बिहार में एक परिवार में बेटी के जन्म पर पूरा गाँव झूम उठा, लाड़ली को पालकी में ऐसे घर लाया गया

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birth of daughter
Awesome celebration on the birth of a daughter in Chhapra Bihar. After 45 years daughter was born in this family.

Photo Credits: Twitter

Patna: सभी घर में जन्मी बेटीया मां पापा की परी होती है। आज इस बात को बिहार के एक घर परिवार ने सिद्ध कर दिया है, प्राचीन काल से चला आ रहा है की एक पुरुष ही घर का मुखिया होता है। जो घर के सभी मुख्य कार्यो का फैसला लेता आया है और हमारा समाज भी पुरुष प्रधान समाज रहा है और इन्ही सभी मान्यताओं और कुप्रथाओ के चलते महिलाओं की जिंदगी घर तक ही सीमित रह गई।

घर के कार्यों के अलावा एक महिला कभी आगे नहीं बढ़ पाई। लेकिन कहते है की एक समय के बाद बदलाओ आता है और ये समय बदलाव का है। जिसकी शुरुआत बहुत समय से चली आ रही है।

आज के समय में बेटा हो या बेटी दोनो ही बराबर है। जिसमे शासन ने भी बहुत मेहनत की है। की हम आज बहा खड़े है जहा एक बेटी के जन्म पर खुशियां मना रहे है। बिहार राज्य के एक परिवार में 45 साल बाद खानदान में जन्मी बेटी।

बिहार के एक छोटे से ग्राम की कहानी

बिहार (Bihar) राज्य के छपरा (Chhapra) ग्राम में एक परिवार में बेटी का जन्म हुआ, तो परिवार में खुशी का माहोल ऐसा बना जैसे कोई धार्मिक त्यौहार आ गया हो और परिवार के सदस्यों ने अपनी खुशी और बेटी के पैदा होने की खुशी का स्वागत बैंड बाजा बजवा कर नाच गाना करके की।

दरअसल, बिहार के इस परिवार में एक बहुत लंबे इंतजार लगभग 45 वर्षो के बाद इनके खानदान में एक बेटी ने जन्म (Daughter Birth) लिया जिसने पूरे घर को खुशियों से भर दिया और बेटी के आते ही पूरा परिवार में खुशी का माहोल बन गया और परिवार के सदस्यों ने अपनी खुशी का स्वागत ढोल नगाड़े, डांस, नाच गाकर किया।

बेटी का स्वागत

इस ग्राम के लोगो ने बेटी के जन्म लेने के बाद अपनी खुशी जताते हुए बहुत ही भव्यायोजन किया। नवजात बच्ची (New Born Baby Gilr) को अस्पताल से घर लाने और उसके स्वागत को एक भव्य उत्सव मनाते हुए स्वागत (Wellcome) किया।

बिटिया रानी को अस्‍पताल से घर लाने के लिए एंबुलेंस की जगह बैंड बारात और डोली को सजाया गया और उसमे बैठालकर बेटी का घर में गृहप्रवेश कराया गया। घर और आस पड़ोस की सभी महिलाओं द्वारा मंगल गीत गाए और घर के अन्य सदस्यों, पड़ोस के लोगो द्वारा ढोल नगाड़ों पर झूमते हुए नजर आए। खुशियां उनके अंग अंग से फुट रही थी।

खुशी में मगन होकर झूमा परिवार

बिहार के ग्राम छपरा का है यह परिवार। जिन्होंने बेटी के जन्म लेने पर उसे एक उत्सव के रूप में मनाया। यह परिवार छपरा के एकमा नगर पंचायत क्षेत्र के निवासी धीरज गुप्ता का परिवार है। इनके परिवार की ही एक महिला ने ने एकमा के एक निजी हॉस्पिटल में बेटी को जन्म दिया।

बेटी पैदा होने की खबर सुनकर परिवार खुशी से झूम उठा नवजात कन्या को घर ले जाने के लिए एम्बुलेंस के बदले एक बहुत ही भव्य डोली सजाई गई और डोली को परिवार के सदस्यों के द्वारा कंधो पर बिठा कर गाजे-बाजे के साथ घर लाए।

45 साल बाद इस परिवार में बेटी का जन्म हुआ है और इनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है और खुशी से झूमते इस परिवार ने अस्पताल के सभी कर्मचारियों पर मे नोटों की बारिश कर दी और उनका मुंह मीठा से भर दिया।

बेटीया होती है लक्ष्मी का रूप

मिली जानकारी के अनुसार धीरज गुप्ता के बड़े भाई बबलू गुप्ता ने कहा कि उनके परिवार में वे चार भाई हैं, लेकिन किसी भी भाई के घरमें बेटी नहीं है। और भाई एक बेटी के लिए तरस गए है और उन सभीकी हार्दिक इच्छा थी कि उनके परिवार में एक बेटी हो और भगवान उनकी सुन ली।

जानकारी के मुताबिक उन्होंने बताया कि करीब 45 वर्ष बाद उनके परिवार में बेटी का जन्म हुआ है। परिवार के बड़े सदस्य कहे जाने वाले और इस नन्ही बिटिया के दादा शिवजी प्रसाद के अनुसार बेटियां सही मायने में लक्ष्मी का स्वरूप कही जाती हैं। जो उनके घर आंगन को हरा भरा और खुशियों से भर देती है।

हम जानते है की हर परिवार की सोच विचार समान नहीं होते। सभी के विचार अलग अलग होते है और हमारा समाज तो प्राचीन काल से पुरुष प्रधान रहा है। तो इसी सोच के अनुसार एक महिला पुरुष से आगे नहीं बढ़ सकती है।

यदि किसी महिला ने यदि ऐसा सोचा भी तो उसके परिवार के लोग ही उसकी टांग खींच लेते है। मगर आज के समय में ऐसा नहीं होता है। जिसमे शासन ने एक महिला को आगे बढ़ने के लिए इस प्रकार के कई कानून बनाए है। जिसका विरोध कोइ नही कर सकता।

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