यहाँ किसान ने खीरे की खेती से अपनी किस्मत बदल ली, साल का 14 से 15 लाख रुपये का मुनाफा बना रहा

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kheere ki kheti
Rajasthan Nagaur farmer earning 14 lakh Rupees yearly from Cucumber farming. Kisaan ko kheere ki kheti se profit hua.

Nagaur: जैसा कि हम जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। इस देश में 80 फ़ीसदी युवा किसान है और अपनी जीविका खेती-बाड़ी से चला रहा है। वर्षों से चली आ रही पारंपरिक खेती वर्तमान समय में किसानों को धीरे-धीरे नुकसान की तरफ ले जा रही है।

बढ़ते प्रदूषण और लगातार वनों की कटाई से पर्यावरण और मानसून अस्त-व्यस्त हो गया है। फल स्वरूप जो फैसलो की किसी समय अच्छी पैदावार हुआ करती थी, वह पैदावार धीरे-धीरे कम होती जा रही है और पारंपरिक खेती का स्थान आज की वर्तमान और आधुनिक खेती ने ले लिया है।

वर्तमान समय में किसान भाई पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक खेती के तहत महंगी फल सब्जी उगा रहे हैं, जो उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहे हैं आधुनिक खेती के तहत लोग जैविक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में मदद कर रही है।

वैज्ञानिकों की कई तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है, जो धीरे-धीरे कृषि को सवार रही है। आज इस लेख में हम आपको एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बताएंगे, जो पारंपरिक खेती से लगातार नुकसान झेल रहा था और एक फसल ने उसकी जिंदगी बदल कर दी तो आइए जानते हैं कौन है वह शख्स।

राजस्थान के किसान भाई की कहानी

इस लेख के माध्यम से हम राजस्थान (Rajasthan) राज्य के नागौर (Nagaur) जिले के अंतर्गत आने वाला गांव गोगोर के निवासी रामनिवास चौधरी (Ramniwas Chaudhary) की बात करेंगे। जिन्होंने खीरे की फसल से खुद को आर्थिक रूप से इतना मजबूत बना लिया है कि वे 1 साल का लगभग 1400000 से 1500000 रुपए बहुत आसानी से कमा लेते हैं।

जी हां दोस्तों आधुनिक खेती की इस पहल ने रामनिवास चौधरी की जिंदगी को एक अलग ही आयाम दिया। नागौर जिले के किसान भाई रामनिवास चौधरी बताते हैं कि 1 एकड़ जमीन पर वे करीब 70000 RS की बीजों को रोपित कर सकते हैं और एक फसल में वे करीब 700000 से 800000 RS तक का मुनाफा बहुत ही आसानी से कमा लेते हैं।

polyhouse farming
Polyhouse farming demo file photo.

70000 बीजों में करीब बे 400 क्विंटल तक खीरे प्राप्त कर लेते हैं और वे साधारण खेती पे भरोसा नही करते वे अपनी खेती के लिए पॉलीहाउस (Polyhouse) और शेडनेट तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। रामनिवास यह भी बताते हैं कि मुनाफा और नुकसान बाजार के मूल्य पर भी निर्भर करता है।

मात्र 4 से 5 महीने में तैयार होने वाली फसल साल भर पैसे देती है

जहां खेती किसानी का नाम आता है, वहां लोगों को लगता है कि दिन रात मेहनत करना पड़ेगा और पैसा मुट्ठी भर भी नहीं आएगा, परंतु आधुनिक खेती के इन तरीकों ने किसानों के समय और मेहनत दोनों की बचत की है, साथ में मुनाफा मेहनत का 4 गुना होता है।

Cucumber Kheera
Cucumber Means Kheera File Photo.

रामनिवास बताते हैं कि खीरे (Kheera) की फसल के लिए बहुत कम मेहनत की जरूरत होती है, बहुत कम मेहनत में खीरे की फसल से अच्छा खासा पैसा कमाया जा सकता है। अब आपके दिमाग में आ रहा होगा कि खीरा किस भाव में मार्केट में बिकता होगा।

हम आपको बता दें मई से जून के महीने में खीरे का भाव 45 RS प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाता है और वही जब मार्केट में मौसमी खीरा (Cucumber) आना शुरू हो जाता है, तो इसके भाव गिर कर 15 से 20 RS प्रति किलोग्राम भी हो जाता है।

Cucumber vegetable file photo.

हम कह सकते हैं कि मुनाफा और नुकसान बाजार की मूल्यों पर निर्भर करता है, परंतु रामनिवास खीरे के साथ-साथ मिर्च की भी खेती करते हैं, जिस वजह से उन्हें साल में दो बार फसल प्राप्त होती हैं और वह 1 साल में करीब 14 से 1500000 रुपए का लाभ अर्जित कर लेते हैं।

खीरे की खेती में होती है जैविक खादों का इस्तेमाल

लोगों ने लगातार रसायनों का इस्तेमाल करके खेतों में उगने वाली चीजों को पोषणयुक्त से ज्यादा जहरीला बना दिया है। इसके साथ ही रसायनों के कारण मृदा की उर्वरक शक्ति में भी गिरावट देखने को मिली।

रामनिवास कहते हैं कि वे अपनी खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग ना करके गोबर से निर्मित याने जैविक खाद और जैविक कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं, जो की फसल के लिए और मृदा के लिए बहुत ही श्रेष्ठ होती है। साथ ही खाद्य पदार्थ के पोषक तत्व ज्यों के त्यों बने रहते हैं। इसके साथ ही जैविक खाद रसायनिक खादों की तुलना में काफी सस्ती होती है।

सरकार का किसानों के प्रति फर्ज

रामनिवास का कहना है कि सरकार की तरफ से किसान वर्ग को मदद मिलनी चाहिए जिससे वह आधुनिक खेती के तरीके को सीख कर अपनी खेती की पैदावार को बढ़ाएं और अच्छा खासा मुनाफा कमाए, जिससे देश में भी अन्न रूपी धन संचित रहेगा और किसानों को भी अपनी आय को खेती-बाड़ी के माध्यम से बढ़ाने का मौका मिलेगा।

आगे वे बताते हैं कि जब उन्होंने 5 वर्ष पहले इस आधुनिक खेती को अपनाने का सोचा था, तब उनके पास लागत के लिए भी पैसा नहीं था। बहुत ही मुश्किलों और मेहनत से उन्होंने पॉलीहाउस के लिए 2000000 RS जमा किए और अपना कारोबार प्रारंभ किया उस समय यदि रामनिवास को सरकार की तरफ से मदद मिल जाती, तो वह इस सफलता को और जल्द प्राप्त कर लेते।

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