
Photo Credits: Instagram
Surat: यह कहावत तो पुराने दौर से चली आ रही है कि बेटियां माँ की परछाई होती है। आज हम बात करने जा रहे है, ऐसी ही दो बहनों की, जिन्होंने अपनी माँ के पसंदीदा काम से अपना एक बहुत विशाल व्यापार शुरू किया।
लगन से किया गया काम कभी विफल नहीं होता और किसी काम को शुरू करने के लिए सब चीज़ का होना भी जरुरी नहीं होता काम साधन से भी बहुत अच्छा काम किया जा सकता है। जिसमे कुछ कर दिखने का हुनर होता है, उसके लिए आभाव बहाना नहीं होता, यही जज़्बा उन दो बहन और उनकी माँ में था।
इंडियन एथनिक कंपनी (The Indian Ethnic Company) की को फाउंडर लेखनी देसाई ने उनकी छोटी बहन हेतल देसाई (Hetal Desai) और माँ के साथ अपने घर से भारतीय हथकरघा और हस्तशिल्प के व्यापार को वर्ष 2016 में शुरू किया और आज उनका व्यापार उनकी पहचान बन गया है। अब इन्हे किसी और के नाम के सहारे की जरुरत नहीं है।
व्यापार का सफर जानें
माँ बेटियों की इस जोड़ी ने इस व्यापार को छोटे स्तर से शुरू किया और आज 15 करोड़ का व्यापार कर रही है। इनकी शुरुआत मुम्बई के फ्लैट के छोटे से कक्ष से साल 2016 में हुई। इन्होंने अपना कार्य मात्र 50 हजार रूपए के निवेश से किया। लेखनी देसाई कहती है कि उन्होने बचपन से लेकर आज तक कोई भी कपड़े कही बाहर से नहीं ख़रीदा। उनकी माँ ने उनके लिये और उनकी छोटी बहन हेतल देसाई के लिए कपड़े स्वयं बनाये।
उनको कपड़े बनाने का शौक बहुत पहले से ही था। बदलते समय में हर रोज फेसन बदल रहा है, परंतु भारतीय परंपराओं के प्रति लगन के कारण दोनों बहनों ने अपने माँ के द्वारा बने कपड़े को पहना इसका सीधा अर्थ यह निकलता है कि लेखनी देसाई और हेतल देसाई की माँ का हुनर बहुत ही प्रभावशाली है।
वह इस कला की देवी है, जिनको हर तरह से काम करना आता है। कभी अपने होसलो को कम नही देती। हर परिस्थिति का डट कर मुकाबला करती है। यही कारण है आज वो सफल इसनो में गिनी जाती है।
किस तरह निकला व्यापार करने का तरीका
अब व्यापार फैलाना था, तो सोशल मीडिया की मदद से उन्होंने अपने व्यापार को बढ़ाने का मन बनाया। एक आश्चर्य की बात यह है कि ना माँ, ना बेटी किसी ने भी कोई ऐसा कोर्स नहीं किया हुआ था, परंतु उनकी माँ इस काम में निपुण थी।
New Luxurious Sanganeri Sarees are now live on our website!
Shop here – https://t.co/kyKEgvD0E8#sustainability #sustainable #Indianethnicco #indianwear #sareelover #sareelove #sareeswag #sanganer #chanderisilk #silksaree #Handblock #indiancrafts #indianart #indianweave pic.twitter.com/mWlTbmpusR— The Indian Ethnic Co. (@TheIndianEthnic) May 13, 2021
लेखनी जी कहती है कि उन्होंने कभी स्टोर से बने हुए कपडे नहीं ख़रीदे, क्योंकि सारे लिवास उनकी माँ ने उनको बना कर दिए। इसी से उनके दिमाग में यह आईडिया आया और पर्याप्त पूंजी से अपना व्यापार शुरू किया।
सोशल मीडिया से लोगों की बदलती जिंदगी की कहानी तो काफी सुन रखीं है, लेकिन किसी व्यापारी के लिए सोशल मीडिया कितना असरदार माध्यम सिद्ध होगा, इसकी कल्पना लेखिनी और उनकी कंपनी की कामयावी को देखकर लगा सकते है।
#UpdateOurLogo pic.twitter.com/r0Xw7Ua50c
— The Indian Ethnic Co. (@tiecsurat) January 25, 2022
लेखिनी देसाई (Lekhinee Desai) ने एनएमआईएमएस से मार्केटिंग में MBA किया हुआ है। वहीं, हेतल ने एमएस विश्वविद्यालय बड़ौदा से गृहविज्ञान में मास्टर्स की पढ़ाई की है। परंतु, फैशन और इंडियन कल्चर के प्रति लगाव ने उन्हें हमेशा इस ओर बढ़ने के लिए मोटीवेट किया।
Beautiful 😍👏 pic.twitter.com/63kPe3s6U3
— Geetanjali (@geetanjali_chd) March 5, 2021
इसके बाद दोनों बहनों ने अपनी मां के हुनर (Mother’s Skill) को दुनिया के सामने लेकर आई । जब इन्होंने व्यापार शुरू किया, तो इनके पास बहुत अच्छी व्यवस्था नहीं थी, परंतु यह परिस्थिति उनके सपनों के आड़े नहीं आई। एक बार और यह सिद्ध होता है की महिला किसी क्षेत्र में पीछे नहीं है।



