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Delhi: व्यापार ही एक ऐसा काम है जो कई पीढ़ी तक चलता है। भारत देश में बहुत से ऐसे लोग है, जो अपने पिता के कारोबार को आगे तक ले जाते है। जरुरी नहीं है आज के समय में हर किसी को नोकरी मिल जाए। इस प्रतिस्पर्धा के समय में लोग आधा नंबर से मार खा जाते है।
पहले के समय में पिता की खेती पाती बच्चे करना शुरू कर देते थे। अब लोगो में एक भ्रम बना हुआ है कि सरकारी नोकरी जैसा कुछ नहीं। परंतु हर काम अपनी जगह बहुत अच्छा है। आपदा और संकट के चलते हर सेक्टर को प्राइवेट किया जा रहां है रेलवे से लेकर बैंक तक प्राइवेट हो रहे है। साथ ही आरक्षण के कारण काबिल लोगो को जॉब नहीं मिल पाती।
पहली प्राथमिकता उनको मिलती है, जिनको आरक्षण प्राप्त है और प्राइवेट सेक्टर में लोगो की काबिलियत देखि जाती है। हम कह सकते है देश के जो काबिल लोग है वो सब व्यापारी बन गए है। उन्होंने जॉब से ज्यादा व्यापार में मुनाफा कमाया है।
ऐसी ही एक पर्सनालिटी की आज हम बात करेंगे, जिन्होंने अपने पिता के काम को इतना बढ़ाया की देश का हर नागरिक चकित रह गया पिता ने भारत को पहला स्कूटर (First Scooter Of India) दिया और बेटे ने उसे सातवे आसमान पर पंहुचा दिया। आइये हम जानते है इनके विषय में।
राहुल बजाज की कहानी
आज से करीब 70-80 साल पुराना स्कूटर भारत के साथ साथ कई देशों के लोगों के पास मौजूद है। जिसकी बहुत सी यादे हर किसी के अंदर है। यह एक सफलता की कहानी (Success Story) है हमारे और जो अब हमारे बीच नही है यानि राहुल बजाज (Rahul Bajaj) की। जो सभी के लिए एक प्रेरणा रहे और गरीबों के लिए मिशाल है।
राहुल बजाज एक बहुत ही नेक दिल के इंसान रहे है। एक हँसमुख चहरे के साथ सभी के खूब चहेते रहे है। पूरी दुनिया उन्हें भारत के स्कूटर का राजा कहते है, क्योंकि उन्होंने भारत को पहला स्कूटर दिया था।। राहुल बजाज के पहले स्कूटर का नाम “चेतक” (Chetak) था।
महाराणा प्रताप के घोड़े से इंस्पायर होकर उन्होंने “चेतक” नाम रखा था। वर्ष 1980 में बजाज कंपनी स्कूटर बनाने वाली देश की पहली और सबसे बड़ी कंपनी बनी। राहुल बजाज 49 वर्ष तक बजाज ग्रुप के सीईओ रहे। जिससे बजाज ग्रुप (Bajaj Group) ने अपने 49 वर्ष के करियर में बजाज ग्रुप को एक नया चेहरा दिया और उसे खूब ऊंचाई तक ले गए।
वर्ष 1926 में हुई शुरुआत बजाज ग्रुप्स की
बजाज कंपनी काफी पुरानी और विस्वसनीय है। बजाज ग्रुप्स को राहुल के दादा मिस्टर जमुना लाल बजाज ने वर्ष 1926 में प्रारम्भ किया और राहुल बजाज 26 साल की उम्र में सन 1964 दिनांक 26 नवंबर को बजाज कंपनी से जुड़ गए।
Humble tributes to fearless orator, patriot and inspirational business personality Rahul Bajaj on his birth anniversary. pic.twitter.com/ntUbe5pkDV
— Prof. Varsha Eknath Gaikwad (@VarshaEGaikwad) June 10, 2022
शुरुआत में उन्होंने बजाज कंपनी के कमर्शियल डिपार्टमेंट में काम किया। इसके बाद से ही कंपनी दिन दुगना रात चारगुना तरक्की कर रही है। बजाज ने अपनी मेहनत, लगन और निरंतर प्रयास करते रहने की आदत ने से बजाज कंपनी को 72 मिलियन से सीधा 46.16 बिलियन पर पंहुचा दिया।
राहुल बजाज ने 1964 में की शुरुआत और 1968 में सीईओ बने
राहुल बजाज ने 1964 में बजाज कंपनी को ज्वाइन किया था और उसके 4 वर्ष बाद यानि 1968 में वे बजाज कंपनी के सीईओ बनकर सामने आए। 1972 में बजाज कंपनी ने अपना पहला स्कूटर लॉन्च किया इसका नाम चेतक था।
#CNBCTV18Exclusive | Want people to think of the Chetak as product that be compared with Rolls Royce. Right for us to move forward and find a way of hitting half-a-million EVs a yr, adds Rahul Bajaj or Bajaj Auto pic.twitter.com/xCua9Cywoo
— CNBC-TV18 (@CNBCTV18Live) June 10, 2022
चेतक नाम से लॉन्च हुए इस स्कूटर को लोगो के द्वारा खूब पसंद किया गया इस स्कूटर की खूब बिक्री हुई। इसकी बिक्री इतनी ज्यादा हो रही थी। की बजाज लोगो की मांग को पूरा नहीं कर पा रहा था। इसी लिए इसकी बुकिंग प्रारम्भ हुई वो भी इतने ज्यादा की एक पर्चे में समय अवधि लिखी जा रही थी।
वर्ष 2008 में 10,000 करोड़ के पार पंहुचा व्यापार
राहुल बजाज का लक बहुत अच्छा था। इसी लिए शुरुआत के 1 साल में ही यानि वर्ष 1965 में बजाज कंपनी का टर्नओवर 3 करोड़ के पार पहुच चूका था। इसके बाद वर्ष 2008 में बजाज कंपनी ने लगभग 10 हजार करोड़ का टर्नओवर करना प्रारंभ कर दिया था। अब उनकी कंपनी पीढ़ी दर पीढ़ी चलेगी और इस सब का पूरा क्रेडिट बजाज कंपनी के सीईओ मिस्टर राहुल बजाज को जाता है, क्योंकि यह उनकी कड़ी मेहनत का ही फल है।



