यहाँ एक शिक्षक ने इतना सम्मान पाया की उनका ट्रांसफर रुकवाने के लिए पूरा गांव खड़ा हो गया

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Teacher Surendra Singh Karki
Villagers demanding to stop transfer of a primary teacher Surendra Singh Karki in Uttarakhand. Mahargadi Government Primary School story.

Photo Credits: Social Media

Bageshwar: एक शिक्षक राष्‍ट्र का निर्माता माना जाता है। क्‍योंकि वही होता है, जोकि बच्‍चों को शिक्षा देकर उसे अपने भविष्‍य में आगे बढ़ने और देश के लिए अपने फर्ज को निभाने के योग्‍य बनाता है। एक शिक्षक ही बच्‍चों का पथ प्रदर्शन करता है।

कुछ टीचर ऐसे होते है, जोकि अपने फर्ज को इतने अच्‍छे से निभाते है, कि लोग उनके सिद्धांतो और उनके पढ़ाने के तरीको के मुरीद हो जाते है। कुछ ऐसा ही हुआ है, उत्तराखंड (Uttarakhand) के नामतीचेताबगड़ में। नामतीचेताबगड़ उत्‍तराखंड राज्‍य के बागेश्‍वर (Bageshwar) जिले में स्थित है।

यहा पर महरगड़ी राजकीय प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक सुरेंद्र सिंह कार्की (Teacher Surendra Singh Karki) का जब ट्रांसफर करने के आदेश दिये गये, तो उस गॉंव के लोग उनका ट्रांसफर रूकवाने के लिए स्‍कूल पहुँच गये। क्‍या है पूरी खबर, आइये इस बारे मे विस्‍तार से जानते है।

शिक्षक सुरेन्‍द्र सिंह कार्की ने अपने टीचिंग के कार्यकाल में स्‍कूल में ऐसे महान कार्य किये, कि उनके कार्य से खुश ना केवल वहॉं के बच्‍चें हुए बल्‍कि पूरे गॉंव के लोग उनके मुरीद हो गये। लेकिन जब सुरेन्‍द सिंह के ट्रांसफर के ऑर्डर आये। तो गॉंव वाले इस बात से नाराज हुये।

सुरेन्‍द्र नाथ जी इतने अच्‍छे से बच्‍चों को पढ़ाते थे, कि लोगों को उनका जाना नागवार लगा। इस वजह से गॉंव के सभी लोग उनका ट्रांसफर रूकवाने के लिए ग्रामीण जिलाधिकारी से गुहार लगाने लगे। ग्रामीणों को सुरेन्‍द्र नाथ टीचर के रूप में इतने पसंद है, कि वह लोग कहते है, कि अगर उस स्‍कूल में कार्की जी नहीं रहेंगे तो वह उस स्‍कूल से अपने बच्‍चों को निकलवा लेंगे।

कार्की जी के पढ़ाने से बच्चे होशियार हुए

ग्रामीणों का कहना के कि जबसे उस स्‍कूल में कार्की जी आये है। तब से बच्‍चों में सुधार हूआ है और उनके बच्‍चों का सर्वांगीण विकास हुआ है और उनसे प्रभावित होकर और भी पेरेन्‍टस अपने बच्‍चो का दाखिला उस स्कूल में में करवा रहे है। जिससे स्‍कूल में बच्चों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है।

कार्की जी के आने से बच्‍चों के पढ़ाई के स्‍तर में इतना सुधार हुआ है, कि उनके स्‍थानांतरण की बात सुनकर लोग नाराज हो गये और उनका ट्रांसफर ना हो और वह यही रूक जाये। इसलिए हर संभव प्रयास कर करने लगे।

