इंदौर में सब्जी बेचने वाले की बेटी जज बन गई, तीन बार असफल होकर भी नहीं मानी हार, मिली सफलता

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Ankita Nagar Civil Judge MP
Indore Vegetable Vendor's Daughter Ankita Nagar Becomes Civil Judge Overcoming All Odds. cleared the civil judge examination in her fourth attempt.

Photo Credits: ANI on Twitter

Indore: मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश की जाए तो कोई भी लक्ष्य पाना असंभव नहीं होता है। फल की चिंता किये बिना की गई मेहनत का फल बहुत जल्द और बहुत मिठा होता है। जिस भी शख्स में कुछ कर दिखाने का जज़्बा होता है। वो करके ही दम लेता है। अपर्याप्त सुविधा कभी भी हमारे लक्ष्य में रूकावट नहीं बनती, जब तक जीवन में आभाव नहीं रहेगा, तब तक जीवन में कोई लक्ष्य ही नहीं रहेगा।

आज हम मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) शहर की उस बेटी की बात कर रहे है। जिसके पिता सब्जी बेच कर अपने परिवार का भरण पोषण करते है। उस परिवार की बेटी सिविल जज के लिए चयनित हुई है। संघर्ष की आंच में लोहे की तरह तप कर यह सफलता प्राप्त की है।

इन्होने बताया कि न्यायाधीश भर्ती परीक्षा (Civil Judge Examination) में 3 बार असफल हुई फिर भी अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। हर बार प्रयास किया और आज उन्होंने अपना लक्ष्य प्राप्त किया। आइये आज इंदौर की इस बेटी के बारे में जानते है, कैसे अपना लक्ष्य प्राप्त किया और कैसे सफल हुई।

पिता के साथ उनकी मदद करने के बाद करती थी पढ़ाई

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के मुसाखेड़ी इलाके में रहने वाली अंकिता नागर (Ankita Nagar) और उनके पिता अशोक नागर सब्जी का ठेला लगाकर अपना परिवार पालते हैं। उनकी बेटी अंकिता को सिविल जज चयन परीक्षा में एससी कोटे से चुना गया। उनको इस परीक्षा में पांचवा स्थान प्राप्त हुआ।

अंकिता नागर ने बताया कि, उन्होंने यह सफलता बहुत ही परिश्रम के बाद हासिल की है। अंकिता अपने माता-पिता के साथ सब्जी की दुकान में उनकी मदद करती थी। इन सबके बाबजूद उसने अपने होसलो को कम नही होने दिया। अपने मजबूत हौसलो और जुनून के साथ पढ़ाई करती थी। रात के समय जब सब सोते थे, तब वह पढ़ती थी।

उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए रोज 8 से 10 घंटे का समय दिया। उनके अथक प्रयास और कड़ी मेहनत से आज उन्हें चौथे प्रयास में सफलता मिली। पिछली 3असफलता ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। 3 बार असफल होने जे बाद भी उन्होंने अपने जुनून को कम नही होने दिया।

अंकिता (Vegetable Vendor’s Daughter Ankita Nagar) ने बताया कि वह बचपन से ही कानून की पढ़ाई करना चाहती थीं। उन्होंने एलएलबी (LLB) की पढ़ाई के चलते ही सोच लिया था कि उन्हें न्यायाधीश बनना है।

माता पिता और भाई ने बढ़ाया हौसला

अंकिता नागर ने बताया कि उन्होंने अपने चौथे प्रयास में व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-दो भर्ती परीक्षा पास कर ली है और वह न्यायाधीश बन गई। वह कहती है कि मेरे पास अपनी खुशीयों को जाहिर करने के लिए शब्द नहीं हैं।

अंकिता ने बताया कि इस कामयाबी के लिए आर्थिक परेशानियों के साथ कई अन्य परेशानियों को भी झेला है। परंतु उनके माता पिता और भाई ने हमेशा उनको हौसला दिया। उनके उड़ान को पंख दिया। जब जाकर उन्हें यह सफलता मिली है।

अंकिता का कहना है, बड़े शहरों में परिवार के हर सदस्य को काम करते करना पड़ता है, तब जाकर परिवार चल पाता है। पढ़ाई के लिए परिवार के सभी सदस्यों ने मदद की तब यह सफलता मिली और यह सफलता केवल उनकी नहीं है बल्कि पूरे परिवार का सहयोग और प्रयासों का फल है।

हर व्यक्ति के साथ किया जाएगा न्याय

आत्मविश्वास से भरी 29 वर्षीय अंकिता ने कहा, न्यायधीश (Judge) पद के सारे कर्त्तव्य पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाऊंगी अंकिता कहती है। 3 बार असफल होने के बाद मेने कभी हार नहीं मानी और मैं अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए तैयारी में जुटी रही।

इस संघर्ष (Struggle) के दौरान मेरे लिए रास्ते अपने आप बनते गए और में उस रास्ते में चलती रही। अंकिता नागर कहती है कि व्यवहार न्यायाधीश के पद पर काम शुरू करने के बाद उनका पूरा ध्यान इस बात पर रहेगा कि उनकी अदालत में आने वाले हर व्यक्ति को इंसाफ मिले और किसी के साथ अन्याय न हो सके।

पिता का गुरुर है बेटी

अंकिता के न्यायाधीश भर्ती परीक्षा में सफलता करने के बाद पिता अशोक नागर गर्व से सीना चौड़ा किये कहते है कि मेरी बेटी समाज, परिवार, रिश्तेदार और असफल होने के बाद अपने लक्ष्य से विचलित होने वाले छात्रों के लिए एक मिसाल पेश की है।

उसने जीवन में कड़े संघर्ष और काफी सारी परेशानी झेलनी के बाद भी कभी हार नहीं मानी और परिवार के सपने को पूरा करने के लिए दिन रात संघर्ष किया और सफल हुई। मेरी बेटी ने जो सोचा उसे उसने कर दिखाया समाज में बेटी को बोझ कहने वालों के लिए यह सबसे अच्छा उदाहरण है। अंत में अशोक नागर कहते है, बेटियां बोझ नहीं सिर का ताज होती है।

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