शख्स ने देसी गाय के गोबर और गौमूत्र से लाखों में कमाई वाला Agri-Business खड़ा कर दिया

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Desi Cow Products Business
Maharashtra Swapnil Kumbhar Started Desi Cow Products Business And Earning Good. Indian cow dung and urine products are in demand.

Nasik: भारत देश में गाय (Cow) को माता का दर्जा दिया गया है। जिस तरह एक शिशु माँ के दूध से अपना पेट भरता है। और वो दूध उस शिशु के लिए सबसे अच्छा आहार माना जाता है। ऐसे ही गाय के दूध को बच्चो से लेकर बूढ़े तक के लिए गाय दूध को बेस्ट आहार माना जाता है। जब गाय को माता कहा है, तो ऐसे ही तो नहीं कह दिया होगा।

आपको बता दे गाय के दूध से लेकर मूत्र तक सबसे पवित्र और उपयोगी माना गया है। गाय के गोबर (Cow Dung) से खाद दूध से तरह तरह की चीज़ें जैसे पनीर, दही, मावा और न जाने क्या क्या बनाया जाता है। जब तक गाय दूध देंगी, तो वो लोगों के लिये उपयोगी है और ना दे तो बोझ लगती है।

एक समय के बाद गाय दूध देना बन्द कर देती है या ठीक से खिलाई पिलाई ना होने के कारण दूध कम देती है। ऐसे लोगो को गाय को घर में रखना बहुत मुसीबत सा लगने लगता है। उनका व्यापार कम होने लगता है।

ऐसे में लोग गाय को सड़क पर या फिर किसी बूचड़ खाने में छोड़ आते है। इसलिए लोगो ने गौ वंश को बचाने के लिए एक विकल्प निकाला जिससे दूध न देने वाली गाय से भी लोग अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते है और उन्हें बूचड़ खाने में जाने से बचा सकते है, तो आइए बात करते है क्या है वो तरीका।

कौन है स्वप्निल कुंभार और किस तरह बचाते है गाय की जान

महाराष्ट्र (Maharashtra) राज्य के सतारा ज़िले के निवासी स्वप्निल कुंभार (Swapnil Kumbhar) ने गौ सेवा का जिम्मा उठाया है। वे रोड पर भटकने वाली देसी गायों को बचा रहे हैं। लोग समझते है कि गायें सिर्फ़ दूध देती है, इसके बाद उनका कोई काम नहीं। परंतु आपको बता दे की गाय से प्राप्त हर चीज़ बेहद उपयोगी है। स्वप्निल कुंभार किसान तक गाय के इस इकोनॉमिक्स को पहुंचा रहे हैं।

स्वप्निल कुंभार देसी गायों (Desi Cows) के सरंक्षण और पशुधन पर को बढ़ावा दे रहे है। गौ माता सिर्फ़ दूध के लिए नहीं बल्कि देसीगाय का गोबर और गौमूत्र भी उपयोगी है। स्वप्निल कहते है कि साबुन, टूथपाउडर, धूप, अगरबती, गौमूत्र अर्क, औषधियां, शैम्पू, बाल के लिए तेल आदि सभी प्रकार के प्रॉडक्ट्स बनाए जाते है।

स्वप्निल कुंभार का सतगुरु यशवंत बाबा गौपालन संस्था के नाम से एक गौशाला भी है, जिसे वे खुद चलाते हैं। इस गौशाला में खिल्लारी नस्ल की 100 से भी ज्यादा गायें हैं। वे रोड पर घूम रही गायों को रेस्क्यू करके अपने गौशाला में रख लेते है।

उनके गौशाला में सैकड़ो गाय है

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में खिल्लारी नस्ल अधिक मात्रा में पाई जाती है। यह क्रीम व्हाइट कलर, सिर बड़ा, सींग लम्बी और पूंछ छोटी रहती है और इस नस्ल के बैल सबसे शकितशाली होते हैं। परंतु गाय दूध बहुत कम देती है।

स्वप्निल कुंभार खिल्लारी नस्ल की देसी गायों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे है और इनके गोबर और गौमूत्र से वर्मीकम्पोस्ट, वर्मीवॉश और कंडे (उपले) बना कर मार्किट में बेच रहे है।

स्वप्निल ने तमिलनाडु में बना महर्षि वाग्भट्ट गौशाला एवं पंचगव्य अनुसंधान केंद्र से मास्टर डिप्लोमा हासिल किया है। साथ ही महाराष्ट्र सरकार ने पशुपालन से संबंधित कई सारे कोर्स चलाए है। ये कोर्स भी उन्होंने कर रखा है। गाय से प्राप्त 5 तत्व जैसे गौमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी को पंचगव्य कहते है।

