
Patna: चाय वाले की ताकत तो आज हर किसी ने देखी है। हमने देखा कि किस तरह से एक चायवाला आज उच्च पद पर विराजमान होकर देश को चला रहा है। PM मोदी के विषय में तो हम सभी ने सुना है और जाना है। परन्तु आज हम आपको जिस चायवाले के विषय में बताने जा रहे है।
वह एक ऐसा चायवाला है। जो मेहनत करके दरोगा बन गया। इस चायवाले (Chaiwala) ने दिनरात मेहनत की प्रतिदिन 8,9 घंटे पढ़ाई की। गूगल, इंटरनेट और यूट्यूब का सही इस्तेमाल किया और आज वह इस मुकाम पर आ गया है कि पूरा परिवार और गॉंव उस पर गर्व कर रहा है।
बिहार का चायवाला बना दारोगा
गरीबी इंसान की मजबूरी होती है। जिसका सामना इंसान डट कर करता हे। अक्सर देखा जाता है कि भले ही गरीब जिंदगी से परेशान होता है। परंन्तु उसके इरादे एक अमीर इंसान से काफी मजबूत होते है। यही इरादा उसकी सफलता का कारण भी बन जाता है।
आज की हमारी कहानी एक ऐसे ही गरीब व्यक्ति की है। जो गरीबी को झेलते हुए दारोगा बन गया। बिहार के कटिहार मनिहारी मे रहने वाले सुकरात सिंह दारोगा की परीक्षा को निकालने में सफल हो चुके है। आइये उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण बातों को जानते है।
गंगा कटाव की वजह से गवाया घर शुरू किया चाय बेचना
आपको बता दे कि कटिहार (Katihar) मेदनीपुर में गंगा के कटाव की वजह से सुकरात (Socrates Singh) का परिवार अपना घर गवां चुका था। जिस वजह से सुकरात के पिता ने चाय रेलवे स्टेशन पर बेचनी शुरू की। सुकरात के पिताजी का नाम कैलाश सिंह है। जोकि मनिहारी के रेलवे स्टेशन पर ही चाय बेचते थे।
सुकरात भी अपने पिता जी का हाथ चाय बेचने में बंटाता था। लेकिन उसका सपना बचपन से ही बर्दी पहनने का था। इसी सपना को पूरा करने के लिए सुकरात दिन रात मेहनत करता था। वह दिन में अपने पिताजी की चाय की दुकान मे मदद करता और रात में अपनी पढ़ाई किया करता था।
सुकरात सेल्फ स्टडी किया करता था। वह यूट्यूब और गूगल की मदद से भी पढाई किया करता था। जिस वजह से आज वर दारोगा की परीक्षा को निकालपाने में सफल हो पाया। उसकी इस सफलता को जानने के बाद हर व्यक्ति हैरान है।
सुकरात माता पिता को देते है श्रेय
सुकरात अपन पूरी सफलता को माता पिता की देन मानते है। बेटे की सफलता पर माता पिता भी बहुत अधिक खुश है। वह सुकरात की तारीफ किये नहीं रूक पा रहे है। सुकरात ने अपनी सफलता से निश्चित तौर पर यह साबित कर दिया कि परिस्थिति के विपरीत होने से प्रभाव नहीं पड़ता। अगर परिश्रम में सच्चाई है, तो तकदीर ओर हालात दोनों को बदला जा सकता है।
आपको बता दे सुकरात का परिवार कटिहार के मेदनीपुर में निवास करते है। घर गवाने के बाद सुकरात के पिता जी कैलाश सिंह जी ने रेलवे स्टेशन पर चाय 20 वर्षों तक बेची है। अपने पिताजी को काम करता देख सुकरात भी अपने पिता की चाय की दुकान मे मदद किया करता था।
वह काम करने के साथ साथ जो उसका सपना था वर्दी पहनने का। उसे भी पूरा करने के लिए ईमानदारी से मेहनत करता था। जिसका परिणाम आज हमारे सामने है, सुकरात दारोगा की परीक्षा को निकालपाने में सफल हो गया है।
परिवार में खुशी की लहर
अपने पुत्र की सफलता पर कैलाश सिंह बहुत ही गर्व महसूस करते है। उनकी ऑंखों में बेटे की सफलता की खुशी की चमक साफ दिखती है। जब उनसे बेटे की सफलता के विषय में जानकारी ली गई। तो अपने बेटे की तारीफ करते हुए वह कहते है, कि यह सफलता उनके बेटे को उसकी मेहनत लगन की वजह से मिली है।
वह कहते है कि उनके बेटे ने अपना फ्यूचर खुद बनाया है। वही बात की जाये सुकरात की तो वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माँ और पिताजी को देते है। सुकरात कहते है कि वह बहुत ही ईमानदार पुलिस वाला बनेंगे।
रेलवे स्टेशन पर चाय बेचकर की पढ़ाई, अब बन गए हैं दारोगाजी। pic.twitter.com/hZ9T0a1zpn
— News18 Bihar (@News18Bihar) July 20, 2022
सुकरात ने जो सफलता गरीबी में रहकर पाई उसकी जितनी तारीफ की जाये उतनी कम है। सुकरात जैसे होनहार बालक आज की युवा पीढ़ी का पथप्रदर्शक के तौर पर उभरे है। वह इसी तरह आगे बढ़े यही हमारी कामना है। सुकरात की सफलता पर हम सुकरात को बधाई देते है।



