बिहार के यह पति-पत्नी गाय के गोबर से सुन्दर मूर्तियां बना रहे, अब तक कई लोगों को रोजगार दिया

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Cow Dung Idols
Husband wife duo of Bihar making attractive Ganesha idols from cow-dung and given employment to dozens people.

Muzaffarpur: इको फ्रेंडली सामान बनाना आज की जरूरत हो चुकी है। क्‍योंकि हम देख रहे है आज कल बाजार में केमिकल से बने सामान काफी ज्‍यादा बिकते है। जिसके कारण कई तरह की बीमारियॉं उत्‍पन्‍न होती है। इनवायरमेंट को भी इन केमिकल युक्‍त हानिकारक पदार्थ से बने सामान के कारण नुकसान होता है।

ऐसे में वह सामान जो पूरी तरह से देशी तकनीक से बने हो इसकी बहुत ही अधिक आवश्‍यकता हो गई है। जिसे बिहार राज्‍य का एक जोड़ा कुछ ऐसा काम करके पूरा कर रहा है। जिससे हर किसी को प्रेरणा मिल रही है। यह जोड़ा गाय का गोबर इस्‍तेमाल करके बहुत से इको फ्रेंडली सामान बना रहे है।

यह पति पत्‍नी जोड़ा गाय के गोबर (Cow Dung) से कई आकर्षक मूर्तिया निर्मित करते है। ऐसा करके यह सिर्फ अपने लिये ही रोजगार नहीं बढ़ा रहे, बल्‍कि यह जोड़ा ऐसा काम करके कई दर्जनों लोगों को रोजगार तक मुहैया करा रहे है। आखिर कौन है बिहार का यह जोड़ा आइये जानते है।

पति पत्‍नी जोड़े ने गाय के गोबर से शुरू किया बिजनेस

हम जिस पति-पत्‍नी जोडी की बात करने वाले है, वह बिहार राज्‍य के मुजफ्फरपुर से ताल्‍लुक रखते है। इस जोड़े में पति का नाम डॉक्‍टर शंकर रमन (Dr Shankar Raman) है। वही पत्‍नी का नाम डॉ साधना (Dr Sadhana) है। इस जोड़े ने एक अनोखी पहल शुरू करते हुये ऐसा बिजनेस बना दिया कि कई बेरोजगारो को इससे रोजगार भी मिलने लगा।

इस दंपती जोडे (Husband wife duo) ने गाय से मिलने वाले गोबर से कई आकर्षक मूर्तिया तथा अगरबत्‍ती बनाने का काम किया। जिसकी बाजार में आज डिमांड काफी ज्‍यादा हो रही है। इस बिजनेस की खासियत यह है कि वह लोग जो कल तक बेरोजगार थे।

आज इस स्थिति में हो गये है कि कई दर्जनो लोगो को रोजगार देने लगे है। इस पति पत्‍नी जोड़े का उद्देश्‍य सिर्फ अपना फायदा करना नही है, बल्‍कि यह जोड़ा चाहता है कि किसानो की आय दोगुनी हो और उन्‍हें मवेशाी पालने की सही कीमत भी मिल सके।

कई आकर्षक मूर्तियॉ तथा गमलो को करते है निर्मित

बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में बाढ़ काफी ज्‍यादा प्रभावित करती है। इसी इलाके से डॉक्‍टर शंकर रमन तथा उनकी वाइफ डॉ साधना ताल्‍लुक रखती है। जोड़े में से पत्‍नी कृषि यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी है। इन दोनों जोड़े ने मिलकर गोबर से गणेश जी (Ganesha) तथा लक्ष्‍मी जी (Laxmi Ji) की कई आकर्षक मूर्ति (Statue) तैयार की है।

इसके अलावा भी इस जोड़े ने कई सामान तैयार किये है। इन सामानो की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सब इको फ्रेंडली है। जब यह टूट जाएंगे, इन्हे दोबारा जोड़ दिया जाता है।

कई बेरोजगारो को पति पत्‍नी जोड़ा दे रहा रोजगार

इसे जोड़े द्वारा जो सामान बनाया जा रहा है, उसमे आपको बता दे कि गाय के गोबर का 75 प्रतिशत तक इस्‍तेमाल किया जा रहा है। गाय के गोबर से मूर्तियां, बहुत से गमले, शुभ लाभ इत्‍यादि बहुत सी चीजें यह जोड़ा बनाता है।

उनका यह प्रयास काफी अनोखा है, जिसे देखकर आसपास के सभी लोग काफी आकर्षित हो रहे है। आकर्षित होकर लोग उनके पास काम करने भी आ रहे है जिससे उनको एक प्रकार से रोजगार मिल रहा है। दिवाली के आते ही दिये, मूर्तिया (Cow Dung Idols) इत्‍यादि सामान की बाजार में डिमांड बढ़ने लग जाती है। ऐसे ही मध्य प्रदेश में भी आर्टिसन कांटा यादव (Kanta Yadav) ने गोबर से गणेश जी की प्रतिमा बनाई है।

यह बात हम बहुत अच्छे से जानते है। चूँकि गोबर काफी सस्‍ता रॉ मटेरियल है ऐसे में यह सामान जो इससे निर्मित होते है, वह लोगों को बहुत ही कम कीमत में मिल जाते है। इस कार्य से सिर्फ इस जोड़े को ही नहीं किसानो को भी बहुत फायदा होगा।

किसानो को इस बिजनेस से होगा कई गुना फायदा

डॉ शंकर जी कहते है कि किसान मवेशी पालते है उनकी देखभाल करते है। गोबर की बात करे तो इसका कुछ ज्‍यादा उपयोग नही होता है। लेकिन जब इसका प्रयोग वह मूर्ति जैसी चीजें बनाने मे करने लगेंगे तो उन्‍हें काफी फायदा होगा।

वह कहते है कि बिहार के बहुत से लोग रोजगार के लिये अक्‍सर दूसरे राज्‍य में जाते है। पर जब यह कार्य करने से उनको आमदानी अच्‍छी मिलेगी, तो वह बाहर जाना कम कर देंगे और इसे भी एक रोजगार की तरह देखकर इसे करना पसंद करेंगे।

डॉ शंकर जी की जो पत्‍नी है, वह कॉलेज में प्रोफेसर है। पर फिर भी वह अपने पति की इस पहल में साथ देती है। यह काम इतना अच्छा और सस्‍ता है कि कोई भी किसान या बेरोजगार इसे करके कई गुना फायदा कमा सकता है।

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