आज ही भर दें बैंक में नॉमिनी फार्म, यह नियम फॉलो नहीं किया, तो बैंक में जमा पैसे फस सकते हैं

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Nominee and Nomination
Everything You Should Know About Nominee and Nomination in Hindi. Why you should have a nominee for your bank account. Its very important.

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Bhopal: किसी व्‍यक्‍ति के गुजर जाने के बाद उसके बैंक खाते में जमा पैसों पर किसका हक होता है, आइये जानते है बैंकों के कुछ नियम, कहां जाता है पैसा, किसका होता है उन पैसों पर अधिकार। एक व्‍यक्‍ति मेहनत करके दिन-रात पसीना बहा कर पैसे कमाता है। उन पैसों में से कुछ वह अपने दैनिक कार्य में खर्च करता है और अपना जीवन व्‍यतीत करता है।

पैसों को खर्च करने के बाद बचे पैसों को व्‍यक्‍ति बैंक में जमा करना पसंद करता है। क्‍योंकि बैंक में हमारा पैसा सुरक्षित रहता है। हम जब चाहे बैंक में पैसा जमा भी कर सकते है एवं निकाल भी पाते है। बैंक में पैसे सु‍रक्षित रहने के साथ-साथ मुनाफा प्राप्‍त करने का भी साधन बन जाता है।

बैंक हमें जमा पैसों पर ब्‍याज भी देती है, जो कि हमारे लिए एक एक्‍स्‍ट्रा इनकम हो जाती है। लेकिन ऐसा समय आये, जब बैंक खाते के मालिक का देहांत हो जाये, तब बैंक में उसका जमा पैसा कहा जाता है। क्‍या वह पैसा बैंक वाले रख लेते है।

क्या कहता है बैंक का नियम

आइये बैंक के कुछ नियमों को जानते है एवं उन नियमों को समझने की कोशिश करते है। एक व्‍यक्‍ति जब मर जाता है तो उसके बैंक में जमा पैसे कहां जाते है। इसके संबंध में बैंक के तीन नियम होते है।

व्‍यक्‍ति का खाता अगर जुड़ा हुआ खाता है। तो बैंक का जमा पैसा उस दूसरे व्‍यक्ति को मिलते है, जिसका नाम उस बैंक खाते में होता है। सामान्‍य जीवन में हम देखते है कि पति पत्‍नि अपना बैंक खाता ज्‍वांइट करवाते है। ताकि आगे चल कर उन्‍हें कोई दिक्‍कत का सामना ना करना पड़े।

जॉइंट अकाउंट में होती है आसानी

अगर दोनो में से किसी एक कि मृत्‍यू हो जाती है, तो खाते का पैसा दूसरे व्‍यक्‍ति को मिल जाता है। यह प्रक्रिया बहुत ही आसान होती है। दूसरे व्‍यक्ति को सिर्फ मृत व्‍यक्‍ति का नाम अकाउंट से अलग करवाना होता है। इसके बाद खाते का पैसा उस दूसरे व्‍यक्‍ति को मिल जाता है।

जब भी हम बैंक में खाता खुलवाने जाते है। तब हमसे बैंक वाले एक फॉर्म भरवाते है। उस फॉर्म में हमारी कुछ व्‍यक्‍तिगत जानकारी होती है। इसके अलावा इस फॉर्म में हमसे नॉमिनि (Nominee) का नाम पूछा जाता है। हम आपको बता दें कि नॉमिनि वह व्‍यक्‍ति होता है। जो कि उस व्‍यक्‍ति कि मृत्‍यू के बाद उसके पैसों का हकदार होता है।

बैंक अकाउंट में नॉमिनी को वारिस माना गया है

जिस तरह घर की वसीयत में घर के वारिस का नाम होता है, ठीक उसी तरह बैंक में नॉमिनी होता है। व्‍यक्ति के गुजर जाने के बाद बैंक में जमा सारा पैसा, उसके नॉमिन‍ि को मिल जाता है।

नॉमिनि को पैसे देने से पहले बैंक वाले मृत व्‍यक्ति के डेथ सर्टिफिकेट की जांच करता है। उसके बाद बैंक में दो गवाह भी पेश करने होते है। जो यह कन्‍फर्म करते है कि बैंक फार्म में लिखा नॉमिनि यही व्‍यक्‍ति है। इसके बाद ही वह पैसा नॉमिनि को मिल पाता है।

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अगर बैंक का खाता ज्‍वांइट ना हो और नॉमिनि में भी किसी का नाम मेंसन ना हो तो इस स्थिति में बैंक हमें एक और अवसर देती है। उस पैसों के हकदार बनने का। परन्‍तु यह प्रक्रिया बहुत ही लंबी और कठिन होती है।

जिसे भी मृत व्‍यक्ति के पैसों का हकदार बनना होता है। उसे सक्‍सेशन सर्टिफिकेट (Succession Certificate) बैंक में जमा करना होता है। अगर सारी चींजे सही पाई जाती है। तब ही उस व्‍यक्‍ति को मृत व्‍यक्ति का वारिस माना जाता है एवं खाते के सारे पैसे उस व्‍यक्ति को मिल जाते है।

उत्तराधिकारी (सक्‍सेशन) सर्टिफिकेट कि बात कि जाये तो यह वह प्रमाणपत्र है जो यह फ्रूफ करता है। कि जो व्‍यक्‍ति मर चुका है। उसके पैसे पर उसके वारिस का अधिकार है। सक्‍सेशन सर्टिफिकेट किसी व्‍यक्ति को उत्‍तराधिकारी बनाने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक डॉक्‍यूमेंट होता है। यह थे बैंक से जुड़े कुछ नियम जिन्‍हें जानना हमारे लिए बहुत आवश्‍यक है। आज हमने इन नियमों को जाना एवं समझा जिनके बारे में जानना हमारी लाइफ में बहुत जरूरी हैै।

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