वह वकील, जिसने देश के लिए अंग्रेजों का सामना किया और गोदरेज कंपनी खड़ी कर देशी ब्रांड बनाया

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Ardeshir Godrej
How An Advocate Ardeshir Godrej started Godrej Company which is Made In India. Inspiring Success Story of Godrej in Hindi.

Mumbai: जिस तरह बॉलीबुड में अमिताब बच्‍चन तथा क्रिकेट के क्षेत्र में सचिन तेंदूलकर का नाम लिया जाता है। उसी तरह भारत के हर घर में गोदरेज (Godrej) का नाम लिया जाता है। आलमारी हो या फिर ताले गोदरेज के नाम लिये बिना इनकी पहचान अधूरी होती है। लेकिन किस तरह गोदरेज का नाम इतना बड़ा हुआ।

शायद आपने यह कहानी अब तक नहीं जानी होगी। लेकिन आज इस पोस्‍ट से गोदरेज से संबंधित सभी महत्‍वपूर्ण सवालो और इतिहास को आप जान पाएंगे। आइये जानते है गोदरेज कि शुरूआत से लेकर इतने लंबे सफर कि कहानी।

एक एडवोकेट, जो थे गांधी जी के सिद्धांत के कायल

गोदरेज कि कहानी (Godrej Company Story) एक एडवोकेट से शुरू होती है। जिनके सारे उसूल, सारे सिद्धांत गांधी जी (मोहनदास करमचंद गांधी) के समान थे। हम जानते है वकालत एक ऐसा पेशा है, जिसमे पग पग पर झूठ का स्‍थान होता है। शायद इसलिए ही वकील जिनका नाम आर्देशिर गोदरेज (Ardeshir Godrej) था।

उन्‍होंने बहुत ही कम समय ही वकालत कि और इससे फासला कर लिया। क्‍योंकि इस प्रोफेशन से उनके सच्‍चाई के सिद्धांत पर ऑंच आ रही थी। वकालत छोड़कर वह ईस्‍ट अफ्रीका (East Africa) से वापस आ गये और इंडिया में ही अपने नये जीवन को संवारा।

ब्‍लैड के बिजनेस के लिये 3000 लिया कर्ज

जिस तरह हम देखते है कि पारसी लोग बिजनेस में अव्‍वल होते है। उसी तरह आर्देशिर गोदरेज ने भी बिजनेस (Business) में ही अपना करियर बनाना सही समझा। बिजनेस शुरू करने से पहले वह एक फार्मा कंपनी में जॉब करते थे।

केमिस्‍ट के तौर पर काम करना उन्‍हे ज्‍यादा दिन रास रही आया। फिर वह मौका देखकर कैंची, ब्‍लैड इत्‍यादि का बिजनेस करने लगे। इसके लिये उन्‍होंने मेरवानजी मुचेरजी कामा नाम के एक प्रतिष्ठित व्‍यक्‍ति से 3000 का कर्जा लिया। लेकिन उनका यह नया बिजनेस ज्‍यादा नही चला।

अपने प्रोडक्‍ट पर लिखवाना चाहते थे मेड इन इंडिया

वह इस बिजनेस में फेल हो गये। लेकिन उनके फेल होने का सबसे महत्‍वपूर्ण कारण यह था कि आर्देशियर गोदरेज चाहते थे कि वह जो औजार बना रहे है। उस पर मेड इन इंडिया (Made In India) लिखा हो। लेकिन ब्रिटिश सरकार उस समय यह नहीं चाहती थी।

उनके मना करने पर उन्‍होंने यह बिजनेस ही बंद कर दिया। लेकिन कहते है ना कि अगर नीयत साफ हो और कुछ करने कि मन में लगन हो तो कही ना कही से नया रास्‍ता अवश्‍य ही निकल आता है। यही हुआ आर्देशिर गोदरेज के साथ में।

