शख्स ने कई दिन की मेहनत से घर पर ऐसा जुगाड़ लगाया, जिससे आस पास कोई पानी से लिए ना तरसे

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Soak Pit Construction

Photo Credits: Social Media

Bhagalpur: पूरी दुनिया में एक विकट समस्या आन पड़ी है। जल की कमी। हम जानते है कि हमारा 75 प्रतिशत शरीर पानी से बना हुआ है और पृथ्वी में उपलब्ध 80 प्रतिशत चीज़ों को पानी की जरुरत होती है ऐसे में पृथ्वी पर जल की कमी धरती के नाश के तरफ ले जाती है।

वैसे तो पृथ्वी का 75 प्रतिशत भाग पानी से घिरा हुआ है, परंतु पीने योग्य पानी मात्र 3 प्रतिशत है, जो घरती के नीचे है। लोगो ने अपनी सुख सुविधा के लिए वनों की कटाई कर दी, जिससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया है।

वृक्षो से आकर्षित होकर बरसात होती थी। परंतु अब वृक्ष न होने से कही भारी बारिश तो कही सूखा जैसी स्थिति बन रही है, जो पृथ्वी वाशियो के लिए बिकट समस्या है और इस का जिम्मेदार भी मानव खुद है। पहले किसान बारिश के पानी से अपनी फसल लगाता था और आज किसान घरती का पीने योग्य पानी का इस्तेमाल करके अपनी फसल बना रहा है। ऐसे में लोगों को जागरूक होने की बहुत जरुरत है और साथ में जल संरक्षण की।

आपको बता दें कि वर्षा जल संग्रह नीति से पानी के साथ साथ अपने जीवन को भी बचाया जा सकता है। पानी को बेकार न जाने दें उसका संरक्षण करे। इसके लिए बहुत से लोगो ने कई तरह के उपाय निकाले। इन्ही में से एक है बिहार का युवक (Bihar Youth) जिसके बारे में हम आज बात करेंगे।

राहुल रोहिताश्व के द्वारा बनाया गया एक सोक पिट

वर्ष 2019 में रोहित ने अपने घर के बाथरूम और किचन को भी अपने द्वारा निर्मित सोक पिट (Soak Pit) के एक पाइप (Water Pipe) से जोड़ दिया है। जिससे बाथरूम और किचिन से निकलने वाला पानी बेकार न हो और वह सोख पिट में चला जाए। जिससे वाटर लेवल हमेसा अच्छा रहे।

जल संकट पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है। गर्मी के दिनों में सभी जलाशय सूख जाते है जिससे त्राहि त्राहि मच जाती है। अभी तो कही न कही से पानी की पूर्ति हो जाती है, परंतु यह भविष्य के लिए खुली चेतावनी है, अगर अभी नहीं सुधरे तो बाद में वक़्त भी नहीं होगा।

बिहार राज्य के रहने वाले राहुल रोहिताश्व जल संकट से अपनी पीढ़ी को बचाने के लिए अपने घर पर बूंद-बूंद पानी को बर्बाद न करके उसकी रक्षा कर रहे हैं। राहुल भारतीय खाद्य निगम के भागलपुर मंडल कार्यालय में एक तकनीकि सहायक के पद पर पदस्थ हैं।

उन्होनें पानी की समस्या को समझते हुए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को एक आधुनिक रूप दिया है। वे कहते है कि प्रतिवर्ष वर्षा का जल इधर उधर बह का बर्बाद हो जाता है। जिसका संरक्षण कर हम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए जल सुरक्षित कर सकते है इसी बात को ध्यान में रख कर रोहित एक सोक पिट बनाया।

किस तरह बनाया गया सोक पिट

सोक पिट बनाने के लिए उन्होंने अपने घर पर अतिरिक और खुली जगह पर 6 फीट लंबा, 6 फीट चौड़ा और 6 फीट गहरा एक गड्ढा खुदवाया। इस गड्ढे को चारों ओर से ईंट से छिद्रदार सोलिंग कराकर एक टैंक का आकार दिया।

इसके बाद इस टैंक (Soak Pit Tank) को प्लास्टिक की मोटी 6 इंची पाइप के जरिये अपने छत से जोडा। जो वर्षा के जल को पाइप की मदद से टैंक में पंहुचा देगा। और यह पानी छिद्रदार ईंट की सहायता से ज़मीन में सोख लेगा और वो पानी बर्बाद न होकर ज़मीन में संग्रहित हो जाएगा।

टैंक में रोहित ने एक ओवरफ्लो के लिए एक रास्ता बनवाया जो उनके घर के पीछे के बगीचे में खुलता है। जैसे कभी टैंक फुल हो गया और पानी बाहर वेस्ट न हो उसका उपयोग बगीचे में हो जाएगा। यह टैंक बड़ी गिट्टी, महीन गिट्टी, ईंट की चूर्ण और बजरी से करीब 6 इंच तक भर हुआ है, जो वर्षा जल को अच्छी तरह अवशोषण कर सकेगा और इस टैंक के मुह पर एक सीमेंट की स्लैब ढलवा दी, जिससे गन्दगी टैंक में ना जा सके।

कितनी लागत पर बनाया गया

राहुल को यह पन सोख बनवाने में करीब 8 हजार रुपयों की लागत और 7 दिनों का समय लगा। वे कहते है कि अगर किसी के पास थोड़ी सी भी ज्यादा जगह हो तो वे यह पन सोखा अवश्य बनवाए। इससे उनके साथ उनकी आने वाली पीढ़ी के लिए अच्छा होगा।

राहुल बताते है कि वे वर्ष 1994 में पानी की समस्या से बेहद परेशान थे। उसी वक़्त उन्हें समझ आ गया कि यह समस्या कोई आम समस्या नहीं है। तभी से उन्होंने पानी का संरक्षण करना प्रारम्भ कर दिया। उनके इस कार्य ने धीरे-धीरे अब ऐसी स्थिति ला दी कि 120 फीट में ही बोरिंग में पानी आसानी से मिल जाता है।

वर्षा जल संग्रहण के लिय की अपील

इस सोक पिट ने उनके पुरे महल्ले को फायदा पहुचाया है, आज उनका पूरा महल्ला उनकी तारीफ करता है। और लगभग सभी ने इस समस्या से छुटकारा पा लिया है। राहुल के इस नेकी से भरे काम से भागलपुर के कई लोग भी काफी इम्प्रेस है।

अब वहां के लोग जल संरक्षण की अपील करते हुए कहते है, कि अगर लोगों को अभी समझ नहीं आया, तो बाद में बहुत देरी हो जाएगी, जिससे हालात हमारे काबू में नहीं होंगे और लोग प्यासे ही मर जाएंगे। दूसरी तरफ पर्यावरणविद के अधिकारी विजय वर्धन ने इसकी जांच की और लोगो को इसे अपनाने की अपील की।

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