
Bhilwara: बारिश आते ही धरती का नजारा कुछ अलग ही देखने को मिलता है। चारो ओर हरियाली सी छायी हुई होती हैं। जिससे हमारा मन कुछ ऐसे स्थानों में घूमने का करता है, जहा का नजारा कुछ अलग हो हरियाली से परिपूर्ण हो। हमारे भारत मे ऐसे कई स्थान है।
जहा हम बारिश के मौसम मे घूमने का आनंद ले सकते हैं। उनमे से एक नाम राजस्थान (Rajasthan) राज्य का आता है। जहा बारिश मानसून आते ही वहा के वातावरण मे एक अद्भुत परिवर्तन आता है। जिससे आकर्षित होकर कई लोग यहा घूमने आते हैं।
राजस्थान में हुई इस वर्ष सबसे अधिक बारिश
वर्तमान में बारिश का मौसम चल रहा है। हम अगर 2022 के मानसून की बात करे, तो इस समय राजस्थान की धरती पर यह मानसून बहुत अच्छा नज़र आ रहा है। आपको तो पता ही है की अभी 2022 की मानसून खत्म होने मे 20, 25 दिन बाकी है। लेकिन इस वर्ष के पुरी बारिश के औसत की बात करे तो सबसे अधिक बारिश राजस्थान मे ही हुई है।
हम सभी ने यही सुना है कि राजस्थान एक सूखा राज्य है, लेकिन आपको राजस्थान राज्य की रेगिस्तान वाली तस्वीर बदलना चाहिए। एक बार मानसून के मौसम मे राजस्थान के कुछ छिपे हुए पर्यटन स्थल मे जाकर देखिए। यहां जब आप एक बार चले जाएंगे तो हमारा मानना है कि राजस्थान की सूखी धरती को लेकर जो आपकी सोच है वह बदल जाएगी।
राजस्थान में भी हैं खुबसूरत वाटरफॉल
आपको बता दें कि राजस्थान मे बारिश आते ही बहुत से जगहो पर कल कल करती हुई खुबसुरत नदीयाँ, चारो ओर हरियाली, कई बेहतरीन झरने और अरावलि की पहाड़ीयो पर खुबसुरत सी काली घटाए देखने को मिलती है। इस पोस्ट के जरिए आज हम आपके लिए राजस्थान के एक ऐसे खूबसूरत झरने के बारे मे जानकारी लेकर आये हैं, जो शानदार है।
आज हम बात कर रहे है, भीमलत वाटरफॉल की जो कि राजस्थान के बुंदी इलाके मे मौजूद है। यह वाटरफॉल घने जंगल की शानदार और अद्भुत जगहो पर स्तिथ है। आइए आज हम आपको भीमलत वाटरफॉल की ख़ूबसूरत यात्रा पर लेकर चलते हैं।
भीमलत वाटर फाल की यात्रा
आपको बता दें कि 2022 की गर्मियो के समय ही हमे इस झरने के बारे मे जानकारी मिली थीं। उसी समय से हमने निश्चय किया था कि इस राज्य को हमारी मानसून ट्रिप मे हम शामिल करेंगे। हम आज बात कर रहे है जिला बुंदी की जो कि राजस्थान राज्य के अन्तर्गत आता है।
बारिश के मौसम मे वहा के वातावरण की खुबसुरती देखने लायक रहती हैं। जब हम भीमलत वाटर फाल देखने गए तो बुन्दी जिले मे पहुचकर हमे ऐसा नहीं लग रहा था कि हम राजस्थान मे मौजूद है। वहां का नजारा कुछ अलग ही अद्भुत था।
वही से कुछ दूर चलने पर बूंदी चित्तौड़गढ़ स्टेट हाइवे पर हमे एक बोर्ड भीलवाडा बार्डर के पास दिखाई दिया। जहा झरने का रास्ता और भीमलत महादेव मंदिर की ओर रास्ता दिखाई दे रहा था। जब हमने गूगल पर सर्च किया तो उस पर भी हमें यही रास्ता दिखा।
जब हम वहा पहुँचें तो वहा से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर भीमलत वाटरफॉल की ओर जाने का रास्ता दिखा। वह रास्ता भी कच्चा था। परन्तु हमनें और आगे जानें का विचार किया और उस स्थान पर बहुत आराम से पहुंच गए। हमने देखा कि आगे अंडरपास ब्रिज बहुत ज्यादा खराब है और आगे एक रेलवे लाइन भी है। इसलिए हमारी कार वहा तक नहीं जा पा रहीं थी। तो अपनी कार हमने वही पार्क कर दी।
यहां के अन्य झरने भी है काफ़ी खुबसूरत
उसके बाद वहा से रेलवे की पटरी पार करके थोड़ी दूर पैदल चल कर हम गए। तो हमें कुछ आवाज़ सी सुनाई दी और वह आवाज बहते हुए पानी की तरह लग रहीं थी। जिसको देखने के लिए हमारा मन और उत्साहित हो गया।