स्‍कूल से नाम कटवाने की दी चेतावनी

कार्की जी के ट्रांसफर की बात से ग्रामीण लोग इतने अधिक परेशान हो गये, कि उन्‍होंने स्‍कूल प्रशासन को चेतावनी दे डाली। उन्‍होंने कहॉ कि अगर कार्की जी का ट्रांसफर हो गया तो वह अपने बच्चों का नाम इस विद्यालय से कटवा लेंगे।

गॉंव वाले कार्की जी से इतने प्रभावित है, कि वह चाहते है कि कार्की जी इसी स्‍कूल में रहे और उनके बच्‍चों को पढ़ाये। ताकि उनका बच्‍चा अव्‍व्‍ल आये। ग्रामीण कहते है, कि वैसे ही उनके गॉंव में शिक्षा की हालत ठीक नहीं है और कार्की जी जो कि इतनी मेहनत करके बच्‍चों का भविष्‍य सुधारने की कोशिश कर रहे है। तो सिस्टम बेरुखी दिखाते हुए उन्‍हें यहा से बाहर भेज रहा है।

कार्की जी का क्‍या कहना है
कार्की जी ने जब यह सब देखा और उनसे जब इस मामले के बारे में बात की गई। तो वह कहते है कि ‘एक शिक्षक वह होता है, जो अपने जीवन के अनुभव से सीखी हुई बातों को अपने छात्र-छात्राओं को शेयर करके उन्‍हें इस सामाज में रहने योग्‍य बनाता है और बच्‍चों को सामाजिक के साथ साथ मनोवैज्ञानिक सहारा भी देता है’। और बस यही कार्य मैने इस छोटे से गॉंव महरगड़ी के स्कूल में किया।

वह बताते है कि इस स्‍कूल में जब वह आये थे, तो केवल 10 छात्र ही आया करते थे। लेकिन आज उनके स्‍कूल में 40 से भी अधिक छात्र है। वह बताते है, कि कुछ साल पहले तक इस स्‍कूल में केवल में ही टीचर था। लेकिन छात्रो के बढ़ने से अब मेरे साथ 2 और टीचर कार्य करते है।

कार्की कहते है, कि अभी तो उनका लक्ष्‍य दूरस्‍थ क्षेत्र में स्थित स्कूल में और बदलाव करना है। वह चाहते है, कि इस गॉंव के शिक्षा का स्‍तर और भी सुधरे। इसलिए वह कहते है कि मैं उच्च अधिकारियों से रिक्‍वेस्‍ट करता हूं, कि मेरा ट्रांसफर रोक कर मुझे इस स्कूल में ही कुछ समय दिया जाये ताकि और सेवा कर सकूँ और शिक्षा का स्‍तर सुधारने के अपने लक्ष्य केा हासिल कर सकूं।

मुख्‍य शिक्षा अधिकारी को जारी किया गया निर्देश

बागेश्वर जिले के प्रभारी जिला अधिकारी श्री चंद्रसिंह इमलालजी का इस मामले में कहना है, कि ‘इस बारे मे बात करने के लिए ग्रामीण उनसे मिलने आये थे, उनकी बात को समझते हुये उन्‍होंने उनकी भावना का सम्‍मान करते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी जी को एक्‍शन लेने का निर्देश दे दिया है’। वह कहते है कि उन्हें उम्‍मीद है, कि वह इस बात को समझेंगे और कार्की जी का ट्रांसफर रूकवा देंगे।

जहॉं आज के समाज में लोग अपना फर्ज निभाने में पीछे हट जाते है। वही कार्की जैसे टीचर अपने फर्ज से आगे निकलकर कुछ ऐसा कर जाते है, कि एक मिसाल बन जाती है। कार्की जी की मेहनत और उनका शिक्षा का स्‍तर सुधारने का जो लक्ष्‍य हे, वह अनोखा है। हम उनके इस कार्य की सराहना करते हुए उन्‍हें बधाई देते है। इस छोटे से कार्य काल में लोगों के दिलों में जगह बना लेना बहुत ही अविश्‍वसनीय कार्य है।

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