यह घर गर्मी में भी AC जैसा ठंडा रहता है, इस प्राचीन तकनीक से गर्म हवा को घर के बाहर निकालते हैं

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Travancore Traditional Architecture
Kerala Home Uses Traditional Techniques to Eliminate Hot Air. Traditional architecture of a tiled roof house using wood Mangalore Tiles.

Photo Credits: Pinterest

Travancore: साल में चार मौसम होते है ठंडी, गर्मी, बरसात और बसंत लोगों को ज्यादातर गर्मी पसंद आती है, खास कर स्कूल के स्टूडेंट को, क्योंकि उनके स्कूल की छुटिया पड़ जाती है। परंतु कुछ लोगों को गर्मी बिलकुल पसंद नहीं आती, क्योंकि गर्मी की धूप और गर्म हवाएँ बहुत परेशान करती है और पक्के घर तो और गरमाते है। ऐसे में लोग काफी परेशान हो जाते है।

पुराने समय में मिट्टी के घर हुआ करते थे। उस समय न कूलर हुआ करते थे, न ही AC, फिर भी लोगो की गर्मी बहुत ही मजे से कटती थी, क्योंकि पुराने समय में पेड़ पौधे अधिक हुआ करते थे। सबसे खास बात की घर मिटटी के बनते और उन घर की छत छप्पर की बनी होती है, तो दीवारे सीमेंट की दीवार की तरह गर्म नहीं होती थी।

अब फिर से यह पारंपरिक छत और घर हमारे कल्चर में आ रहा है। आपको बता दें कि भारत के केरल राज्य के कोट्टायम की हरियाली से भरी पहाड़ियों के बीच त्रावणकोर वास्तुकला के मुताबिक बने इस घर में पैसिव कूलिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग हुआ है, जिससे खूब ज्यादा गर्मी में एसी की आवश्कयता नहीं पड़ेगी।

केरल राज्य के कोट्टायम में मैंगलोर-टाइल (छप्पर) से बने इस आलीशान बगले की सुंदरता देखते ही बनती है। 4-बेडरूम के साथ बने इस बंगले को इकोहाउस (Eco House) नाम दिया गया। इसको कुछ इस तरह से बनाया गया है कि यहाँ आपको भीषण गर्मी और धूप में गर्मी का अहसास भी नहीं होगा।

त्रावणकोर की पारंपरिक वास्तुकला (Travancore Traditional Architecture) अपने आप में ही एक कला है। इस बंगले में फ्री-फ्लोइंग स्पेस के साथ खूब बड़ी बड़ी खिड़कियाँ हैं। इस बंगले को बनाते वक्त मॉर्डन तरीके का पूरा ख्याल रखा गया है। साथ ही सूर्य प्रकाश के लिए घर के बाहर एक पोर्च डिज़ाइन किया गया है, जो घर की शोभा को और ज्यादा बढ़ा देता है

मैंगलोर टाइलें (Mangalore Tiles) या मैंगलोरियन टाइलें क्या होती है

ये टाइलें भारत के पश्चिमी तट पर स्थित पूर्व दक्षिण दिशा में केनरा जिले के मैंगलोर नामक शहर में इनका निर्माण किया गया हैं। इसी वजह से टाइल फैक्ट्री निर्माताओं ने उन्हें मैंगलोर टाइल्स नाम दिया गया।

South Indian Traditional Architecture Mangalore Tiles Demo Photo.

साधारणतया यह स्पेनिश और इतालवी में स्थित एक शैली का भाग है। टाइल्स को पहली बार साल 1860 में एक जर्मनमिशनरी के माध्यम से भारत में लाया गया यह टाइल्स कठोर लेटराइट मिट्टी से बनाई गई है और इन्ही लेटेराइट मिटटी से बने लाल टाइलों के साथ भारत में औद्योगिक क्षेत्र का विकास प्रारम्भ हुआ। इन टाइलों की मांग पूरे देश में बहुत तेजी से बढ़ी म्यांमार, श्रीलंका और सुदूर पूर्व और यहां तक ​​कि पूर्वी अफ्रीका, मध्य पूर्व इन टाइलों का निर्यात हुआ हैं।

