
ISRO का मिशन चंद्रयान-2 95% कामयाब हो गया है। लैंडर विक्रम का पता लगा लिया गया है। अब भारत का Next मिशन सूर्य पर होगा। आने वाले साल में ISRO सूर्य का परीक्षण करने के लिए अपना प्रथम सौर मिशन आदित्य L-1 लांच करेगा। भारतीय ISRO अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की जानकारी के मुताविक अध्यक्ष के सिवन ने इसकी इन्फॉर्मेशन में दी थी।
ISRO Chief K Sivan ने बोला इस मिशन का लक्ष्य बिना किसी क्षति के सूर्य पर स्थायी तौर पर नजरे बनाए रखना है। आदित्य एल-1 का उद्देश्य सौर आभामंडल का प्रेक्षण करना है। के.सिवन ने बताया कि आदित्य एल-1 मिशन को पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर लेग्रेंगियन पॉइंट 1 L-1 के चारों ओर प्रभामंडल की कक्षा में दाखिल कराया जाएगा, जिससे बिना किसी रुकावट या ग्रहण के लगातार सूर्य का अध्ययन किया जा सके।
वहीं भारत मिशन चंद्रयान2 के अंतर्गत अभी तक विक्रम लैंडर से कोई संपर्क करने में अभी सफलता नही मिल पाई गई। ISRO वैज्ञानिक लैंडर से संपर्क साधने के प्रयास में लगे हुए हैं। जब ISRO के एक अधिकारी ने चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से जुड़े अनुमानों की सोमवार को पुष्टि करते हुए कहा कि लैंडिंग के दौरान विक्रम लैंडर गिरकर तिरछा हो गया है, लेकिन उसको किसी प्रकार की कोई हानि नही पहुँची है।
वह सिंगल पीस में है और उससे संपर्क बनाने जे किये सभी प्रयास किये जा रहे है। इससे पहले ISRO की ओर आई जानकारी में भी लैंडर के पलट जाने की आशंका जताई गई थी, लेकिन वह टूटा है या नहीं, इसकी पुष्टि नही हुई थी। ISRO के अधिकारी से एक खबर सामने आई है कि लैंडर विक्रम चांद की सतह पर उतरने के लिए निश्चित स्थान से बहुत समीप उतरा।
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— Ek Number News (@EkNumberNews) September 7, 2019
उसकी लैंडिंग काफी दिक्कतो से भरी रही। चंद्रमा की कक्षा में मौजूद चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से ISRO को यह इन्फॉर्मेशन मिली है। 7 सितंबर को चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की चांद पर Hard लैंडिंग हुई थी। तब सतह को छूने से सिर्फ 2.1 किमी पहले लैंडर का ISRO से संपर्क टूट गया था।
मिशन के रोवर और लैंडर की लाइफ एक ल्यूनर डे मतलब पृथ्वी के 14 दिन के बराबर है। शनिवार को ISRO के चेयरमैन के सिवन ने बताया था कि हम अगले 14 दिन तक रोवर और लैंडर से संपर्क बनाने का प्रयास जारी रखेंगे। इसके बाद रविवार को चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ने चांद की सतह पर लैंडर की थर्मल इमेज क्लिक की थीं।



