
Delhi: दोस्तों हम सभी बचपन से नोटों का प्रयोग करते आ रहे हैं, किसी भी वस्तु या सुविधा को खरीदने के लिये हम भारतीय करेंसी का इस्तेमाल करते हैं, जिसे INR इंडियन नेशनल रूपीस कहते हैं, आपने जाने अनजाने ध्यान दिया होगा कि हमारे नोटों में विभिन्न प्रकार की चीजें प्रिंटेड होती हैं, जैसे पिक्चर, सीरियल नंबर, भाषाएं एवं नोट्स की साइड में बनी हुई तिरछी लकीरें, परंतु इन तिरछी लकीरों (Slant Lines) का आप अर्थ नही जानते होंगे, आज हम आपको आपके नोट से परिचय करवाने वाले हैं, अंतिम तक ये आर्टिकल जरूर पढ़ें।
ब्रेल लिपि से प्रेरित होती हैं तिरछी लाइन्स
जैसा कि हम सब जानते हैं कि साधारण रूप से नोटों की कीमत उसे लिखे शब्दों और अंको से पता की जाती है, परंतु वहीं ब्लाइंड अर्थात नेत्रहीन व्यक्ति चूंकि देख नही सकता इसके लिये एक सांकेतिक भाषा अर्थात ब्रेल लिपि का अविष्कार किया गया, जिसके जरिये कोई भी ब्लाइंड पर्सन उन संकेतों को टच कर के लिखे गये अर्थ को समझ सकता है।
आप देखेंगे कि आज लगभग हर सार्वजनकि सूचना या लेखों के साथ ब्रेल लिपि भी अंकित होती है, हमारे नोट्स के साइड में भी अलग अलग मात्रा में ये तिरछी लाइन्स नेत्रहीन व्यक्ति (Blind Person) के लिये बनाई जाती है, जिसे ब्लीड मार्क्स भी कहते हैं, जिससे वो इन्हें छू के समझ सकता है कि वो नोट 100, 200, 500 या 2000 कितने कीमत का है।
तिरछी लाइन्स अर्थात ब्लीड लाइन्स के हिसाब से होती है नोट की कीमत
आपको बता दें कि नोटों की साइड में तिरछी लाइन्स अर्थात ब्लीड मार्क्स (Bleed Marks) की संख्या उसकी कीमत के आधार पे अलग अलग होती हैं, जैसे 100 रुपये के नोट पे दोनों तरफ 4-4 रेखाएं होती हैं।

वही 200 रुपये के नोट पे दोनों तरफ 4-4 रेखाओं के साथ 2-2 जीरो हल्की को लाइन्स भी होती हैं। 500 रुपये के नोट की बात करें तो उसमें दोनों तरफ 5-5 रेखाएं एवं 2-2 जीरो एवं 2000 के नोट पे 7-7 रेखाएं अंकित होती हैं।
नोट पे छपी पिक्चर्स एवं भाषाएं
हिंदी और अंग्रेजी के अलावा भारतीय नोट में 15 भाषाओं का इस्तेमाल होता है। जैसे असमी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु और उर्दू में उसकी कीमत लिखी होती है। वहीं अलग अलग नोट्स पे विभिन्न पिक्चर्स भी प्रिंटेड होती हैं जिनका संबंध भारत के ऐतिहासिक स्मारकों और धरोहरों से होता है।
कौन करता है भारतीय नोटों की छपाई/मुद्रण, और कहां की जाती है
दोस्तों नोटों को चार अलग-2 मुद्रणालयों में प्रिंट किया जाता है। इसमें से दो का संचालन सिक्यूरिटी प्रिंटिंग एंड मिंन्टिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसपीएमसीआईएल) के माध्यम से भारत सरकार के पास है, तथा दूसरे दो का संचालन भारतीय रिज़र्व बैंकनोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (बीआरबीएनएमपीएल) के माध्यम से भारतीय रिज़र्व बैंक के पास है।

एसपीएमसीआईएल की मुद्रा प्रेस नासिक (महाराष्ट्र) तथा देवास (मध्य भारत) में स्थित हैं। बीआरबीएनएमपीएल की दो प्रेस मैसूर (दक्षिण भारत) तथा सालबोनी (पूर्वी भारत) में स्थित हैं, नोटों का कागज 100 प्रतिशत रुई अर्थस्ट 4 कॉटन से किया जाता है, जिससे इनकी ड्यूरेबिलिटी अधिक से अधिक हो।



