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चंद्रयान 2 का ISRO से संपर्क टूट जाने पर देश-दुनिया से प्रमुख लोग ISRO के वैज्ञानिकों की हौसला कम नही होने दे रहे है। इस अवसर पर लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने भी वैज्ञानिकों का हौसला टूटने नही दिया। लद्दाख सांसद ने कहा कि आज चाँद हमसे रूठा है तो क्या हम फिर चाँद को माना लेंगे।
विक्रम अभी न पहुँचा तो क्या फिर पहुँचा देंगे हम। हौसला मत तोड़ना मेरे साथियों ये चाँद तो क्या एक दिन पूरे ब्रह्मांड में अपना तिरंगा लहरा देंगे हम। लैंडर विक्रम 2 सितंबर को ऑर्बिटर से दूर हो गया था। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम की शनिवार करीब 1 बजकर 55 मिनट पर लैंडिंग होनी थी। बाद में इसका टाइम परिवर्तित करके 1 बजकर 53 मिनट कर दिया गया था। लैंडर बड़े आराम से नीचे आ रहा था।
लैंडर ने सफलतापूर्वक अपना रफ ब्रेकिंग चरण को पूरा किया और अच्छी रफ्तार से चांद की सतह की ओर आगे बढ़ रहा था। उसके बाद उसका संपर्क पृथ्वी से अलग हो गया। ISRO के चेयरमैन डॉ. के सिवन ने कहा “विक्रम लैंडर प्लाइनिंग के अनुरूप उतर रहा था और लक्ष्य से 2.1 किलोमीटर पहले तक उसके प्रदर्शन में कोई गतिविधि अवरोध नही बनी।
उसके बाद लैंडर का संपर्क जमीन पर स्थित केंद्र से टूट कर अलग हो गया। Data का विश्लेषण किया जा रहा है।” 978 करोड़ रुपये लागत वाले चंद्रयान 2 के मिशन का अभी सबकुछ समाप्त नहीं हुआ है। चंद्रयान- 2 के तीन भाग थे- ऑर्बिटर, रोवर प्रज्ञान और लैंडर विक्रम।
आज चाँद हमसे रूठा है तो क्या हम फिर माना लेंगे।
विक्रम न पहुँचा तो क्या फिर पहुँचा देंगे।
घबराना नही मेरे साथियों ये चाँद तो क्या
एक दिन पूरे ब्रह्मांड में अपना तिरंगा लहरा देंगे।🇮🇳🇮🇳#Chandrayaan2Landing #ProudIndian #ProudOfISRO #ProudToBeIndian #VikramLander pic.twitter.com/amNvm1JdaG— Jamyang Tsering Namgyal (@jtnladakh) September 7, 2019
मौजूदा समय मे भले ही लैंडर विक्रम का संपर्क पृथ्वी से टूट गया है लेकिन ऑर्बिटर से उम्मीद बनी हुई है। एक साल की मिशन अवधि वाला ऑर्बिटर चंद्रमा की कई फ़ोटो लेकर ISRO को भेज सकता है। वह अभी भी चंद्रमा की सतह से 119 KM से 127 KM की ऊंचाई पर चक्कर लगा रहा है। इसका वजन 2379KM है। इसमें 8 पेलोड भी लगे हुए हैं।



