ननद-भाभी की इस जोड़ी ने तो गजब ही कर दिया, मिथिला के अचार को पूरे देश के घर घर में पहुंचा दिया

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Homemade Achar Online
This two relative women started Mithila online pickle business as Jhaji. How these Sisters-In-Law are selling Homemade Achar Online.

Photo Credits: Indtagram (jhajistore)

Darbhanga: अचार हर भारतीय थाली का श्रंगार माना जाता है। लोग साल के 12 महीने अचार का सेवन करते हैं साथ में चटपटा तीखा खट्टा अचार लोगों को खूब भाता है। भारत में अचार का चलन काफी पुराना है पुराने समय में दादी नानी मम्मी अचार बनाने में मास्टर थी पहले के समय में लोग साल भर के लिए बरी अचार पापड़ बना कर रखी थी, महिलाएं इन सब मामले में निपुण हुआ करती थी।

वर्तमान समय में अचार पापड़ और बरी जैसी चीजों से महिलाएं आज अपना व्यापार करती हैं और एक कुशल ग्रहणी के साथ सफल व्यापारी भी कहलाती है। आज के इस लेख में हम आपको दो ऐसे ही महिलाओं के बारे में बात करेंगे जिन्होंने अपने अचार को एक अलग ही लेवल दिया।

50 और 52 वर्षीय ननंद भाभी की जोड़ी ने आज अपने अचार के ब्रांड (Achar Brand) को देश के कोने कोने में और देश के हर व्यक्ति की थाली में परोसने का जिम्मा उठाया है, हम बात कर रहे हैं बिहार राज्य के मिथिलांचल इलाके की महिलाएं जिन्होने ना केवल रोजगार का साधन बनाया बल्कि हमारी देश की संस्कृति को भी बरकरार रखा तो आइए जाने उस ननंद भाभी की जोड़ी के बारे में।

झा जी नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचे जा रहे है अचार

बिहार राज्य के दरभंगा (Darbhanga) इलाके के अंतर्गत आने वाला मिथिला इलाका के निवासी कल्पना झा (Kalpana Jha) और उनकी भाभी उमा झा (Usha Jha) दोनों ही 50 वर्ष से ऊपर है, इन महिलाओं ने झा जी नाम से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई तरह के अचार बनाकर भेजना प्रारंभ किया और आज यह अचार दुनिया का सबसे प्रसिद्ध ब्रांड बन गया है।

वर्तमान समय में उनका यह अचार प्रतिदिन 250 ग्राम के जार में लगभग 50 जार देश के कोने कोने में जाता है। एक इंटरव्यू के दौरान कल्पना झा ने बताया कि उन्हें यह बिजनेस आइडिया कैसे आया वह बताती है कि वे बहुत पहले से अचार बनाती आ रही है और लोगों को उनके अचार काफी ज्यादा पसंद आता है।

पहले वे आस पड़ोस में त्योहारों के सीजन में मिठाइयों के डब्बे बाटा करती थी परंतु लोग उनसे कहते थे कि आपके द्वारा बनाया गया अचार काफी स्वादिष्ट होता है, इसीलिए आप मिठाई के स्थान पर अचार दे दिया करें, इसीलिए उनके दिमाग में अचार का व्यापार (Pickle Business) करने का विचार आया।

शुरुआत छोटी थी परंतु आज उनके साथ 10 लोगों की टीम काम करती है और उनको प्रतिदिन के आर्डर मिलते हैं जिसे वे समय पर पूरा करने के लिए लोगों की टीम बना कर उन्हें रोजगार मुहैया कर रही हैं।

10 प्रकार के अचार से की शुरुआत है

अचार क्वीन कल्पना के पति प्रशासनिक सेवा देते थे, उनका काम स्थाई नहीं था। थोड़े थोड़े समय में उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान भेज दिया जाता था। जिसके कारण उनकी पत्नी कल्पना कभी स्थाई होकर किसी काम को करने के बारे में नहीं सोच सकी। जब उनके पति प्रशासनिक सेवा से निवृत हुए तो कल्पना को अपना कारोबार शुरू करने का मौका मिल गया।

रिटायरमेंट के बाद वे अपने निजी निवास दरभंगा आकर स्थाई रूप से रहने लगे उनके इस कारोबार में उनके पति और बच्चे दोनों ने पूरा पूरा साथ दिया और उन्हें उत्साहित किया इस काम में कल्पना झा की भाभी उमा झा ने एक पार्टनर की भूमिका निभाई। क्योंकि उमा झा भी कल्पना झा की तरह ही अचार बनाने की मास्टर थी।

