इस शहर में पैडल रिक्शा चलाने वाला शख्स कैब कंपनी का CEO बन गया, इस आईडिया से सफलता पाई

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Dilkhush Kumar
Meet Dilkhush Kumar Paddle Rickshaw Driver Founder And CEO Of Rodbez Arya Go Cab Company. His Success Story In Hindi.

Photo Credits: Linkedin

Patna: कहते हैं किसी भी शख्स की किस्मत बदलते वक्त नहीं लगता। जीवन ने दो पहलू आते है। एक सुख से भरा दूसरा संघरसमई जीवन दोनों का ही जीवन में अपना अलग मजा है। यदि व्यक्ति एक सा जीवन जिएगा तो बहुत जल्द बोर हो जाएगा। इसीलिए जीवन में थोड़ा संघर्ष जरूरी है।

संघर्ष की आग में ही तप कर व्यक्ति मूल्यवान बनता है। जरूरी नहीं होता कि हर व्यक्ति के जीवन में सब कुछ अच्छा ही हो कुछ व्यक्ति बहुत ही संघर्षों के बाद जीवन के उस मुकाम पर पहुंचते हैं, जहां वे जाना चाहते हैं और कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं, जो कुछ नही भी करते, तो उनके पास सब कुछ होता है।

आज हम एक ऐसे ही व्यक्ति की बात करेंगे, जिसने अपने जीवन में बहुत ही संघर्ष भरा जीवन बिताया है, दिल्ली की सड़कों पर पेडल रिक्शा (Paddle Rickshaw) चलाकर आज उसने अपनी ही दो कंपनियां बना ली। जब इस व्यक्ति का सही समय नहीं था।

तब इस व्यक्ति ने बहुत ही संघर्ष किया, यहां तक की एक चपरासी का इंटरव्यू दिया। जिसमें वह फेल हो गया, उसके बाद भी उसने हार नहीं मानी और दिल्ली आ गया दिल्ली में कैब ड्राइवर की नौकरी करने की कोशिश की। परंतु यहां भी उसके लक ने साथ नहीं दिया फिर पेडल रिक्शा चला कर उसने अपने काम की नींव रखी आइए जानते हैं कौन है वह शख्स।

बिहार से आए दिलखुश की सफलता की कहानी

बिहार (Bihar) राज्य के रहने वाले दिलखुश कुमार (Dilkhush Kumar) काफी प्रयासों के बाद भी असफल रहे, परंतु आज भी दो कंपनियों के मालिक हैं। AryaGo, RodBez यह दो कंपनियां है, जिसके वे फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर है। Aryago कंपनी की शुरुआत में जीरो से की थी। आज यह कंपनी 11.6 करोड़ का टर्नओवर करती है। साथ ही इस कंपनी के माध्यम से 500 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ।

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इसके बाद उन्होंने रोडवेज नाम की एक नई कंपनी की शुरुआत की इस कंपनी का उद्देश्य बिहार राज्य में सस्ते कैब सुविधा उपलब्ध कराना था इस कंपनी ने भी 4 महीनों में 4000 कारों का नेटवर्क बनाकर एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की।

एक वक्त ऐसा था, जब दिलखुश को केवल नाकामियों ही हासिल हो रही थी, दिलकुश के पिता बिहार में बस चालक थे और वे नहीं चाहते थे कि उनका बेटा एक चालक बने परंतु दिलखुश है अपने पिता से जिद करके ड्राइविंग सीखी।

पटना में चपरासी के इंटरव्यू के दौरान भी फेल हो गए। उसके बाद दिल्ली आए और यहां पर उन्होंने ड्राइविंग की नौकरी के लिए कार मालिक से कार की डिमांड की परंतु कार मालिक ने उन्हें साफ इनकार कर दिया और कहते हैं कि एक कम पढ़े लिखे लोगों के हाथ में दिल्ली की सड़कों पर कार चलाने देना किसी मुसीबत से कम नहीं होगा।

पेडल रिक्शा चलाने पर कुछ ही समय बाद दिलखुश की हुई तबीयत खराब

दिलसुख के पिता एक साधारण से बस चालक थे, उन्हें महीने भर में केबल 32 सो रुपए तनख्वा के रूप में मिलती थी उन पैसों से उन्हें पूरा घर चलाना होता था और दिलखुश को पढ़ाना भी होता था, इतने कम पैसों से दिलखुश की पढ़ाई बिल्कुल भी अच्छी नहीं हुई।

उन्होंने जैसे तैसे अपनी पढ़ाई कंप्लीट की जिसमें उन्होंने कक्षा 10 में तृतीय श्रेणी प्राप्त की और कक्षा 12वीं में द्वितीय श्रेणी। पढ़ाई लिखाई ठीक से ना होने की वजह से वे बड़े शहर में हर जगह मुकी खा रहे थे। ड्राइवर की नौकरी में ट्रैफिक नियमों की बात कह कर के मालिक ने उन्हें मना कर दिया था।