जब हम वहा पहुंचे तो इस झरने की खूबसूरती की पहली झलक हमें देखने को मिली और यह सब उससे कहीं ज्यादा मजेदार था जितना कि हमने सोचा था। इस स्थान पर कुछ दुकानें भी लगी थी। जहा हम लोग नाश्ता या कुछ और खा पी सकते है। यहा रेलिंग आदि की व्यवस्था प्रशासन ने अच्छी तरह से की हैं।
भीमलत वाटर फाल की अन्य विशेषता
आपको बता दें कि उस झरना से नीचे की ओर जब हम 100 सीढ़ियां उतरे तो हम भीमलत महादेव स्थान पर पहुंच गए। कहा जाता है कि भीमलत महादेव मंदिर बहुत ही पुराना है और महाभारत काल में पांडवों से इस पुराने मंदिर का संबंध है। इसलिए इस मंदिर का भीमलत पड़ा। यहां पहुंचने के बाद हमने जो भीमलत झरने का खूबसरत नजारा देखा।
उसकी जितनी भी तारीफ करे वह कम ही होगी। इसे देखकर हमारे मन मे यही विचार आ रहा था कि जो हमने उतराखण्ड ओर हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के खूबसूरत वाटरफॉल देखे है। यह उनसे भी कही ज्यादा खूबसरत है। फिर भी यह स्थान पर्यटकों की नजरो में अभी तक छिपा है।
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— RajasthanBlog (@RajasthanBlog) July 29, 2019
बता दें कि इस झरने में चारों ओर से घिरा हुआ हरियाली का घना जंगल और 60 से 70 फिट की ऊंचाई से गिरता पानी दूध जैसे प्रतीत होता है। इसकी दूसरी तरफ एक नदी भी हैं। आप यहां नदी के बहते हुए पानी के खूबसूरत नजारे में भी अपना वक्त बिता सकते हैं। बस आपको यह सावधानी बरतने के लिए जागरूक करेंगे की इस स्थान पर जंगली जानवर जैसे बंदर या सांप आदि बहुत अधिक पाए जाते हैं। जिनसे आपको थोड़ा सावधान रहना होगा।
भीमलत वाटर फाल पहुचने के मार्ग
1 सड़क मार्ग द्वारा
अगर आप इस स्थान पर सड़क के रास्ते से होकर जाना चाहते हैं। पहले आप कोटा या बूंदी शहर जा सकते हैं। क्योंकि यह मार्ग देश के अन्य मुख्य मार्गो से जैसे रेल्वे और सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़े हुए है।
📍Bhimlat Waterfall, Bundi
You will find the most charismatic waterfalls near Bundi and Chittorgarh that are enough to lure you and make your holiday enticing and adventurous. One of them is the Bhimlat Waterfall in Bundi.#bhimlatwaterfall #waterfalls #bundi #rajasthantourism pic.twitter.com/uoCX9hGWhh— Rajasthan Tourism (@my_rajasthan) August 26, 2022
इसके बाद आप टैक्सी की मदद से भीमलत महादेव से झरने तक आसानी से पहुंच सकते हैं। आपको बता दे कि यह स्थान कोटा शहर से 70 किलोमीटर की दूरी पर तथा शहर से 35 किलोमीटर की दूरी पर हैं।
2 हवाई मार्ग द्वारा
अगर आप भीमलत वाटरफॉल (Bhimlat Waterfall) जाना चाहते हैं। पर आप सोचेंगे कि इस स्थान पर कैसे जाए, तो आपको बता दें इनके नजदीक में उदयपुर और जयपुर के अड्डे है। वहा जाकर आसानी से आप भीमलत वाटर फाल पहुंच सकते हैं। फिर वहा से कैब या टैक्सी के माध्यम से भीमलत वाटरफॉल तक जा सकते है। इसके अलावा भी एक साधन बस का है। आप बूंदी शहर तक बस से भी जा सकते है।
3 रेल मार्ग द्वारा
आप अगर ट्रेन से भीमलत महादेव मंदिर और झरने (Bhimlat Mahadev Temple and Waterfall) तक जाना चाहते है, तो आपको यहां पहुंचने के लिए बूंदी शहर का रेल्वे स्टेशन या फिर कोटा रेल्वे स्टेशन ज्यादा पास पड़ेंगे।
Nature at its best ❤️❤️❤️
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— MSR 🇮🇳 (@msr047) August 4, 2021
यहा पहुंच कर आप आसानी से इस जगह पर जा सकते है। यह दोनों शहरों के रेल्वे स्टेशन के मार्ग भारत के प्रमुख मार्गो से जुड़े हुए हैं। उसके बाद आप अपनी भीमलत वाटरफॉल की यात्रा को किसी कैब या टैक्सी से संपन्न कर सकते हैं।



