavi pic.twitter.com/FyEESc083W— Authindia (@authindia) May 14, 2017
वहां के निवासियों को रोजगार तो मिल गया था, परंतु रोजगार के लिए गांव से शहर की तरफ पलायन करने लगे। स्थिति को देखते हुए प्रोफ़ेसर सिंह ने उस गांव की धरोहर को संभालने के लिए ट्राइबल म्यूजियम का निर्माण किया। गांव के साथ-साथ यहाँ अन्य पर्यटक जगहें भी हैं।
उत्तराखंड का प्रसिद्ध मंदिर नंदा देवी मंदिर
उत्तराखंड में मुनस्यारी गांव के करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर नंदा देवी मंदिर (Nanda devi Mandir) है। यह रास्ता पूरा ट्रैकिंग के लिए है। नंदा देवी मंदिर उत्तराखंड वासियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। पूरा उत्तराखंड इस मंदिर की पूजा करने आता है।
Nanada Devi Mandir is Located in Munsiyari, Uttarakhand. The Nanda Devi Mandir is dedicated to Maa Nanda or Maa Parvati. It is one of the oldest Mandirs in Uttarakhand. pic.twitter.com/AsJujm46Ur
— Ranvijay Singh🇮🇳 (@ranvijayT90) July 25, 2021
साथ ही भारत के दूर-दूर शहरों से लोग इस जगह की खूबसूरती को देखने आते हैं, क्योंकि यह जगह ऊंचाई पर है। साथ ही हरे-भरे जंगलों से ढके पर्वतों से सुसज्जित है, साथ में मंदिर के पीछे ऊंचे ऊंचे बर्फीले पहाड़ है, जो इस जगह की खूबसूरती को बढ़ाते हैं।
थमरी कुंद हिके ट्रेल (Thamri Kund Hike Trail)
यह जगह सफेद रूई जैसे बादलों और शीशे की तरह साफ कुंड थरमई के लिए जाना जाता है। आप इस जगह से पंचाचुली पर्वत के दर्शन भी कर सकते है। बता दें कि इस कुंड (Kund) का नाम देवी के नाम पर रखा गया है।
यहां के लोगों की मान्यता है कि उस पर्वत पर कूड़ा फैलाने से मुंसियारी गांव में अधिक बारिश होती है। यहां के लोग यह भी कहते हैं कि यदि आप उस कुंड में हंसों के जोड़े को तैरता हुआ देख ले, तो आपकी किस्मत चमक जाती है।
अन्य प्रसिद्ध इलाके
खलियान, बिर्थी वॉटर फॉल, पंचचूली पर्वत जैसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थल आपको आगे के मार्ग में देखने मिलेंगे, यह सभी स्थल अपनी अलग-अलग पहचान से जाने जाते है। यहाँ आकर आप अपना यादगार फॅमिली हॉलिडे मना पाएंगे और फिर बार-बार आयेंगे।



