किसान का गजब कारनामा, उगा दिये लाल भिंडी, नीले आलू, काले चावल, अब लाखो रूपये की कमाई हुई

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grows red ladyfinger
Bhopal based farmer Misrilal Rajput grows red ladyfinger in his garden. He is growing Blue Potato as well and earning good.

Photo and Info Credits: ANI

Bhopal: बदलाव समय के साथ बदलाव जरूरी है। जिस प्रकार समय आगे बढ़ रहा है, उसी प्रकार हमें प्रत्येक क्षेत्र में कुछ नए प्रयोग करके बदलाव लाना जरूरी हो गया है। तो फिर कृषि में क्यों नहीं? पुराने पारंपरिक तरीके से अगर कृषि करते हैं, तो उतना लाभ नहीं ले पाते। जितना हम आधुनिक तरीके से खेती को करके ले सकते हैं।

खेती में समय-समय पर नए नए प्रयोग करते रहने चाहिए। कुछ प्रयोग किये है, भोपाल (Bhopal) के खजूरी कला गांव के एक अनोखे किसान मिश्रीलाल राजपूत (Misrilal Rajput) ने। मिश्रीलाल राजपूत बचपन में डॉक्टर बनने की चाह रखते थे लेकिन इसके लिए समय ने उनका साथ नहीं दिया और उन्हें एक किसान बना दिया।

उन्होंने अपनी मेहनत और लगन और खेती में नए-नए तरीके प्रयोगों के साथ एक नई क्रांति उत्पन्न की जो उनके आसपास के किसानों और पूरे देश के किसानों के लिए नई दिशा दी। मिश्रीलाल राजपूत का माना था जिस प्रकार हम कई सारे क्षेत्रों में प्रयोग करके नए-नए प्रोडक्ट उत्पन्न करते हैं या तरीके उत्पन्न करते हैं उसी प्रकार खेती में क्यों ना कुछ नया प्रयोग करके कोई अलग प्रोडक्ट उत्पन्न किया जाए।

इसी विचार ने हमें लाल भिंडी, नीले आलू और काले चावल उगाने का नया विचार दिया मिश्री लाल ने 1989 में कृषि की शुरुआत की। उस समय उन्होंने खेती को पारंपरिक तरीके जो पुराने समय से चलते आ रहे हैं। अपनाए इसी कारण वह ज्यादा मुनाफा नहीं कमा पा रहे थे, ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए उन्होंने नए-नए नवाचार शुरू किए, इसमें सबसे प्रमुख रहा नीले आलू, लाल भिंडी (Red Okra) और भी बहुत कुछ।

खेती (Farming) शुरू करने के साथ उनका ध्यान गया, औषधि खेती की तरफ तो इसमें उन्होंने मैथा,सफेद मूसली, लेमन ग्रास उगाए जो बाजार में बड़े आराम से अच्छे दामों में बिक जाता था। लेकिन किसी कारणों से उन्हें औषधि खेती छोड़ कर।

नए तरीके और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए सब्जियों की तरफ रुख किया। लाल भिंडी प्रमुख रही। उन्होंने प्रयोग के लिए थोड़ी सी जमीन में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान बनारस से इसके बीज लाकर 40 डेसीबल जमीन में भिंडी को बो कर देखा, जो अच्छी तरह उगी और मार्केट में कीमत और मांग अच्छी रही लाल भिंडी (Red Ladyfinger) की मांग भारत में तो है ही, लेकिन बाहर के देशों में बहुत अधिक है।

इसका मूल्य हरी भिंडी से लगभग दोगुना रहता है। मिश्रीलाल फिलहाल लाल भिंडी का बीज (Lal Bhindi Seeds) तैयार करके अगले साल दूसरे किसानों को उपलब्ध कराने की कोशिश में लगे हुए हैं। उनके द्वारा उगाया हुआ नीले आलू (Blue Potato) और काले चावल की भी चर्चा सारे क्षेत्र में है।

मिश्री लाल ने एक काला नमक की भी सफल खेती की थी। पिछले साल उन्होंने थोड़ी सी जगह में नीले आलू लगाए जिसका रिस्पांस मार्केट में अच्छा रहा। बताया जाता है कि नीले आलू स्वास्थ्य के लिए लाभदायक और मार्केट में इसकी मांग भी अधिक है।

जिसके कारण यह महंगी बिकते हैं नीले आलू का नाम उन्होंने नीलकंठ रखा क्योंकि यह आलू ऊपर से नीलकंठ की तरह नीला दिखता है और अंदर से यह है आम आलू की तरह ही होता है। इस आलू मैं ऑक्सीडेंट की मात्रा उस सामान्य आलू से ज्यादा होती है यह आलू स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आम आलू से जल्दी पकता है।

मिश्री लाल का नीला आलू ने भी उनके लाल भिंडी की तरह खूब चर्चा का स्रोत रही। मिश्री लाल हमेशा उन फसलों की खेती करते हैं, जिनकी बाजार में मांग ज्यादा हो, जिससे फसलों का अच्छा कीमत लिया जा सके मिश्री लाल जी ढाई एकड़ पुश्तैनी खेती के मालिक हैं।

उसी के साथ साथ वह आस-पास के खेतों को किराए पर लेकर खेती करते हैं। 1 वर्ष में वह 20 से 22 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। मिश्री लाल ने ANI को बताया कि उन्होंने पिछले साल 1 एकड़ खेत में फूलगोभी उगाकर 450000 Ru तक का मुनाफा कमाया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया और वह सन 2000 में अपने गांव में कार खरीदने वाले पहले किसान बन गए थे।

मिश्रीलाल ने खेती में कई अनूठे और आकर्षक प्रयोगों के आधार पर उन्होंने 2003 में मध्य प्रदेश कृषि भूषण पुरस्कार प्राप्त किया था। आज के समय में लोगों के हिसाब से खेती घाटे का सौदा बोला जाता है वहीं कुछ ऐसे किसान भी हैं जो अपने नए तरीके और प्रयोगों के आधार पर उसी खेती में क्रांति उत्पन्न कर देते हैं जो सारे क्षेत्र और प्रदेश के लिए गौरव की बात होती है, तो कैसी लगी आज की हमारी किसान मिश्रीलाल जी के बारे में कुछ बातें।

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