उमा झा पेशे से एक टीचर है और आज वे एक अच्छी बिजनेस वूमेन भी बन गई है। दोनों ननद भाभी ने मिलकर 10 प्रकार के अचार बनाकर बेचने से शुरुआत की थी और आज वे 15 प्रकार के अचार बनाते हैं और बेचती है, जिसमें से 5 तरह के तो केवल आम के अचार हैं और उनके साथ में हरी मिर्च, अदरक लहसुन, गोभी और इमली का अचार भी बनाती है, जो उनके सबसे ज्यादा प्रसिद्ध अचार में से हैं।

उमा झा ने बताया अचार बनाने का तरीका

उमा बताती है कि उन्होंने वर्ष 2020 में बिजनेस के लिए अप्लाई किया था उसके बाद उन्होंने जून 2021 में अपने झाजी स्टोर की शुरुआत की। मार्केटिंग का काम कल्पना के बेटे मयंक के द्वारा संभाला गया और आचार निर्माण और पैकिंग का काम कल्पना और उमा ने किया।

उमा ने उनके अचार के बेहतर गुण और स्वाद के बारे में बताते हुए कहा कि बिना किसी प्रिजर्वेटिव के अचार का निर्माण करती है इसके साथ ही वे उनके आचार को बिहारी तरीके से बनाते हैं उनका यह तरीका उनकी सास और मां के द्वारा सिखाया गया है, जिसकी वजह से उनके अचार में पुराना जायका है।

उमा बताती है कि अपने अचार में किसी तरह का प्रिजर्वेटिव उपयोग ना करने की वजह से उन्हें अचार बनाने में करीब 1 हफ्ते का समय लगता है और वे एक बार में करीब 1000 किलो अचार का निर्माण करती है जो कुछ ही समय में पूरा बिक जाता है।

उमा का कहना है कि उनका अचार बहुत स्वादिष्ट होता है, इस वजह से उनके स्कूल के शिक्षक उनसे अचार लेकर खाते हैं उन्हें अचार बेहद पसंद होता है। आगे वे बताती है कि वह मात्र 250 ग्राम का पैकेट तैयार करती है।

उनकी हर अचार की कीमत भिन्न-भिन्न है, जिसमें से सबसे महंगा अचार उनका लहसुन का अचार है, जिसके 250 ग्राम के पैकट की कीमत 300 RS है, परंतु उनका लहसुन का अचार स्वाद के साथ-साथ सेहत में भी काफी अच्छा है।

देश के साथ-साथ विदेश में भी आचार सप्लाई करने की हो रही है तैयारी

झां जी स्टोर (Jhaji Store) ने बहुत जल्द रफ्तार पकड़ ली थी 2 महीने के अंदर ही उनके ढेरों ग्राहक बन गए थे और वर्तमान में स्थिति यह है कि उनके एक शहर से करीब 500 आर्डर होते हैं इस तरह उनका व्यापार दिन दुगना रात चौगुना बढ़ता चला जा रहा।

Achar Business Jhaji
Photo Credits: Indtagram (jhajistore)

कल्पना बताती है कि उन्हें दिल्ली मुंबई बैंगलोर पश्चिम बंगाल से काफी सारे ऑर्डर्स मिलते हैं, इसीलिए भविष्य में वे बेंगलुरु में अपनी अचार का एक बेयर हाउस डालने वाली है, जिससे ग्राहकों को समय पर उनका प्रोडक्ट मिल सकेगा।

आगे उनका कहना है कि अभी तो वे अपने घर से ही काम को कुशल तरीके से कर रही है, परंतु जब आम का मौसम आएगा और उन्हें ज्यादा मात्रा में आम का अचार बनाना होगा। तब उस समय उन्हें किसी बड़ी जगह की जरूरत होगी। इसीलिए आने वाले समय में किसी बड़ी जगह पर अपनी अचार की यूनिट डालने का विचार कर रहे हैं।

आपको बता दें बिहारी अचार ना केवल पूरे भारत देश में बल्कि विदेश में भी प्रसिद्ध हो रहा है, क्योंकि कल्पना की बेटी न्यूयॉर्क में रहती है, इसीलिए वह विहार से अचार लेकर न्यूयॉर्क में अपने दोस्तों में बाटती है। खैर अभी कल्पना अंतर्राष्ट्रीय डिलेवरी नहीं करती इसीलिए थोड़ा समय लगेगा बिहार का स्वाद विदेश में पहुंचाने।

कल्पना बताती है कि उन्हें अचार की यूनिट लगाने में करीब 1000000 रुपए का निवेश करना पड़ा, परंतु वर्तमान में वे महीने का 600000 RS मुनाफा कमाती है। इसके साथ ही वे कहती हैं कि आज भी वे अचार बनाने में अपनी मां जिनकी अभी उम्र 85 वर्ष है, उनसे सलाह और मशवरा लेती है। लोगों को उनके हाथों का अचार बेहद पसंद आता है इस बात की खुशी उन्हें पैसों से ज्यादा है।

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