इस किसान ने ऐसा ई-ट्रैक्टर बनाया, जिसको एक घंटे चलाने का खर्च मात्र 15 रुपये आता, मिलने लगे ऑर्डर्स

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Vyom Tractor
Gujarat Farmer Maheshbhai Bhoot Builds Battery Run Vyom Tractor. This battery operated E Tractor costs the farmer only Rs 15 to 20 per hour.

Photo Credits: Twitter

Jamnagar: कहा जाता है कि किसान राष्‍ट्र का अन्‍न दाता होता है। वही अपनी मेहनत के पसीने से धरती को सींच कर देश के लागों के लिए अन्‍न उगाता है। लेकिन आज के समय में हम देखते है, कि पिछड़े क्षेत्र में खेती करने वाले किसान केवल अपनी पारंपरिक खेती पर ही निर्भर रहते है। वह खेती के लिए अपने पारंपरिक तरीको को ही अपनाते है। जिस वजह से उन्‍हें अधिक मेहनत लगती है।

कभी कभी यह भी देखा गया है, कि उन्‍हें इससे उतना अधिक प्रॉफिट नहीं मिल पाता जितना वह कमा सकते है। लेकिन आज हम एक ऐसे व्‍यक्‍ति के बारे में बताने जा रहे है जिसने खेती में लगने वाले खर्च को कम करने के लिए ऐसे उपकरण का अविष्‍कार कर दिया जो आज लाखों किेसानो कि मदद कर रहा है।

मुकेश भुत जी की शुरूआती जिंदगी

हम बात कर रहे है गुजरात (Gujarat) के जामनगर (Jamnagar) में निवास करने वाले महेश भुत (Maheshbhai Bhoot) की जो कि एक किसान के बेटे है। महेश कि आयु 34 वर्ष है। महेश शुरू से ही अपने पिता कि खेती करने में मदद किया करते थे। वह बचपन से ही अपने पिता के साथ काम करके उनकी परेशानी कम करने कि कोशिश करते रहते थे। मुकेश भुत जी की पढाई 2014 में कंप्‍लीट हो गई थी।

पढ़ाई खत्‍म होते ही उन्‍होने सबसे पहले खेती से जुड़े कार्य करने की सोची। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए महेश भुत जी ने पेस्‍टीसाईटस और फर्टीलाइजर के उपयोग से होने वाले खर्च को कम या फिर कहें कि ना के बराबर करने के लिए ऑर्गेनिक खेती करने का डिसिजन लिया। और आगे की रणनीति बनाई।

विचार कैसे आया ई-ट्रेक्‍टर बनाने का

जैविक खेती (Organic Farming) के अलावा उन्‍होंने देखा कि खेत में ट्रेक्‍टर का यूज करने से बहुत अधिक खर्चा बैठता है। तो उन्‍होंने डिसाइड किेया, इस खर्चे को कम करने के लिए वह स्‍वयं से ही मेहनत करके ई-ट्रेक्‍टर बनाएंगे और उन्‍होंने ऐसा ही किया और ई-ट्रेक्‍टर बना दिया।

उन्‍होने अपने ई-टेक्‍टर (E-Tractor) का नाम व्‍योम (Vyom) रखा। अभी के समय में उनके इस ई-ट्रेक्‍टर ने अपनी खास जगह बना ली है। उनके इस ई-ट्रेक्‍टर व्‍योम के बारे में सुन कर पूरे देश से अब तक उन्‍हें 21 से भी अधिक ई-ट्रेक्‍टर के ऑर्डर मिल गये है। और यह क्रम आगे चलता ही जा रहा है।

आप जानकर अचंभित हो जाएंगे, कि महेश जी ने ना ही कोई इंजीनियार का कोर्स किया है और ना ही वह किसी शहर से है। उन्‍होंने अपने गॉंव मे ही रहकर 5 लाख रूपये से इस ई-ट्रेक्‍टर को बनाया है। खर्च कम हो इसके लिए किया नया इनोवेशन।

सर्वप्रथम ई-रिक्‍शा बनाना सीखा

आपको बता दे कि महेश जी चूँकि एक किसान परिवार से थे। इसलिए वह अपने पिता जी से इंस्‍पायर होकर ही खेती करने के लिए आगे कदम बढाये थे और जब उन्‍होंने देखा कि ट्रेक्‍टर के इस्‍तेमाल से अधिक खर्चा बैठता है।

