
Mana: आज हम घूमेंगे उत्तराखंड (Uttarakhand) में स्थित भारतीय गॉंव माणा (Indian Village Mana) जिसे भारत का आखिरी गॉंव कहा जाता है। जो कि बद्रीनाथ से 4 किलोमीटर दूर उत्तर कि तरफ है। हमारे देश कि पहचान गॉंवों से है भारत में शहर कि जगह गॉंव में अधिक लोग निवास करते है, भारत में अनेक ऐसे गांव हैं, जिनसे कुछ न कुछ पौराणिक रहस्य जुड़े होते हैं।
कुछ इसी तरह एक गांव उत्तराखंड में भी है, जिसे ‘भारत का आखिरी गांव'(The Last Indian Village) कहा जाता है। यह गांव बद्रीनाथ से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो चीन की सीमा से लगा हुआ है। इस गांव का रिश्ता महाभारत काल (Mahabharata Era) से भी जुड़ा हुआ है और भगवान गणेश (God Ganesha) से भी।
मान्यता है कि इस गांव से होकर ही पांडव स्वर्ग गए थे। यह गॉंव पर्यटन गांव के रूप में जाना जाता है। यह गॉंव पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। आज हम आपको इस गांव से जुड़े ऐसे रहस्यमय और रोचक बांते शेयर करेंगे, जिसे सुन कर आप भी इस गॉंव में जाने के लिए आतुर हो जाएंगे।
माणा गॉंव जाने का सही समय
माणा गॉंव में सभी घर लकड़ी से बने हुए देखने को मिलते है। इस गांव की आबादी बहुत कम है। आपको यहां केवल 60 से 70 घर देखने को ही मिलेंगे। इस गांव का नाता महाभारत से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है की पांडव इसी गांव के रास्ते होते हुए स्वर्ग को गए थे।
#Saraswati roaring to date at Mana village Badrinath
Few kms from here She merges into river Alaknanda
Areas through which She flowed in the Thar,to date support lush green vegetation even during summers
Wells dug along Her buried course have sweet water at 30-40 m#WorldWaterDay pic.twitter.com/BvULEz5dYO— Saraswati Untold (@SaraswatiUntold) March 22, 2022
माणा गॉंव घूमने जाने के लिए सही समय मई से सितंबर का होता है। इस दौरान यहां हर साल बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं। क्योंकि इस समय बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के दर्शन भी खुलते है। इसलिए घूमने जाने के लिए सही समय मई से सितंबर का होता है। इस दौरान यहां हर साल बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं।
इस गॉंव में जाने से हो जाती है गरीबी दूर
माणा गॉंव को लेकर यह मान्यता है, कि जो भी इस जगह जाता है। उसकी गरीबी दूर हो जाती है, इस गांव को भगवान शिव का आशीर्वाद है। यह गाँव उत्तराखंड का चीन कि सीमा से लगा आखिरी गांव है। इसलिए बड़ी संख्या मे टूरिस्ट हर साल यहॉं आते है।
सूर्यदेव की स्वर्णिम किरणों से प्रदीप्त भारत का अंतिम गॉंव माणा !!
माणा गॉंव उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में सरस्वती नदी के तट पर बसा भारत-चीन सीमा का अंतिम गॉंव है।
३२०० मीटर की ऊॅंचाई पे स्थित इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता अतुलनीय है।
ॐ सूर्यदेवाय नमः 🙏#DekhoApnaDesh 🇮🇳 pic.twitter.com/eLUDEOJR8f
— Lakshmi Trivedi🚩🚩🕉️ (@TrivediLakshmi) February 6, 2022
इस गॉंव कि एक और पौराणिक कथा प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां पर माणिक शाह (Manik Shah) नाम का एक व्यापारी रहता था। जो भगवान शिव का बड़ा भक्त था। कहते है कि वह व्यापार के सिलसिले में कहीं जा रहा था। इसी दौरान लुटेरों ने उसका सिर का-टकर ह-त्या कर दी।
