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Delhi: भारतीय रिजर्व बैंक या आरबीआई (RBI) भारत का केंद्रीय बैंक है। यह भारत के सभी बैंकों को चलाता है। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस बैंक की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को इंडियन एक्ट के तहत की गई थी।
अक्सर हम सुनते हैं कि भारत के जितने भी सहायक बैंक हैं, सभी को भारतीय रिजर्व बैंक ने संभाल रखा है या यूं कह सकते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक ही भारत के सभी बैंकों को रुपया मुहैया कराता है। आप को याद होगा कि आरबीआई ने 31 मार्च 2021 को सरकारी खाते में 99122 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। जो 9 महीने की लेखा अवधि के समाप्ति पर सरप्लस के तौर पर किया था।
हमेशा जरूरत पड़ने पर भारतीय रिजर्व बैंक (RESERVE BANK OF INDIA) सरकार को अपने खजाने से पैसे देकर मदद मुहैया कराती है। परंतु कभी आपने सोचा है की आरबीआई को पैसा देता कौन है। बता दे आरबीआई देश विदेश में कई गतिविधियां करती है, जिससे उन्हें फंड मिलता है, वही फंड उन के खजाने में इकट्ठा होता है, आइए आगे और विस्तार से जाने।
आरबीआई के आय के रास्ते
अब आपके मन में आ रहा होगा कि ऐसे कौन सी एक्टिविटीज है, जो आरबीआई करती है, तो आपको बता दें पीडीओ यानी पब्लिक डेट ऑफिस के माध्यम से पीडीओ में सरकारी डेट मतलब कर्ज को प्रबंधित करना।
सरकार द्वारा ट्रेजरी बिल्स, बॉन्ड आदि इश्यू कराती है, उसमें कमीशन के तौर पर आरबीआई के खजाने में पैसे जाते हैं। इसके साथ ही ओपन मार्केट ऑपरेशन RBI के खजाने को भरने का एक बहुत बड़ा रास्ता है।

ओपन मार्केट ऑपरेशंस एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें केंद्रीय बैंक, अर्थव्यवस्था में मनी सप्लाई को रेगुलेट कर खुले बाजार में बॉन्ड बाय और सेल करता है। इन बॉन्ड्स से मिलने वाले ब्याज के अलावा, आरबीआई को बॉन्ड की कीमतों में बदलाव करने का भी हक होता है।
विदेशी मुद्रा भी आरबीआई के लिए एक फायदे का सौदा है
विदेशी मुद्रा भी आरबीआई के लिए एक फायदे का सौदा है, वह कैसे आइए जानते हैं। उदाहरणार्थ आरबीआई विदेशी मुद्रा यानी डॉलर को सस्ते दामों में खरीदकर भविष्य में उसे महंगे दाम में भेज सकता है।
इस बात को ध्यान रखना चाहिए कि वाणिज्यिक बैंकों का उल्टा आरबीआई का उद्देश्य लोगो तक मदद पहुंचाना है ना कि लाभ अर्जित करना। यह पद्धति लाभ हानि की नीति की संरचना को नियमित रूप से चलाना ही इसका एक प्रभाव है। ऐसे ही कई आरबीआई के खजाने को भरने का माध्यम है।
RBI कब करता है इस्तेमाल?
भारतीय रिजर्व बैंक में उपलब्ध पैसा देश की आपातकाल स्थिति में आर्थिक स्थिति को नियंत्रित करने के लिए होता है केंद्रीय बैंक मैं जमा पैसा जारी की गई करेंसी के बीच एक उचित अनुपात को बनाना बेहद जरूरी होता है। करेंसी के फंक्शन को आरबीआई में जमा पैसा से ताकत मिलती है।

अर्थव्यवस्था में नियंत्रण बना रहता है। कभी देश में आपातकालीन स्थिति जैसे महामारी या फिर प्राकृतिक आपदाएं के समय देश की जनता को सरकार पर भरोसा होता हैऔर सरकार को केंद्रीय बैंक के खजाने पर।
रिजर्व बैंक देश की आपातकालीन स्थितियों को संभालने के लिए ही बनाया गया है। आपके सामने एक उदाहरण पेश है कि देश में महंगाई में इजाफा या फिर करेंसी के मूल्य में हिरास होने पर आरबीआई इस परिस्थिति को संभालती है।
रिजर्व बैंक अपनी पावर के दम पर देश की महंगाई और करेंसी के मूल्य में हो रहे हैं हीरास को थाम लेती है। मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 से भारतीय करेंसी के मूल्य में लगातार गिरावट आ रही थी, इस परिस्थिति को संभालते हुए रिजर्व बैंक ने 1700 करोड़ डॉलर से देश की करेंसी को संभाला।
2018 में आरबीआई की लिमिट पर उठाया था मुद्दा
वर्ष 2018 में भारतीय रिजर्व बैंक के खजाने को लेकर लोगों के बीच काफी तनावपूर्ण माहौल रहा। बहुत से लोगों का कहना था कि आरबीआई रिजर्व की लिमिट तय होनी चाहिए और सर प्लस फंड का उपयोग होना चाहिए है, परंतु मुद्दे पर रजामंदी ना मिलने पर मुद्दा शांत हुआ और उसका कोई रिजल्ट नहीं रहा।




