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Kashmir: भारत में अनेक तरह के फल उगाये जाते हैं। कुछ फल किसानो में बहुत आमदनी दे जाते हैं। आज किसान नई नई तकनीको का उपयोग करके खेती करके लाखों में कमाई कर रहे है। अब देश का किसान नये प्रयोग करने में काफी विश्वास रखता है। स्ट्रॉबेरी तो हम सभी ने खाई है। आज की बात कि जाये तो इसे मार्केट से बहुत ही आसानी से खरीदा जा सकता है।
स्ट्रॉबरी (Strawberry) देशी फल नहीं, बल्कि एक विदेशी फल है और यह बात हम सभी बहुत अच्छे से जानते है। लेकिन इसकी लोकप्रियता आज इतनी हो गई है, कि कुछ लोग इसे अपने फेवरेट फ्रुट (Favorite Fruit) में रखते है। लोग इसका स्वाद जरूर लेना चाहते हैं।
ऐसे में इसकी मांग की वजह से हमारे देश मे भी इसकी खेती की जाने लगी है। यह महंगा होने की वजह से अच्छी आमदानी प्राप्त करने का एक बहुत ही अच्छा साधन बन चुका है। जम्मू कश्मीर में भी इस फल की बड़े पैमाने में खेती होने लगी है।
एक नंबर न्यूज़ की तरफ से ‘अभिलाष दुबे’ ने कश्मीर और इस गांव का निरिक्षण किया, तो पाया की कश्मीर के किसान खेती के लिए स्ट्रॉबेरी का चयन कर रहे हैं और आज इस वजह से उनके गॉंव की पूरी तस्वीर ही बदल गई है। स्ट्रॉबेरी की खेती (Strawberry Farming) की शुरूआत के बारे में विस्तार से जानते हैं।
कम लागत और कम जमीन पर की शुरूआत हुई
भारत का ताज कहे जाने वाले जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) के छोटे से गॉंव कनिहामा (Kanihama) और जासु खीमबेर गाँव (Gaasu Khimber Village) का किस्सा है। यह गॉव पहाड़ी क्षेत्र मे है। पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण वहा के किसान के पास ज्यादा जमीन नहीं रहती है। लेकिन एक किसान ने कभी यह नही सोचा था कि कम जमीन होने के बावजूद भी उन्हें भगवान ने एक ऐसी जलवायु वाले राज्य में जन्म दिया है। जहॉं वह बहुत ही कीमती फल स्ट्रॉवेरी की खेती कम लागत और कम जमीन पर कर पाएंगे।
मिशन के अधिकारी ने की मदद
जब हमने यहाँ के किसानो से काल कर बात की तो बताया गया की किसान कुछ किसानों ने नये एक्सपेरिमेंट करने की कोशिश की थी। वह हमेशा ही उन तरीको को ढूँढते रहते थे, जिससे उन्हें कम लागत में अधिक से अधिक प्रॉफिट मिले। साल 2004 में पहाड़ी राज्यों में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए प्रोद्योगिकी मिशन में आये एक अधिकारी से यहाँ के कुछ किसान मिले। उन अधिकारी ने पहाड़ी इलाके का जायजा ले लिया था।
अधिकारी ने 2-3 किसानों के इन्टरेस्ट को देखते हुए खेती के लिए स्ट्रॉबेरी का चयन करने की सलाह दी। अधिकारी ने किसानों को बताया कि स्ट्रॉबेरी के लिए जिस तरह कि मिट्टी और जलवायु की जरूरत होती है। वह उनके क्षेत्र में मौजूद है। अधिकारी ने कुछ किसानो को खेती के लिए आवश्यक सभी जरूरी सामग्री भी उपलब्ध करवाई।
2004 में की शुरूआत
उन किसानों में से एक किसान ने 2004 मे ही इसकी खेती (Strawberry Ki Kheti) शुरू कर दी। प्रारंभ में चैंडलर स्ट्रॉवेरी को कम इलाके में लगाया। इसके लिए उन्हों किसान ने पॉलीहाउस का निर्माण किया और वहा इन्हें लगाया। ऐसा करने के बाद पहले साल में ही किसान को 50000 रूपये से भी अधिक का फायदा हुआ। इससे आत्मविश्वास बढ़ा और दूसरे साल उन्होंने 9-10 कनाल एरिया में स्ट्रॉबेरी लगाई।

फिर अगले साल किसान को 5 लाख से भी अधिक का फायद हुआ। इसके बाद और भी किसानों को जोड़ा गया और उन्हें भी स्ट्रॉबेरी लगाने का तरीका सीखाया और प्रेरित किया। किसानों ने इसी तरह खेती करना शुरू किया और उन्हें भी काफी अच्छा प्रॉफिट मिलने लगा।
In Pictures: #Strawberry Farming In #Kashmir pic.twitter.com/KHnZLleHqW
— Greater Kashmir (@GreaterKashmir) May 19, 2021
आज की स्थिति यह है, कि उनका गॉंव स्ट्रॉबेरी गॉंव (Strawberry Village) के नाम फैमस हो चुका है। अच्छी आमदानी होने की वजह से वहा के किसानों कि तंगी खत्म हो गई है और वह बहुत ही अच्छे से जीवन यापन करने लगे है।
चैंडलर किस्म कैलिफॉनिया में पाई जाती है
स्ट्रॉबेरी कि किस्म चैंडलर कैलीफोर्निया USA में पाई जाती है। इस किस्म कि स्ट्रॉबेरी को अक्टूबर माह में लगाया जाता है और जनवरी से लेकर अप्रैल माह तक इसके फल प्राप्त होते है। इस फल का रंग लाल होता है। इस फल को काफी आकर्षित माना जाता है। इसका फल काफी कोमल होता है। जिसे खाते ही मुँह में जल्दी घुल जाता है।
स्ट्रॉबेरी की खेती करने का सही तरीका
स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए ठंडे जलवायु की आवश्यकता होती है। इसी वजह से इसकी खेती जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में की जाती है। लेकिन आज के समय में पॉलीहाउस की वजह से दूसरे राज्य भी इसकी खेती सफलता पूर्वक कर पा रहे है।
अगर इसकी अच्छी फसल चाहिए तो लगभग 20 से 30 डिग्री का टेम्पेरेचर होना आवश्यक है। इसे क्यारियॉं बना कर लगाया जाता है। एक क्यारी में लगभग 30 पौधे लगाये जा सकते है। इसमे 4 महीने तक फल लगते है। इसे उसी समय तोड़ा जाता है जब यह पूरी तरह से लाल हो जाता है। इसको अलग अलग क्षेत्र में अलग अलग समय पर लगाया जाता हे।
सामान्य तौर पर इसे सितम्बर अक्टूबर माह में लगाया जाता है। पहाड़ी इलाकों में फरवरी से लेकर मार्च माह में इसे लगाया जाता है। वैसे तो अब स्ट्रॉबेरी की खेती भारत के अन्य यज्यों में भी की जा रही है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी अपने राज्य झारखण्ड में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं।