इसके बावजूद उसकी गर्दन शिव का जप करने लगी। उसकी श्रद्धा देखकर भगवान शिव बहुत प्रसन्न हुए और उसके सिर पर वराह का सिर लगा दिया। भगवान शिव ने मणिक शाह को वरदान दिया कि जो भी माणा गांव आयेगा, उसकी गरीबी दूर हो जाएगी और वह अमीर हो जाएगा। तब से ही यहां पर मणिभद्र (Manibhadra) की पूजा होती है।
माणा गांव कि विशेषता
नीलकंठ चोटी (Nilkantha Peak) माना गांव के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। यह चोटी ‘गढ़वाल की रानी’ के रूप में भी जानी जाती है। जब आप माणा गांव से थोड़ा ऊपर की और चलते है, तो आपको कुछ जगह नज़र आती है।
सबसे पहले व्यास गुफा और उसके बाद गणेश गुफा, यहां पर सरस्वती नदी पर एक भीम पुल भी बना हुआ है और यह वो सरस्वती नदी है, जो केवल यही तक दिखाई देती है। इसके आगे यह अदृश्य हो जाती है। कहा जाता है, यहां पे स्थित व्यास गुफा (The Cave of Veda Vyasa) में ऋषि वेद व्यास जी ने महाभारत की रचना की थी।
गणेश गुफा
यहां पास में ही गणेश गुफा (Ganesh Cave In Mana Village) भी है। जिसमे बैठ कर गणेश भगवान ने यह सारे वेद पुराण और महाभारत लिखे थे। गणेश गुफा के बारे में कहा जाता है, की जब गणेश जी वेद लिख रहे थे। तब सरस्वती नदी काफी तेज़ गति से बह रहीं थी और बहुत शोर कर रही थी। तब गणेश जी ने सरस्वती नदी से कहा की शोर थोड़ा कम करे मेरे कार्य में विघ्न पड़ रहा है।
माता मूर्ति
यहा पर स्थित माता मूर्ति मंदिर भगवान नारायण की मां को समर्पित है। लोक कथाओं के अनुसार, माता मूर्ति ने भगवान विष्णु से अपने पुत्र के रूप में जन्म लेने का अनुरोध किया था। जिसके बाद भगवान विष्णु ने नारायण के रूप में जन्म लेकर माता मूर्ति की इच्छा पूरी की थी। इस जगह पर मेला भी लगता है।
भीम पुल
उत्तराखंड के माणा गॉंव में महाभारत काल का बना हुआ एक पुल आज भी मौजूद है। जिसे ‘भीम पुल’ (Bheem Pul) के नाम से जाना जाता है। लोगों का मानना है, कि जब पांडव इस गांव से होते हुए स्वर्ग जा रहे थे, तो उन्होंने यहां मौजूद सरस्वती नदी से आगे जाने का रास्ता मांगा था। लेकिन सरस्वती नदी ने मार्ग देने से मना कर दिया था। जिसके बाद महाबली भीम ने दो बड़ी-बड़ी चट्टानों को उठाकर नदी के ऊपर रख दिया था और अपने लिए रास्ता बनाया था। इसके बाद इस पुल को पार करके पांडवों ने स्वर्ग गये थे।
व्यास गुफा
माणा गांव में व्यास गुफा भी है, जिसके बारे में मान्यता है, कि यहां महर्षि वेदव्यास रहा करते थे। यहीं पर उन्होंने कई वेद और पुराणों की रचना की थी। व्यास गुफा की ऊपरी संरचना को देखकर ऐसा लगता है, जैसे ग्रंथ के कई पन्नों को एक के ऊपर एक रखा गया है। इसी वजह से इसे ‘व्यास पोथी’ भी कहा जाता है।
सुंदर पहाड़ , झरने जहां वेदव्यास ने लिखा था "व्यास पोथी" महाभारत भारत की अंतिम चाय की दुकान और सरस्वती नदी
बद्रीनाथ धाम से तीन किलोमीटर आगे माणा गांव (मणिभद्रपुरम) में भारत की आखिरी चाय की दुकान है।#माणा_गांव pic.twitter.com/hNXd1ZUBQh
— Dilip Kumar Singh (@DilipKu24388061) November 15, 2021
ऐसा मानना है कि ये पुस्तक वर्षों के बाद पत्थर में परिवर्तित हो गई। इसी तरह कई तरह की मान्यताएँ भी इस गॉंव से जुड़ी हुई है। जिसे सुनकर आपका मन भी इस गॉंव को घूमने का कर रहा होगा।
भारत के आखिरी चाय की दुकान (The Last Tea Shop Of India) पर चाय का स्वाद आवश्य ले
पर्यटकों के लिए ये चाय की दुकान बहुत ही पसंदीदा है और ये सबके लिए PHOTO लेने का एक उत्तम स्थान है। यहाँ की चाय बहुत ही स्वादिष्ट है। आपको बता दे कि आप माणा गांव हवाई जहाज से, ट्रेन से, रोड से, जा सकते है। यहॉं ठहरने के लिए कई होटल भी है। आप जून से सितम्बर के समय इस जगह विजिट कर सकते है, यह समय यहॉं घूमने के लिए सबसे सही होता है।