अखबार पढ़कर मिला नया बिजनेस आइडिया

एक दिन जब वह अखबर पढ़ रहे थे, तब उन्‍होंने एक खबर देखी। जिसमें लिखा था आजकल बंबई शहर में चोरी जेसी घटना बहुत ही ज्‍यादा बढ़ गई है। ऐसे में लोग अपने घर के कीमती सामान कि सुरक्षा पहले से और भी अच्‍छे से करे। इसे देखकर आर्देशियर ने एक अवसर ढूँढा। उन्‍होंने ताला बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया। हालांकि वह पहले बिजनेस के लिये कर्जे के पैसे को चुका नही पाये थे।

ऐसे में उन्‍हें मेरवानजी के पास से और पैसा मिलेगा या नहीं उन्‍हें नही पता था। लेकिन जब वह अपना आइडिया मेरवानजी के सामने शेयर किये। तो मेरवानजी कामा उनसे बहुत ही प्रभावित हो गये ओर उन्‍होंने पुराने कर्जे कि चिंता किये बगैर उन्‍हे कर्जा दे दिया।

बंबई में डाला ताले का गोदाम

कर्जा मिलते ही आर्देशिर गोदरेज ने बॉम्‍बे गैस वर्क्‍स के पास मे ही 215 वर्गफुट का अपना एक गोदाम डाल दिया। जहॉ वह पर ताला बनाने लगे। यही से गोदरेज कंपनी कि शुरूआत हो गई। उस समय में तालों कि कोई गारंटी नही होती थी। लेकिन अर्देशियर गोदरेज ने ऐसे ताले बनाये। जिसकी चाबी किसी दूसरे ताले में लगती ही नही थी। ऐसे में वह पहले ऐसे व्‍यक्‍ति बने, जो ताले कि गारंटी दे पाते थे।

ताले के बाद शुरू किया आलमारी का बिजनेस

उनका ताले का बिजनेस देखते ही देखते चल पड़ा। इसी चोरी कि समस्‍या को देखते हुये आर्देशिर गोदरेज ने अपने दूसरे बिजनेस को भी शुरू किया। पहले हर किसी के घर मे लॉकर कि सुविधा नही होती थी। जिसमें वह अपने कीमती सामान रख पाते।

ऐसे में आर्देशिर गादरेज ने आलमारी का बिजनेस करने कि प्‍लानिंग कि। विभिन्‍न कारीगर और इंजीनियर से कॉन्‍टेक्‍ट करने के बाद आर्देशियर गोदरेज ने डिसाइड किया कि वह इस प्रकार कि आलमारी बनाएंगे। जिसमें लोहे कि चादर को ना काटना पड़े।

1902 में पहली बार गोदरेज कि आलमारी मार्केट में आई। जब इसे बाजार में लाया गया तब किसी को नहीं पता था कि इसके आते ही क्रांति आ जायेगी। जी हॉं गोदरेज आलमारी ने लोगों का मन इतना जीता कि हर किसी का इसपर भरोसा बढ़ गया।

आलमारी के बाद कई ब्रांड में आजमाया हाथ

आलमारी ओर ताले के बिजनेस में कामयाबी मिलने के बाद गोदरेज ने विभिन्‍न ब्रांड में भी कदम रखा। 1918 में गोदरेज का पहला वनस्‍पति तेल साबुन मार्केट में आया। उसके बाद 1923 में फर्नीचर, 1951 में बैलेट बॉक्‍स, 1952 में सिथॉल साबुन, 1958 में रेफ्रिजरेटर, 1990 में हेयर कलर, 1994 में गुड नाइट ब्रॉड वाली कंपनी को खरीदा।

वही 2008 में उन्‍होंने चंद्रयान-1 के लिये ल्‍यूनर आर्बिटर को भी बनाया। एक समय सर्जरी ब्‍लेड के बिजनेस में फेल होने वाले आर्देशियर गोदरेज कि कंपनी आज करीब 20 प्रकार के बिजनेस कर रही है। इनका बिजनेस लगभग 50 देशों मे है। इसके मार्केट कैपिटल कि बात करें तो वह लगभग 120000 करोड् रूपये है।

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