
Delhi: हर व्यक्ति इस बात को बहुत अच्छे से जनता है की शिक्षा का किसी व्यक्ति के जीवन में क्या महत्व है। दुनिया में जो मजदूर वर्ग है, वो इस बारे बहुत अच्छी तरह समझता है, क्योंकि दुनिया में जो भी मजदूरी कर रहा है, उसने आर्थिक तंगी के कारण या फिर मस्ती में मग्न होकर अपनी शिक्षा का सही समय गवा दिया।
आज मजदूरी करने पर विवश हो गए। इसलिए हर माता पिता चाहते है की उनकी संतान खूब पढ़े लिखे और खूब तरक्की करे। माता पिता सोचते है, जो वे नही कर सके वो उनका बच्चा करे। वे बच्चो में अपना जीवन जीते है। संतान की कामयाबी माता पिता की जीत होती है।
गरीबी एक ऐसी बीमारी है, जिसके चलते लोग अपने जीवन की हर ख्वाहिशों को दबा लेते है। परंतु जरूरी नहीं होता की समय हमेशा एक जैसा हो। मेहनत कर इंसान अपनी कमी को अपनी ताकत बना लेता है और ऐसी सफलता हासिल करता है, जिससे पूरी दुनिया में उसके नाम का बोलबाला होता है। आज की कहानी भी एक ऐसे ही किसान और उसके बेटे की है जिसने अपने बेटे को पढ़ाने के लिए जमीन बेच डाली बदले में उन्हें बेटे की बेहद बड़ी कामयाबी मिली। आइए जानते है विस्तार से।
बिहार के सपूत की सफलता की दास्तान
यह कहानी बिहार (Bihar) राज्य के पूर्वी चंपारण जिले के निवासी डॉ. जियाउल हक की है, जो आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) में पीएचडी के छात्र (PhD Student) है। जियाउल को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (University of Oxford) मे असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए चुना गया है।
आपको जान कर खुशी होगी कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में देश के 3 पीएचडी के छात्रों का सिलेक्शन हुआ है। जिसमे बिहार राज्य के पूर्वी चंपारण जिले के तुरकौलिया प्रखंड के अंतर्गत आने वाला गांव कमलपुर के डॉक्टर जियाउल हक है इनके साथ आईआईटी-दिल्ली में पीएचडी के छात्र डॉ. गौरव अरोडा और डॉ. तनु जैन भी शामिल है। ये विद्यार्थी अधीनस्थ मशीन डिजाइन फोर्स कंट्रोल ऑफ इंडस्ट्रियल में पीएचडी कर रहे हैं।
जियाउल की सफलता ने पूरे देश को खुशी दी
विश्वविख्यात ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद पर डॉक्टर जियाउल हक (Dr Jiya Ul Haque) के चयन से पूरे देश में खुशी का माहोल है। आपको बता दें की जियाउल अपनी शुरुआती पढ़ाई तुरकौलिया मिडिल हाई स्कूल से की है। बिहार के मोतिहारी एलएनडी कॉलेज से इंटर कर उत्तर प्रदेश राज्य की शारदा यूनिवर्सिटी में अपनी बीटेक की पढ़ाई पूरी की।
उन्होंने फोन के माध्यम से सभी को जानकारी दी की उनके पिता का पेशा किसान का है और जब वे अपनी बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे तो उनके पिता को अपनी जमीन बेचने पड़ी जिससे वे अपने बेटे की फीस चुका सके और उनके बेटे की पढ़ाई में कोई बाधा न आए। एक किसान के लिए उसकी जमीन अमूल्य होती है।
जियाउल बताते है की उन्हे बेहद खुशी है की उन्होंने अपने पिता की मेहनत बेकार नहीं जाने दी और उनका सपना पूरा किया। डॉ.जियाउल के आदर्श पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न से सम्मानित डॉ अब्दुल कलाम साहब है, जिन्होंने जियाउल का जीवन बदलने में मदद की।
माता-पिता के आशीर्वाद ने इन उचाइयो तक पहुंचाया
डॉ जियाउल कहते है की उनकी माता सजदा खातून और उनके पिता शेख जुनैद के समर्पण और उनके आशीर्वाद से ही संभव हो पाया है की आज वे कामयाब हो सके। उन्होंने बताया की जनवरी-2023 तक वे तीनों विद्यार्थी की ज्वाइनिंग ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) इंग्लैंड में असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) के पद पर हो जायेगा।
जब यह खबर उनके घर तक पहुंची तो पूरे प्रदेश में खुशी का माहोल थ। जिले के विधायक कृष्ण नंदन पासवान और गांव के मुखिया विनय कुमार के साथ क्षेत्र के सभी जन प्रतिनिधियों के द्वारा जियाउल और उसके माता पिता को ढेरो बधाई दी।
जियाउल के साथ कई विद्यार्थियो का भविष्य बन गया
ऑल इंडिया लेवल पर आयोजित की गई गेट की परीक्षा में वर्ष 2021 में जियाउल ने 19 वां स्थान प्राप्त किया था। और आज उन्हे मैकेनिक एंड ऑटोमोबाइल इंजिनियरिंग विभाग ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए चुना गया।
इनके साथ आईआईटी मुंबई के पीएचडीएन छात्र डॉ. जीबी कृष्णा को नेनोस्कल इंजिनियरिंग एंड फोटैनिक्स के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चुना। और यूपी राज्य के बस्ती जिले की इलिज शर्मा को कंप्यूटर साइंस के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए चुना है। एलिज भी एक पीएचडीअन छात्र है।



