भारत के इस किले को अकबर भी नहीं जीत सका था, इस किले में खजाने से भरे 21 कुओं की कहानी जानें

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Kangra Fort
Kangra Fort History And Story In Hindi. The Kangra Fort was built by the royal Rajput family of Kangra State the Katoch dynasty.

Kangra: अगर किलो की बात करें तो प्राचीन भारत में सबसे अधिक महत्व किलों का होता था। उस समय किसी क्षेत्र या फिर राज्य का गढ किलों को ही माना जाता था। इसी वजह से जितने भी बड़े राजा या फिर शासक होते थे, वह अन्य शासकों के किलों पर विजय हासिल करने का प्रयास करते रहते थे। किसी किले को जीतना मतलब उस क्षेत्र को हासिल कर लेना होता था।

भारत में प्राचीन समय मे किलों की संख्या काफी ज्यादा थी। यहि कारण है कि आज भी पुराने किले हर क्षेत्र में प्राचीन समृद्ध तथा पुरातन इतिहास को प्रदर्शित करते है। ऐसा ही एक समृद् किला राज्य हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) मे है। इस किले को अकबर ने भी क बार जीतने का प्रयास किया था। लेकिन इस किले को हासिल करने का उनका सपना कभी पूरा नहीं हो पाया।

हिमाचल का किला जो कि फेला है 463 एकड़ में

हिमाचल के जिस किले की हम बात कर रहे हैं, वह 463 एकड़ पर बना प्रसिद्द किला है। यह भारत का प्राचीन किला है। जोकि सबसे पुराने किलों में से एक है। इस किले की अगर बात करे तो इससे संबंधित कोई ठोस प्रूफ आज तक किसी को नहीं मिला है।

इसे किस समय और किसने निर्मित किया इससे सम्बन्धित कोई जानकारी नहीं है। हिमाचल का यह किला 463 एकड़ में बना हुआ है। 1905 में जो भूकंप आया था, उसमें यह किला बहुत प्रभावित हुआ था।

हिमाचल प्रदेश का यह किला कांगड़ा (Kangra) का किला नाम से जाना जा सकता है। कांगड़ा का यह फोर्ट (Kangra Fort) किलो को पसंद करने वाले और ऐतिहासिक स्मारकों को देखने वाले शौकीन टूरिस्टों के लिए बहुत ही अच्छा लोकप्रिय किला है।

सुशर्मा चंद्र ने यह किला बनाया था, जिस पर महमूद गजनी ने भी आक्रमण किया था

यह किला धर्मशाला के पास में 20 किमी की दूरी पर स्थित है। यह किला धौलाधार के जो आकर्षक खूबसूरत नजरें है उसके लिए काफी प्रसिद्ध है। जो जानकारी मिली है उसके अनुसार यह किला करीब 3,500 वर्ष पहले बना था।

ऐसा कहा जाता है कि इस किले को कटोच वंश (Katoch Dynasty) के जो सुशर्मा चंद्र महाराजा (Maharaja Susharma Chandra) है उन्होंने बनवाया था। सुशर्मा चंद् ने महाभारत का युद्ध कौरवों के खिलाफ लड़ा था। जब महाभारत का युद्ध खत्म हो गया था। उस समय सुशर्मा जी अपने सैनिकों को लेकर उनके साथ कांगड़ा प्रस्थान कर गए थे। इस किले पर सिकंदर से लेकर अकबर और महमूद गजनी ने तक अपना अधिकार करने का प्रयास किया था।

इस किले में है खजानों से भरे हुये पूरे 21 कुएं

470 ईस्वी के समय मे कश्मीर के राजा जिनका नाम श्रेष्ठा था। उन्होंने किले पर हमला भी कराया था। यह हमला अन्य राजा द्वारा होने वाला पहला हमला था। इस हमले के बाद मे 1000 ईस्वी मे महमूद गजनी ने भी इस किले में आक्रमण किया था।

गजनी ने इस किले पर आक्रमण खजाने को लूट लेने की मंशा से किया था। ऐसा कहा जाता है इस किले पर पूरे 21 कुएं थे। जो कि आजादी से पहले थे और खजाने से भरे थे। इन खजानों में से बहुत से कुएं अंग्रेजों ने लूट भी लिए थे।

हर राजा चाहता था इसे अपना बनाना, अकबर भी रहे थे असफल

1615 ईस्वी के समय मे इस किले को जीतने के लिए मुगल सम्राट जिनका नाम अकबर (Mughal Emperor Akbar) था। उन्होंने मन बनाया था। इस किले को हासिल करने के लिए उन्होंने घेराबंदी भी की थी। लेकिन उनको इस काम मे सफलता नहीं लगी।

फ़िर 1620 ईस्वी में दोबारा से मुगल सम्राट अकबर के बेटे जिनका नाम जहांगीर था, उन्होंने चंबा के जो राजा थे, उनको मजबूर करके इस किले को हासिल कर लिया था। उसके बाद 1789 ईस्वी में इस किले को मुगलों से कटोच वंश के राजा ने अधिकार कर लिया था।

सिख राजा महाराजा रणजीत सिंह ने भी इस किले पर चढ़ाई की थी। इसे उन्होंने जीता भी था। यह किला प्राचीन समय का सबसे अहम किला था। जिस पर अधिकार करना हर राजा चाहता था। आज यह पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र है।

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