इसे जानने के बाद आप ‘Google Map’ की जगह स्वदेसी ‘Navic’ नेविगेशन सिस्टम यूज़ करेंगे

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India's NavIC System
International Maritime Organisation recognises India's NavIC as component of World-Wide Radio Navigation System (WWRNS): ISRO

File Presentation Photo

Delhi: इंटरनेट की उपयोगिता क्‍या है हमारे जीवन में, यह हम सभी बहुत अच्‍छे से जानते है। आजकल की दुनिया डिजिटल है। कोई भी काम इंटरनेट के बगैर नहीं हो पाता। यह पूरा संसार इंटरनेट के माध्‍यम से जुड़ा हुआ है। जिस वजह से आज दुनिया हमें छोटी लगने लगी है।

आजकल हर कार्य इंटरनेट पर डिपेंड हो गया है। हमारे ऑफिस का काम हो, शॉपिंग करना हो या फिर दैनिक जीवन से जुड़ी हुई छोटी मोटी चींजे जैसे बिजली का बिल भरना, इंस्‍योरेंस कि किस्‍त भरना, घर से ही खाना ऑर्डर करना, इत्‍यादि इन सभी के लिए इंटरनेट की सहायता ली जाती है।

अगर हम कहीं अंजान जगह जाते है, तो रास्‍ता भटकने पर तुरंत ही नेविगेशन सिस्‍टम (Navigation System) में से एक गूगल मेप ऑपन करके सही रास्‍ता खोज लेते है। लेकिन क्‍या हमारे पास सिर्फ गूगल मेप ही एक एकमात्र नेविगेशन एप है। अगर यह सवाल आपके मन में भी है। तो इस खबर के जरिये इस सवाल का जबाव आप जान जाएंगे। जो आइये इस सवाल का जबाव जानते है।

पुराने जमाने में नहीं होता था गूगल मेप का इस्‍तेमाल

आजकल वह जमाना नहीं रहा जब लोग कही जाते थे, तो लोगों से रास्‍ता पूछकर रास्‍ता ढूँढते हुए अपने गंतव्‍य स्‍थान तक पहुँचते थे। आजकल लोग बिना संकोच के गूगल मेप कि मदद लेते है। इसकी विश्‍वसनीयता कितनी है। यह हमे बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन गूगल मेप एक विदेशी ऐप है।

इतने अधिक मात्रा में इसके इस्‍तेमाल किया जाना हमारी प्राइवेसी के लिए थोड़ा खतरा रहता है। यह देखकर हमारे देश के वैज्ञानिकों ने यह विचार किया कि अगर इसकी जगह हमारे देश का खुद का नैविक हो तो लोगों के लिए यह बहुत ही सुरक्षित होगा।

नैविक भारत का स्‍वदेशी नैविगेशन सिस्‍टम

इसलिए हमारे देश के वैज्ञानिको ने नैविक (Navic) को विकसित किया। जो गूगल मेप (Google Map) की ही तरह रास्‍ता खोजने में मदद करता है। लेकिन नैविक पूरी तहर से भारतीय ऐप (Indian APP) है। चूँकि अभी पूरे देश में मेड इन इंडिया का दौर चल रहा है। ऐसे में यह भारतीय एप मेड इन इंडिया के मिशन में सोने पर सुहागा है।

नैविक को आईएनएसएस (INSS) के नाम से भी जाना जाता है। यह हमारी करेंट पॉजिशन बताने के साथ साथ गंतव्‍य स्‍थान कि दिशा भी बताता है। नैविक अभी इस समय 1500 किलोमीटर के आसपास के क्षेत्र को कवर करने में सक्षम है। इसे आगे और भी व्‍यापक किया जायेगा।

नैविक से संबंधित जानकारी (About Navic Info)

नैविक को ऑपरेट करने के लिए 8 कृत्रिम उपग्रह काम में लिये जा रहे है। नैविक मुख्‍यत: 2 प्रकार की सेवा देता है। नैविक के 2 भाग है, पहला भाग स्‍पेस सेगमेंट कहलाता है। तो वहीं दूसरा भाग ग्राउंड सेगमेंट कहलाता है। स्‍पेस सेगमेंट में आठ सेटेलाइट है। नैविक के ग्राउंड सिस्‍टम में 7 भाग होते है। इन सात भाग में से एक भाग जिसे आईआरएससीएफ (IRSCF) कहा जाता है। उसे मास्‍टर कंट्रोलर कहते है। यह मास्‍टर कंट्रोलर मध्‍यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित है।

इसका आईएनसी सिस्‍टम जो है, वह डेटा को कलेक्‍ट करने के साथ साथ रिमोट ऑपरेशन भी करता है और सीडीएमए सिग्‍नल को कलेक्‍ट करने का कार्य करता है। नैविक में सिग्‍नल दो प्रकार के होते है। पहला स्‍टैडर्ड पॉसिशनिंग सर्विस और दूसरा प्रेसिशन सर्विस। यह दोनों ही सर्विस एल5 और एस बैंड पर काम करती है।

नैविक की सटीकता

कुछ लोगों के मन में इस नेविगेशन सिस्‍टम (Indian Regional Navigation Satellite System) की विश्‍वसनीयता को लेकर कुछ प्रश्‍न होंगे। कुछ लोग यह सोच रहे होंगे कि क्‍या भारत देश में बने इस देसी नेविगेशन सिस्‍टम में इतनी काबिलियत है, कि यह बिल्‍कुल सटीक जानकारी दे। तो हम आपके इस प्रश्‍न का जबाव भी दे देते है। किसी भी नेविगेशन सिस्‍टम को तभी सफल माना जाता है, जब वह बिल्‍कुल सटीक जानकारी देने के काबिल हो।

हमारे देश में बना यह नैविगेशन सिस्‍टम देश में 10 मीटर की सटीकता रखता है। अगर भारत के बाहर की बात की जाये तो इसकी 20 मीटर की सटीकता हो जाती है। आपको बता दे 20 मीटर की सटीकता का अर्थ है, कि यह भारत के आस पास के 1500 किलोमीटर का क्षेत्र कवर करेगा।

इसे और भी किया जायेगा विकसित

आज के समय की बात की जाये तो दूसरे विदेशी नेविगेशन सिस्‍टम 30 मीटर तक की सटीकता देते है। अभी प्रारंभ में देश का नेविगेशन सिस्‍टम 5 मीटर तक की सटीकता देगा। आगे इसे और भी विकसित और उन्‍नत किया जायेगा। मेक इन इंडिया के इस दौर में स्‍वदेशी वस्‍तुओं के उपयोग का मजा ही कुछ अलग है।

यह हमारे देश के लिए बहुत ही गौरव की बात है, कि हमारा देश मेक इन इंडिया (Make In India) के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। एक भारतीय होने के नाते इस नई शुरूआत पर हम गर्व करते है। आशा है, कि यह सफर आगे भी इसी तरह चलता रहेगा और हम भारतीयों को नये नये स्‍वदेशी उपकरण मिलेंगे। जिससे हमारा देश और भी उन्नति करेगा।

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