इसके बाद उन्होंने सोचा कि साइकिल से दिल्ली की सड़कों पर घूमेंगे और यहां के नियमों को सीखेंगे परंतु जब उन्होंने अपने रिश्तेदारों से साइकिल मांगी तो उन्होंने मना कर दिया, क्योंकि वे स्वयं साइकिलों से दफ्तर जाया करते थे फिर उन्होंने निर्णय लिया कि वे पेडल रिक्शा चलाएंगे।

18 वर्ष की उम्र में दिलखुश ने अपने दुबले पतले शरीर के साथ रिक्शा चलाना शुरु किया। वह अपने रिक्शे में उन्हीं लोगों को बैठाते थे, जो दुबले पतले और एक ही सवारी हो, क्योंकि वे ज्यादा वजन को खीच नहीं पाते थे।

पेडल रिक्शा चलाने के कुछ ही समय बाद दिलखुश की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई, जिसकी वजह से उनके रिश्तेदारों ने और उनके परिवार वालों ने उन्हें घर वापस लौटने की बात कही वह घर लौटे, परंतु काफी समय तक उनका जीवन काफी अस्त-व्यस्त चला। 18 वर्ष का दिल खुश आज 29 वर्ष की उम्र में दो कंपनियों का मालिक बन चुका है।

18 वर्ष की उम्र में घरवालों ने करा दी शादी, तब एहसास हुआ कि इज्जत पैसों से मिलती है

गांव के लोगों ने दिलखुश के परिवार से कहा कि यदि कुछ कर नहीं रहा तो उसका ब्याह करा दो अपने आप लाइन पर आ जाएगा। इसीलिए दिलखुश की शादी 18 वर्ष की उम्र में खुशबू कुमारी से करा दी गई।

खुशबू कुमारी (Khushboo Kumari) ने अपने पति याने दिलखुश का हर कदम पर साथ दिया। उनके एंटरप्रेन्योर तक के सफर को उन्होंने ही आसान बनाया। चपरासी की नौकरी से रिजेक्शन के बाद दिल्ली में कैब ड्राइवर से भी रिजेक्ट हुए और आज वे दो कंपनियों के मालिक बन गए हैं।

दिलखुश का कहना है कि यदि व्यक्ति के पास पैसे हैं तो समाज में और दुनिया में उसकी इज्जत है, वरना बिल्कुल भी नहीं होती। दिलखुश बताते हैं कि एक समय ऐसा था कि जब वह स्कूल जाते थे। तब उनकी माता ने 550 Rs का कर्ज लिया था। उन पैसों से उन्होंने 1 सेकंड हैंड साइकिल उठाई थी जिससे उनका बेटा स्कूल जाकर अच्छी तरह पढ़ लिख सके।

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दिलकुश की पहली सफलता थी, जब वे पटना में मारुति 800 कार को चला कर पैसे कमाते थे, इसके बाद उन्होंने लगातार सफलताएं हासिल की वे बताते हैं कि उनकी सफलता का एक ही कारण है कि उन्होंने लगातार मेहनत की यदि वे किसी नौकरी से 4000 से 5000 Rs कमाते हैं, तो उन्होंने उस काम के दायरे को बढ़ाने की कोशिश की जिससे वे 4 से 5000 के बाद 80000 से 10000 Rs कमा सकें, यही उनकी सफलता का बहुत बड़ा कारण है।

इलेक्ट्रिकल एंड फायर का काम करके एमआई में एक कार खरीदी

दिलखुश के दिन बदले कैब ड्राइवर (Cab Driver) से उन्हें एक रियल स्टेट कंपनी के साथ इलेक्ट्रिकल एंड फायर वर्क का काम करने का मौका मिला जिससे उन्होंने एक कार खरीदी चाहते थे कि उनके पिता एक बस चालक नहीं बल्कि खुद की गाड़ी के मालिक बने।

जब कार की ईएमआई चुकाने का वक्त आया, तो उन्हें काफी परेशानियां आई इन परेशानियों से ही उन्हें एक नए व्यापार का आइडिया आया। उन्होंने सोचा कि ऐसे बहुत से लोग होंगे जिन्हें ईएमआई चुकाने में परेशानियां आती होंगी।

इसके बाद उन्होंने ओला और उबर की तरह Arya go की नींव रखी। इस कंपनी का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में कैब सुविधा को देना था। जानकारी मिल रही है कि दिलखुश ने इस कंपनी से अलग होकर RodBez नाम से एक नई कंपनी की शुरुआत वर्ष 2021 में की।

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