
Bhind: मध्यप्रदेश जिसे भारत का ह्रदय प्रदेश और मंदिरों का गढ़ और बाघों की राजधानी कहा जाता है। मध्यप्रदेश में 10 संभाग और 52 जिले है। मध्यप्रदेश के उत्तर में चंबल संभाग है जिसके अंतर्गत 6 जिले आते है, शिवपुरी, दतिया, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना और भिंड इस संभाग के 2 जिलों को बागियो का गढ़ कहा गया। यहाँ पुरुष डकैतों के साथ साथ महिला डकैत भी रही है।
चंबल नदी (Chambal River) की कलकल बहती धारा और वहां का मीलों तक फैले बीहड़ में सरसराती हवा का अहसास कुछ अलग ही था। यहां जब-जब जुल्म हुआ, तब-तब लोग आक्रोश में आकर बागी हो गए। यहाँ पर पुरूष के साथ साथ महिलाओं ने भी अपने ऊपर हुए जुल्म का बदला लिया। पुतलीबाई, फूलन देवी से लेकर कोमेश तक का लंबा सफर रहा है।
कई साल पुराने इस बीहड़ का रिश्ता बागियों से काफी पुराना और काफी गहरा रहा। लेकिन बागियों ने यहां सिद्वांतों से अपना परिचय दिया परंतु और दुस्यो ने इसे बदनाम कर दिया। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 7 जिलों में करीब 2.19 लाख हैक्टेयर में यह बीहड़ फैला है।
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— Hemant (@myobservation) September 12, 2021
यहाँ के डाकुओं के खिलाफ तीनों प्रदेश की पुलिस हमेशा कार्रवाई करती आ रही है, लेकिन बीहड़ (Bihad area) बागी और बंदूक का रिश्ता कभी खत्म नहीं हुआ। फ़िलहाल वर्तमान में यहाँ कोई बड़ा डकैत नहीं हैं। इस लिए अभी चंबल में अमन और शांति बनी हुई हैं। यहाँ शांति स्थापित करने में एसपी राहुल प्रकाश व राजेश सिंह ने अहम् भूमिका निभाई।
जब भी जुल्म हुआ, उसका जवाब हमेशा बन्दुक से दिया
चंबल के बीहड़ों में महिला डकैतों ने भी समय पर अपनी उपस्थिति दी है। साथ ही बीहड़ उन महिला डकैतों की दहशत से थर्रा उठता था। यहाँ की पहली महिला डाकू मुरैना (Morena) जिले के अम्बाह के गांव रूअर बसई इलाके की पुतलीबाई थी। इसके बाद फूलन देवी बागी हुई।
इन्होंने 14 फरवरी 1981 को 21 लोगो को गोली मा-रकर सुला दिया था। बाद में वह सपा से टिकट पर सांसद चुनी गई। इसके बाद सीमा परिहार, मुन्नी परिहार, कल्पना सोलंकी, कोमेश आदि महिला बागी हुई। और पुरुषों में मलखान सिंह, सुल्ताना, निर्भय सिंह गुर्जर, जगजीवन परिहार, पान सिंह तोमर, जगन गुर्जर आदि सैकड़ों नाम शामिल हैं।
बीहड़ पर कई फिल्म बनी
फिल्मकारों ने भी चंबल के बीहड़ और वहां के डकैतों की कहानी पर गहरा प्रभाव डालते हुए फिल्में बनाई हैं। अब तक कई डकैतों पर फिल्म भी बनाई जा चुकी हैं। इनमें पुतलीबाई, सुल्ताना, पान सिंह तोमर, फूलन बाई के साथ अन्य डकैतों के जीवन पर फिल्म बनी। इसके अलावा अन्य कई फिल्मों के दृश्य भी चंबल बीहड़ में बनाए गए हैं।
ब्रिटिश जमाने के थाने को हेरिटेज लुक देकर लिखा जा रहा इतिहास
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भिंड (Bhind) जिले की पुलिस ने अपराध की तरफ बढ़ने वाले कदम को रोकने के लिए और अपराधियो को सबक देने के लिए एक शुरुआत की। चंबल के बागियो की समाप्ति और उनके समाज के प्रति मिलनसार होने की कहानी को पुलिस एक म्यूसियम के जरिये से बताना चाहती है।
इस लिए कुख्यात डाकू मोहर सिंह के कर्मभूमि मेहगांव में ब्रिटिश कालीन एक पुराना थाना है। उस थाने को म्यूसियम के लिए चुना गया। इसके लिए ब्रिटिश जमाने के थाने को हेरिटेज लुक दिया जाएगा, फिर वर्ष 1960 से लेकर 2011 तक चम्बल में सक्रिय रहे डाकुओं की पूरी दास्तान दीवारों पर लिखी जाएगी और उनके द्वारा इस्तेमाल किये गए हथि-यारों को भी दिखाया जाएगा। डाकुओं के साथ उन पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के बारे में भी लिखा जाएगी, जो चंबल के डकैतों के साथ मुठ-भेड़ में मारे गए।
म्यूसियम के लिए जनभागीदारी और पुलिस प्रशासन जुटाएगा फण्ड
एसपी मनोज सिंह बन रहे म्यूसियम के बारे में बताते हुए कहते है कि म्यूसियम निर्माण के लिए धन राशि जनभागीदारी और पुलिस फंड से ली जाएगी। चंबल में 1980 से लेकर 1990 के तक कई डकैतों ने स्वयं को पुलिस के हाथों में दे दिया। इनमें फूलन देवी, घंसा बाबा, मोहर सिंह, माधो सिंह शामिल है।
समर्पण के बाद इन डकैतों ने सजा काटी और रिहा हो होकर समाज में घुल मिल कर रहने लगे। फूलन देवी (Fulan Devi) ने अपनी रिहाई के बाद सांसद का चुनाव लड़ा और वह सांसद चुनी भी गईने एसपी मनोज कहते है, इस म्यूसियम का उद्देश्य मुजरिमो को उनकी गलती का अहसास कराना है और नेक पथ पर लाना है।