एग्रो खाद के साथ देशी दवाई भी बनाते है

स्वप्निल ने अपने ज्ञान का बहुत सही इस्तेमाल किया है वे कहते है कि सूखे कचरे और गायों का बचा हुआ खाने के चारे का उपयोग कर वर्मीकम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद बनाते है। वर्मीकम्पोस्ट खाद के लिए देसी गाय के गोबर का ही उपयोग किया जाता है। क्योंकि उनके गोवर में अधिक मात्रा में वैक्टीरिया होते है। जो खेती के लिए अच्छा माना जाता है।

वर्मीकम्पोस्ट खाद सुखी होती है। आपको बता दें जब यह खाद बनाई जाती है। तब उसमें से कुछ लिक्विड निकलता है। जिसे वर्मीवॉश कहते है। एक गड्ढे में सड़ा हुआ कचरा, गोबर और केंचुए डालकर दो से चार दिन में उसके ऊपर कुछ मात्रा में पानी का छिड़काव करते है। जिससे केंचुए के शरीर से एक लसलसा पदार्थ निकलने लगत हैं।

ये पदार्थ गोबर और बाकि के कचरे के साथ पानी में घुल जाता और नाली के रास्ते बाहर आ जाता। इस लिक्विड को एक्खट्टा कर लेते है। इस वर्मीवॉश का उपयोग किसानों द्वारा रासायनिक खाद के रूप में खेतो में उपयोग करते है।

इसके साथ ही गोबर से बने कडों की मांग सबसे ज्यादा है। इन कंडों का उपयोग पूजा सामग्री के रूप में, मच्छर भगाने के साथ साथ कई इको फ़्रेंडली कार्य के लिए किया जाता है।

इन उत्पाद के साथ ही बहुत सारे देशी दवाई बनाने में भी गाय के उत्पादों का उपयोग किया जाता है। देसी गाय के घी में कैल्शियम, विटामिन-ए, डी और ई सबसे अधिक मात्रा में होता है। स्वप्निल का कहना है कि देसी गाय का घी शारीरिक शक्ति और विकास के लिए सबसे अच्छा होता है। यह भोजन का स्वाद भी बढ़ा देता है। इस घी से कई सारी देशी दवाई बनाई जाती है।

गौमूत्र से अर्क निकाल कर इसका उपयोग शरीर से विष निकालने के लिए किया जाता है। गौमूत्र अर्क में काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता हैं। और हैंड वॉश, शैंपू, फिनाइल जैसे कई उत्पाद बनाने में इसका उपयोग होता है।

गाय के पंचगव्य से किस तरह कमाए मुनाफ़ा

स्वप्निल ने गाय के दूध के अलावा अन्य पंच तत्वों से लाभ कमाने का तरीका किसानों को सिखाया। वे कहते है कि एक गाय एक दिन में लगभग 10 किलो गोबर देती है। 10 किलो गोबर से आप आराम से 50 कंडे बना सकते हैं। स्थानीय बाज़ार के साथ साथ किसान भाई इन्हें ऑनलाइन साइट्स पर बेच सकते है।

अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी और भी ई-कॉमर्स साइट्स पर इन कंडो को उचित दाम पर बेच सकते है। स्वप्नल कहते है कि यदि कोई अपने लोकल एरिया में गौमूत्र को बेचना चाहता है, तो वो इससे दूध से भी ज्यादा मुनाफा कमा सकता है। 20 रुपये प्रति लीटर से 100 रुपये प्रति लीटर तक आप गौमूत्र को बेच सकते हो।

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Money Presentation Photo

आगे वे कहते है कि एक देशी गाय से एक दिन में 300 से 400 ग्राम घी प्राप्त कर सकते है और हर क्षेत्र में घी का दामअलग अलग होता है। 10 लीटर दुग्ध में इतना घी आराम से निकल सकता है। 400 ग्राम देसी गाय के घी का दाम दो हज़ार रुपये भी हो सकता है। क्योंकि शुद्ध घी अब आसानी से नहीं मिलता।

वर्मीकम्पोस्ट खाद (Vermicompost Compost) का भी बेहद उपयोग है लोगो को जमीन नहीं मिलती, परंतु वे अपने शौक के लिए घरों की छत पर और गमलों में पौधे लगाते है। केलो के भाव से 50 रुपये प्रति किलोग्राम और थोक में 15 रुपय भी बेच सकते है। स्वप्निल की टीम में 10 लोग है, जो गाय की सेवा और उनके पशुधन का इस्तेमाल करके लोगों को मिशाल देते है साथ ही हादसों की शिकार गाय का भी ट्रीटमेंट करते है।

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