
Surat: महाभारत (Mahabharata) हिंदू धर्म की सबसे पौराणिक कथा है, इसके बारे में सभी लोग अच्छी तरह जानते हैं। कुछ महान व्यक्तियों को तो महाभारत का हर एक पहलू पता होगा, परंतु कुछ पहलू ऐसे भी हैं जिनसे लोग अनजान हैं। महाभारत नारी के सम्मान की लड़ाई है, साथ ही इसके जो किरदार हैं बहुत ही खास है, जिन्हें व्यक्ति अच्छी तरह जानते हैं।
महाभारत के सभी किरदारों में से सबसे खास किरदार कर्ण (Karna) का है। कर्ण अपनी वीरता दानवीरता वचन के पक्के और उनकी मित्रता के लिए पहचाने जाते हैं। इस लेख के माध्यम से हम आपको कुछ ऐसे रहस्य के बारे में जानकारी देंगे, जिसके बारे में काफी कम लोग जानते हैं।
क्यों हुआ था महाभारत का युद्ध
हम जानते हैं कि महाभारत द्रोपति के सम्मान के लिए लड़ी गई एक लड़ाई थी। जिसमें पांडवों ने जुए में अपना सब कुछ हार दिया था। उसके बाद कौरवों ने उन्हें 13 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास दिया था।
तत्पश्चात महाभारत का युद्ध प्रारंभ हुआ था, युद्ध के 17 दिन बाद सूर्यपुत्र कर्ण की मृत्यु हो गई थी। उस समय श्री कृष्ण ने कर्ण की परीक्षा ली। उन्होंने उस समय भी कर्ण से दान मांगा कर्ण दान में श्रीकृष्ण को अपने कानों के कुंडल दे दिए थे।
इस बात से प्रसन्न होकर कृष्ण भगवान (Bhagwan Shri Krishna) ने उनसे तीन वरदान मांगने को कहा तब उन्होंने अपने तीसरे वरदान में श्री कृष्ण के हाथों अपने अंतिम संस्कार (Last Rites and Cremation) करने की इच्छा जताई। जिसके बाद उन्हें सीधा वैकुंठ धाम में स्थान मिला।
कहां और कैसे हुआ कर्ण का अंतिम संस्कार
कर्ण की मृत्यु पश्चात दुर्योधन जो कर्ण के सबसे पक्के मित्र थे और पांडव जिनके बड़े भाई करण थे। जब कुंती के द्वारा पांडवों को बताया गया कि कर्ण उनके बड़े भाई थे, तो उन्हें काफी दुख हुआ उनकी मृत्यु के पश्चात और उनका अंतिम संस्कार करने के लिए दोनों ने ही इच्छा जताई, परंतु कृष्ण भगवान के द्वारा कर्ण का अंतिम संस्कार (Karna Cremation in Mahabharta) होना था, इसलिए कृष्ण भगवान दुविधा में फंस गए।
कर्ण की इच्छा थी कि उनका दाह संस्कार ऐसी जगह हो जहां पर किसी का दाह संस्कार नहीं हुआ। वह जमीन पाप मुक्त हो, इसीलिए कृष्ण भगवान काफी ज्यादा दुविधा में फंसे थे। काफी ढूंढने के पश्चात उन्हें ताप्ती नदी के किनारे 1 इंच जगह मिली, जो पाप रहित और बिना किसी शवदाह के थे, परंतु उस जगह पर दाह संस्कार होना काफी ज्यादा मुश्किल था।
श्री कृष्ण का चमत्कार
लोगों का मानना है कि कर्ण की इच्छा के अनुसार श्री कृष्ण ने स्वयं कर्ण का दाह संस्कार किया था। ताप्ती नदी के किनारे मात्र 1 इंच की जगह बची थी जहां दानवीर कर्ण का दाह संस्कार होना था। परंतु उस जगह पर करण के पार्थिव शरीर को नहीं रखा जा सकता था।
Yes in 2018 we nearly visited 100-150 temples and worth visiting places …One was this in Surat Karna temple 👇👇 pic.twitter.com/ZV0YI7AP0l
— Radhama. (@raomeenakshi7) March 13, 2021
इसीलिए भगवान श्री कृष्ण ने उस भूमि पर बाण चलाया उसके बाद उस बाण पर कर्ण के शरीर को रखकर दाह संस्कार किया। यह लीला श्री कृष्ण की रची हुई लीला है। जिस जगह पर करण का दाह संस्कार किया गया था।
#AhamSharma #AhamSharmaAsKarna.Karna temples are many. This is a temple in Uttarakhand….I could visit only one so far that is in Tulasiwadi,Surat…Radheya we all love you. . pic.twitter.com/EBkgjVtzGE
— Radhama. (@raomeenakshi7) September 12, 2021
उस जगह को आज लोग पूजते हैं, उस जगह पर तुलसी बड़ी मंदिर के नाम से जाना जाता है। लोग इस मंदिर में काफी बड़ी संख्या में पूजा करने आते हैं, यहां की मान्यता काफी ज्यादा है। साथ ही इसी इलाके में एक गौशाला भी बनाई गई है, जहां पर गोपालन होता है।
तीन पत्ता मंदिर की मान्यता
जानकारी के अनुसार उस मंदिर के पास ही तीन पत्ता मंदिर भी है, जो काफी रहस्यमई है, ऐसा बताया जा रहा है कि इस मंदिर में एक बरगद का वृक्ष है, जो हजारों वर्ष पुराना है, परंतु उस वृक्ष पर केवल तीन पत्ते ही लगे हैं, जो आज भी हरे है। अमावस्या और पूर्णिमा में यहां पर कई श्रद्धालु इस वृक्ष के दर्शन करने आते हैं, साथ ही यहां पूजा करते हैं।