अमृता का इको हाउस जहाँ गर्मी में भी AC की जरुरत नहीं होती

यह घर वहां के जलवायु के अनुसार खुद को पूरी तरह बदल लेता है और घर के कमरे स्वयं एक छोटा सी जलवायु का निर्माण कर लेती है। इस घर को अमृता किशोर ने डिज़ाइन किया है, जो स्थानीय और टिकाऊ वास्तुकला के लिए काम करती है और उन्हें बढ़ावा देती है साथ ही अमृता किशोर आर्किटेक्चरल फर्म एलिमेंटल की संस्थापक भी हैं। इकोहाउस में करीब 7,500 से 8000 लीटर रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिये सिस्टम बनाया गया है।

अमृत किशोर ने वर्ष 2016 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कालीकट और वर्ष 2018 में यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम की पढ़ाई की है अमृता के लिए यह घर बहुत ही विशेष है क्योंकि उन्होंने यह घर अपने माता पिता के लिए बनवाया है।

अमृता को वर्ष 2019 में रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स प्रेसिडेंट अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था यह उनके माता पिता के लिए बहुत ही गौरव की बात है। उन्होंने एक इंटरवियू में बताया कि मेरे माता-पिता ने केरल राज्य में अपना बचपन बिताया है और नौकरी के चलते उन्हें दुबई शिफ्ट होना पड़ा।

दोनों दुबई में अपनी जिंदगी ख़ुशी ख़ुशी बिता रहे हैं। परंतु अक्सर उन्हें घर की याद आती है। उनके माता पिता का सपना था कि उनका एक ऐसा घर हो जहाँ बड़ा सा आँगन बागवानी के लिए ढेर सारा स्पेस हो उनका यह सपना उनकी बेटी अमृत किशोर ने पूरा किया। इस घर का कंस्ट्रक्शन का काम साल 2018 में शुरू किया गया और एक साल में ही यह घर बन कर रेडी हो गया।

एक आत्मनिर्भर घर का उदाहरण है इको हॉउस

यह घर एक दम प्राकृतिक चीजों से बना है, जैसे पहले के समय में बना करते थे। इस घर में कुछ भी सजावटी नहीं है। घर को नैचुरल वेंटिलेशन से बनाया है। इस घर में गर्मीयों में एसी की आवश्कयता नहीं है। यहाँ पर सब्जी और फलो की बागवानी के लिए एक सेटअप बनाया गया है इसी लिए यह घर आत्मनिर्भर है।

अमृता किशोर ने इस घर के निर्माण में मैंगलोर टाइल्स और आग में पके हुए मिट्टी के ईंटों का इस्तेमाल किया है जो स्थानीय क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध होती है। अमृता ने बताया कि मैंगलोर टाइल लाल मिट्टी यानि लेटेराइट मिटटी की बनी होती है जो काफी मजबूत होता है और मैंगलोर टाइल्स के कारण ही गर्मी के मौसम में घर ठंडा और सर्दी के मौसम में घर गर्म होता है।

आग में पकी मिटटी की ईंट से घर की दीवारों को बनाया गया है, जो घर को ग्रामीण लुक प्रदान करता है और ईंट के कारण दीवार पर नमी का कोई विशेष असर नहीं पड़ता। यह घर रसोई घर की खिड़कियों से लेकर विंड टावर तक काफी खूबसूरत बना हैं। अमृता ने घर का अंदरूनी भाग का डिजाइन काफी अच्छा किया है।

धूप की वजह से घर का भीतरी भाग गर्म नहीं हो पाता

अमृता अपने घर की विशेषता बताते हुए कहती है कि छत की शेडिंग सामान्यतः 0.6 मीटर होती है, परंतु उसे हर तरफ से 1.5 मीटर तक बढ़ाया गया है। जो घर को पर्याप्त छाया प्रदान करता है और धूप घर के अंडर सीधे नहीं आ पाती।

पैसिव कूलिंग टेक्नोलॉजी के कारण अमृता ने बिजली की खपत और अन्य लागतों को नियंत्रित किया और बिजली बिल में लगभग 20 प्रतिशत तक की कमी हुई। यह घर सर्वसुविधा उक्त है घर में हरियाली, धूप और पर्याप्त हवा से मनुष्य लंबे समय तक रोग मुक्त रहता है।

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