उन्‍होंने डिसाइड कर लिया था, कि वह ई-ट्रेक्‍टर बनाएंगे। उन्‍होंने कई बार प्रयास भी किया इसे बनाने का लेकिन उन्‍हें सफलता नहीं मिली। इसलिए वह उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर जा कर ई-रिक्शा बनाने की ट्रेनिंग लेने लगे लेकिन उनके इस कार्य को सीखने की मनसा ई-ट्रैक्टर बनाना ही था।

उन्‍होंने वर्ष 2021 में ट्रेनिंग खत्‍म करने के बाद अपने पूरे तन मन धन से ई-ट्रैक्टर बनाना प्रारम्भ कर दिया। उन्‍होंने इस कार्य पर नए प्रयोग भी किये और इस ट्रेक्‍टर का पूरा कार्य उन्‍होंने अपने से ही किया।

उन्‍होने ट्रैक्टर की बैटरी से लेकर इसकी बॉडी तक हर चीज अपने से ही बनाई और 7 माह के अपने कड़े प्रयत्‍न से वह अंत में इस ई-ट्रेक्‍टर को बनाने में सफल हो गये। शुरूआत के 4 माह उन्‍होंने इस ट्रेक्‍टर को केवल अपने अपने खेत में प्रयोग किया। फिर उसके बाद उन्‍होंने इसको पहचान दिलाने कि सोची। और उन्‍होंने अपने इस अविष्‍कार का नाम अपने पुत्र व्‍योम के नाम पर रखा।

इस ट्रैक्टर किे खूबियां

महेश अपने इस ई-ट्रेक्‍टर कि विशेषताओं के बारे में बताते है, कि उनका यह ट्रेक्‍टर सिर्फ एक बार चार्ज करने के बाद दस घंटे तक कार्य करता है। इसके अलावा वह कहते है कि उनका यह ट्रेक्‍टर 22 एच पी का पावर लेता है और जिसमें 72 वाट की लिथियम बैटरी भी लगी है। जोकि अच्छी क्वालिटी की बैटरी होती है। और यह जल्‍दी खराब भी नहीं होती है। और इसे बार-बार चेंज करने कि आवश्‍यकता भी नहीं होती।

आगे इसकी खासियत के बारे में बताते हुए महेश कहते हे, कि इस ट्रैक्टर को एक ऐप के साथ भी कनेक्‍ट किया जा सकता है। जिससे हमें इस ट्रैक्टर के बारे में सभी इन्‍फॉर्मेशन मिल जाती है। जैसे बैटरी कितनी बची है, इसके किसी पार्ट में खराबी तो नहीं है इत्‍यादि। महेश कहते है कि इस ट्रेक्‍टर को रिपेयर करना भी आसान है। इसमें रिवर्स गियर भी है। जो कि ट्रेक्‍टर के कही फस जाने पर उसे बाहर निकालने में मदद करता है।

महेश जी ने यह ई-ट्रेक्‍टर को आधुनिक टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करके बनाया गया है। ताकि किसानों किे दिक्‍कतों को कम किया जा सके। अगर इस ट्रेक्‍टर के इस्‍तेमाल से होने वाले मुनाफे की बात कि जाये, तो इस इलक्ट्रॉनिक ट्रैक्टर के खेती में उपयोग से केवल 15 रुपये प्रति घंटे खर्चा आता है। जबकि डीजल वाले ट्रेक्‍टर के उपयोग करने में 125 रूपये का खर्चा आता है। इस तरह यह ट्रेक्‍टर बहुत ही फायदा पहुँचाने वाला है। और यह किसानों के लिए बहुत ही मददगार सिद्ध होगा।

Money Presentation Image

अगर आप इस ट्रेक्‍टर को खरीदना चाहते है, तो शुरूआत में आपको थोड़ा ज्यादा पैसा खर्च करना होंगा। बाजार में मिलने वाले सामान्य ट्रैक्टर केवल 300000 कि कीमत में मिल जाते है। लेकिन यह ट्रेक्‍टर आपको अभी 500000 कि कीमत में मिलेगा।

अभी किे बात कि जाये तो उनका यह ट्रेक्‍टर लोगों के पास उपलब्‍ध नहीं है। लेकिन धीरे धीरे उन्‍हें ऑर्डर मिल रहे है और उनकी यह संख्‍या बढ़ती ही जा रही है। अभी गॉंव के लोग महेश का यह ट्रेक्‍टर देखने उनके खेत आते है।

महेश का इस तरह किसानों के बारे में सोचना और उनके लिए इस तरह का अविष्‍कार करना तारीफ के काबिल है। हम उनके इस कदम की सराहना करते है और उन्‍हें अपने इस नये इनोवेशन के लिए बधाई देते है।

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