घर में गाय के आने से बदली किस्मत, अब 1 करोड़ के बंगले में शान से रहती है, घरवाले भी खुश हैं

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Lucky Cow Radha
Jalore cow radha changes the fate of gau sewak Narendra Purohit. Now living in bungalow worth 1 crore. Jalore Lucky cow Radha story.

Jalore: गाय हमारी माता समान है। इसकी सेवा करना हर भारतीय अपना परम कर्तव्‍य समझता है। घर वह सपना है, जिसे स्‍वर्ग की तरह हर कोई बनाना चाहता है। पर अगर हम यह कहे कि कोई व्‍यक्‍ति है, जिसने अपना यह स्‍वर्ग जैसा घर किसी गाय के नाम कर दिया, उसे घर में परिवार के सदस्‍य की तरह जगह दी। तो शायद आप इस पर यकीन नही करेंगे।

आज की कहानी जानकर आप जरूर इस बात पर यकीन करने लगेंगे। आज की हमारी कहानी राजस्‍थान (Rajasthan) के जालोर के रानीवाड़ा की है। जहॉं एक गाय को बिजनेसमैन जिनका नाम नरेन्‍द्र पुरोहित (Businessman Narendra Purohit) है, उन्‍होंने 1 करोड़ का बंगले में पूरे ठाटबाट से गाय को रखा है।

दरअसल बिजनेसमैन नरेन्‍द्र ने 2 साल पहले दत्‍तशरणानंद महाराज के आशीर्वाद द्वारा एक बछिया अपने घर में लाये थे। इसका नाम उन्‍होंने राधा रखा था। जब राधा (Lucky Cow Radha) नरेन्‍द्र पुरोहित के घर मे आई तो उनके परिवार में शुभ कार्य की लाइन लग गई।

उनके परिवार के हर सदस्‍य की किस्‍मत पलटने लगी। इस घर में जब बछिया को लाया गया, तो उसके ठाटबाट का पूरा ख्‍याल रखा जाने लगा। उसकी सेवा में 4 लोग हमेशा 24 घंटे मौजूद रहते है।

अगर कभी ऐसा हो जाये की गाय की तबियत खराब हो जाये, तो तुरंत ही डॉक्‍टर को घर में बुलाया जाता है। पूरा परिवार इस गाय पर अपना प्‍यार लुटाते है। राधा की आरती करना यह सब इस परिवार में किया जाता है। जब घर की प्रदिक्षणा हो जाती है, तभी इस घर के लोग भोजन ग्रहण करते है।

नरेन्‍द्र की बात करे तो वह मुंबई में कांट्रैक्‍टर तथा इलेक्ट्रिक टू व्‍हीलर मैनूफैक्‍चरिंग बीएमसी में करते है। उनका लगाव गाय के प्रति प्रारंभ से ही है। जब वह छोटे थे, तो पथमेड़ा में गोशाला में जाया करते थे। 2015 में उनका मन गाय को पालने का हुआ। गोशाला में एक छोटी बछिया देख वह उसे अपने घर ले आये। पुरोहित जी ने बड़े ही जोरो शोरो से बछिया को बैंड बाजे के साथ घर लेकर आये।

नरेंन्‍द्र पुरोहित इस विषय पर अपने विचार बताते हुये कहते है कि उनके घर में राधा माता है। उनके घर में पूरे 27 गोवंश है। जिसमें से उनकी प्रिय राधा भी है। वह बताते है कि जब वह गाय खाना ग्रहण करती है उसके बाद ही उनका परिवार भोजन ग्रहण करता है।

वह बताते है उनका घर प्रदिक्षणा भी करते है। उनका कहना है कि यह सब करके उन्‍हें असीम आनंद और सुख का अनुभव होता है, जिसे शब्‍दो में जाहिर कर पाना उनके लिये बहुत ही मुश्‍किल है।

नरेन्‍द्र जी बताते है कि जब उनके घर मे राधा का प्रवेश हुआ तो पूरे घर में रौनक सी आ गई। घर में सब कुछ सुभ होने लगा। वह बताते है कि उनका परिवार इन गायो से इतना प्रेम करता है उसे देखे बिना भोजन तक ग्रहण नहीं करते।

नरेन्‍द्र बताते है कि उनके पूरे घर में सीसीटीवी कैमरे लगे है। वह बताते है भले ही वह मुबंई में रहते हो लेकिन गांव में रहने वाली उनकी राधा के दर्शन किये बगैर उनका मन नही लगता। वह बताते है कि कई बार वह अपने गांव जाते रहते है तथा 10 10 दिन तक वहॉं रूककर आते है।

नरेन्‍द्र जी बताते है कि उन्‍होंने अभी 2 साल पहले ही 1 करोड़ का बंगला बनवाया है जोकि 266 गज में है। इसी घर में राधा उनके परिवार के साथ एक सदस्‍य की तरह रहती हे। राधा को घर में किसी भी प्रकार की पाबंदी नही है। वह जहां चाहे वहॉं अपने मन से घूमती है।

वह अब हर दिन 10 लीटर दूध भी देती है। जिसमें से ढाई लीटर निकालकर बाकी दूध वह रहने देते है, ताकि उसके बच्‍चे अपना पेट भर सके। राधा ने अब तक 3 बछडे जन्‍मे है। उनके नाम मीरा, गोपी तथा सोमा है। राधा बंगले मे पूरे ठाठ बाट से आराम से रहती है। वह बंगले में अंदर ही लापसी लड्डू यह सब खाती है। वह बाहर नही जाती है। इसलिए सूखा चारा बिल्‍कुल भी वह नही खाती है।

नरेन्‍द्र (Narendra Purohit) बताते है कि उनके पास सिर्फ राधा ही नहीं 27 और भी गाये है, जोकि उनके बंगले के बाहर में बने फार्म हाउस में रहती है। लेकिन राधा की सेवा उनके यहॉ खास की जाती है। उसकी सेवा के लिये 4 नौकर है जोकि उसकी मालिश, पैर दबाना, नहलाना, खाना खिलाना तथा तैयार करना जेसे काम करते है।

अभी हाल ही में हुये लंपी वायरस ने राधा को भी घेरा लेकिन नरेन्‍द जी का कहना है कि उन्‍होंने द्वारकाधीस में जाकर उसके लिये प्रार्थना की। जिसके चलते वह जल्‍द ही इससे रिकवर हो गई। हालांकि इस बीमारी के कारण राधा का वजन कम हो गया है, लेकिन वह फिर से पहले की तरह हो सके, इसका खास ख्‍याल रखा जा रहा है।

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