वह गरीब लड़का पहले रेलवे में गैंगमैन बना और फिर इस तरह IPS अफ़सर बन गया, मेहनत भरा सफर

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Prahlad Meena IPS Officer
Prahlad Meena Journey Of Indian Railway Gangman To IPS Officer. How Prahlad Meena became Railway group D Gangman To IPS Officer.

Photo Credits: Twitter

Dausa: छोटे छोटे प्रयासों से ही आगे बढ़ा जाता है। एक दम से सफलता कभी प्राप्त नहीं होती। आज की हमारी कहानी एक ऐसे युवक की है, जिसने छोटे प्रयास से ही आगे बढ़ते बढ़ते बड़ी सफलता प्राप्त कर ली।

आज की हमारी कहानी है राज्य राजस्थान (Rajasthan) के दौसा (Dausa) में ग़रीबी में पाले एक ऐसे ऊर्जावान युवक की जिसने अपने जीवन की जॉब की शुरुआत एक गैंगमैन की छोटी नौकरी से की। लेकिन अपनी मेहनत से वह एक एक करके क़दम बढ़ाते गया और अंत मे आख़िरकार उसने हर युवा की तरह सिविल सेवा परीक्षा की चाहत की ओर इसे पास कर राज्य ओडिशा में एक आईपीएस अधिकारी बन गया।

गरीबी में पले युवकों ने गैंगमैन से आईपीएस अधिकारी तक का सफर तय किया

हम जिस ऊर्जावान युवा की बात कर रहे है, उनका नाम प्रहलाद मीणा (Prahlad Meena) है। जोकि राज्य राजस्थान के एक जिले दौसा के बहुत छोटे से गांव जिसका नाम आभानेरी है। वहा के गरीब ग्रामीण किसान के परिवार से सम्बंध रखते है।

प्रहलाद के परिवार के पास सिर्फ दो बीघा जमीन थी। इस छोटी सी जमीन के सहारे उनके घर का खर्चा चला पाना अत्यंत मुश्किल था। ऐसे मे माँ ओर पिताजी घर चलाने के लिए दूसरों के यहा खेतों पर बंटाई करके खेती किया करते थे। जिससे उनका घर जेसे तेसे चल जाता था।

गरीबी की वज़ह से विज्ञान विषय नहीं ले पाए थे 12वी मे

प्रहलाद बताते है कि वह जिस क्षेत्र से आते है वहा के लोगों में शिक्षा जागरूकता का बहुत ही अधिक अभाव है। वह कहते है इसी कारण उनकी भी सोच सीमित हो गई थी। भले ही वह कक्षा में प्रथम आते थे। लेकिन बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना वह कभी नहीं देखते थे।

प्रहलाद ने अपनी बारहवीं तक की स्कूलिंग एक सरकारी स्कूल से ही कम्प्लीट की है। दसवीं की परीक्षा में वह अपने स्कूल पर अव्वल रहे थे। प्रहलाद बताते है जब वह दसवीं मे स्कूल में पहले स्थान पर आए तो लोगों ने उन्हें सलाह दी कि उन्हें साइंस विषय लेकर ही आगे पढ़ाई करनी चाहिए।

प्रहलाद भी चाहते थे कि वह इंजीनियर बने। लेकिन उनका परिवार इस स्थिति मे नहीं था कि वह प्रहलाद को इंजीनियरिंग जेसा महँगा कोर्स करा सके। उन्हें बाहर भेज कर पढा सके उनका सारा खर्चा उठा सके।

प्रहलाद के गांव में कोई भी विज्ञान विषय का स्कूल नहीं था। इसलिए उन्होंने सब भुलाकर फिर से ग्यारहवीं मे एक सरकारी स्कूल में ही दाखिला ले लिया। वहां एडमिशन लेने के बाद प्रहलाद जी ने विज्ञान छोड़ कर मानविकी विषय के साथ मे आगे पढ़ाई की।

12वी के बाद नौकरी की तैयारी में जुटे

बारहवीं में भी प्रहलाद जी अपने दसवीं के परीक्षा परिणाम की तरह कक्षा में प्रथम स्थान पर रहे। बारहवीं कर बाद प्रहलाद जी की प्राथमिकता पूरी तरह बदल गई थी। बारहवीं के बाद अब वह आगे और पढ़ना नहीं ब्लकि वह सबसे पहले एक नौकरी हासिल करना चाहते थे। क्योंकि उनके परिवार की जेसे की हम जान चुके है कि परिस्थिति इतनी अच्छी नहीं थी।

उनके परिवार की आर्थिक स्थिति उन्हें पढ़ाने की बिल्कुल भी नहीं थी। ऐसे मे उनके लिए नोकरी करना बहुत ही जरूरी हो गया था। लेकिन हर माता पिता की तरह प्रहलाद जी के माता पिता ने भी उन्हें हर तकलीफ झेल कर आगे पढ़ाया।

प्रहलाद कहते है कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण उनके माता पिता का उन्हें जयपुर जिले के राजस्थान नामक कॉलेज में दाखिला दिलाना था। क्योंकि जब उनका वहां एडमिशन हुआ, तो उनकी दोस्ती भी अच्छे अच्छे लोगों से हुई। दोस्तों के साथ रहकर ही उनको खुद पर यह विश्वास हो गया था कि वह सिविल सेवा तो नहीं, लेकिन एक अच्छी सरकारी नौकरी जरूर प्राप्त लेंगे।

गांव के लड़के को देख गैंगमैन बनने का लक्ष्य बनाया

प्रहलाद जी एक निम्न वर्गीय परिवार से सम्बंध रखते थे। ऐसे में उनके सपने भी ज्यादा बड़े नहीं थे। जब प्रहलाद बारहवीं कक्षा में थे। उस समय मे उनके गांव के एक लड़के का भारतीय रेल्वे में गैंगमैन (Indian Railway Gangman) की पोस्ट में चयन हुआ।

यह देखकर प्रहलाद ने भी अपना लक्ष्य भारतीय रेलवे ग्रुप डी में गैंगमैन की पोस्ट का बना लिया और उसी की तैयारी में वह लग गए। जब वह बीए द्वितीय वर्ष में थे। तब उनका चयन भारतीय रेलवे में 2008 में भुवनेश्वर बोर्ड से ग्रुप डी में गैंगमैन की पोस्ट पर हो गया।

भले ही प्रहलाद का सिलेक्शन सरकारी नौकरी के लिए हो गया था। लेकिन उसके बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई ना छोड़ उसे जारी रखा। उसी साल उनका चयन एसबीआई में ही सहायक के पद में हुआ। यह नौकरी करते करते ही प्रहलाद जी ने बी. ए. की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई जारी रखते हुए ही उनका 2010 में चयन एसबीआई में ही परीवीक्षाधीन अधिकारी की पोस्ट मे हो गया।

लगातर प्रयास से आईपीएस अधिकारी बने

धीरे धीरे उन्होंने अपना लक्ष्य बढ़ाया और सिविल सर्विसेज (UPSC) की ओर चल पड़े। उनकी मेहनत रंग लाई और वो एक आईपीएस अधिकारी बन गए। आज प्रहलाद मीणा ओडिशा में एक आईपीएस अधिकारी (IPS Officer) है। रेल्वे ग्रुप D से सिविल सर्विसेस (Railway Group D To Civil Service) तक का प्रहलाद का सफर बहुत ही प्रभावी है। उनकी यह कहानि इस बात की पुष्टि करती है कि लगातर मेहनत और प्रयास ही सफ़लता के रास्ते खोलती है।

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