शख्स को सरकारी नौकरी नहीं मिली, तो इस खास बेर की खेती की, अब सालाना 20 लाख रूपए कमाई हो रही

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Thai Apple Ber farming
Shankar Lal Meena started Thai Apple Ber farming and earning 20 lac. He works at Shiv Shankar Krishi farm and Nursery in Jaipur.

Jaipur: कभी भी एक असफलता से हारकर नहीं बैठना चाहिए, बल्कि कुछ न कुछ करते रहना चाहिए। शंकर लाल मीणा (Shankar Lal Meena) एक ऐसे युवा की कहानी है, जिसने अपनी असफलता से निराश होने के बजाये, आगे बढ़ने में यकीन किया और खुद को संभालकर दूसरे काम को सफल बनाया।

राजस्थान के जयपुर ज़िले के कोटखावदा के पास रूपाखेड़ी के शंकरलाल मीणा ‘थाई एप्पल बेर’ (Thai Apple Ber) की खेती कर रहे है। इससे उनको हर साल 20 लाख रु तक कमाई हो रही है। अपनी सफलता के बाद उन्होंने 300 अन्न किसानो को भी बेर के बगीचे लगवाने में मदत की है।

एक सपने में मिली असफलता

शंकरलाल से इससे पहले बहुत संघर्ष किया था। उन्हीने लगातार 4 साल सरकारी नौकरी पाने के लिए सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी की थी। इसके अलावा कई सरकारी पोस्ट के लिए एग्जाम दिए, परन्तु उनका कही भी उनका चयन नहीं हो सका।

सरकारी नौकरी (Government Job) की तैयार के दौरान उन्हें पूरे देश में हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट देखने का मौका मिला। ऐसे में उन्होंने थाई एप्पल बेर की खेती के बारे में भी जाता था। उनके दिमाग में इस कहस बेर की खेती का विचार पहले से ही था।

शिव शंकर कृषि फार्म शुरू किया

शंकरलाल ने कुछ साल पहले (करीब 5 साल) बंगाल से इस पैर के पौधे मंगाए और थाई एप्पल बेर की खेती शुरू की। थोड़ी मेहनत के बाद अब उनके फार्म हाउस राजस्थान के जयपुर का सबसे बड़ा बगीचा (Shiv Shankar Krishi farm) बन गया है। उन्होंने बेर का बगीचा लगाने के बाद खुद ही एक नर्सरी भी तैयार की। वे बेर के बगीचे लगवाने में अन्न किसानो की मदद भी कर रहे हैं।

शंकरलाल का सपना वैसे तो सरकारी नौकरी पाने का था, लेकिन वे अपने संस्कारों की वजस से खेती से भी जुड़े रहे। बाद में उन्होंने खेती करने का फैसला किया, तो उनके खेत में पानी खत्म हो गया था। कम पानी उपलब्ध होने के चलते उन्होंने एप्पल बेर की खेती (Apple Ber Ki Kheti) करने का मन बनाया।

अपने क्षेत्र में पहले ऐसे किसान बने

उन्होंने पश्चिम बंगाल (West Bengal) से थाई एप्पल बेर के पौधे मंगवा लिए। एक साल की मेहनत के बाद अब हर साल बेर का अच्छा उत्पादन हो रहा है। उन्होंने एक अख़बार को बताया की वे इस बेर की खेती करने वाले अपने क्षेत्र में पहले किसान है इस बेर की खेती में कम पानी की जरुरत होती है। इसकी फसल को बहुत ज्यादा देखभाल की भी जरुरत नहीं होती।

इसकी खेती (Apple Ber Farming) करने में कम देखभाल व कम लागत मे अधिक उत्पादन होने के कारण इसकी मांग बढ़ रही है। फल बड़े आकार के होने के कारण तुड़ाई करने में आसानी रहती है। यदि एप्पल बेर के पौधे को खेत में एक बार लगा दिया जाए, तो हर साल उत्पादन लिया जा सकता है। इसके फल में खनिज लवण, फॅास्फोरस एवं विटामिन सी प्रचूर मात्रा में पाए जाने के कारण बहुत लाभकारी होता है।

यह फल देखने में सेब जैसा और खाने मे बेर जैसा होता है

थाई एप्पल बेर जैनेटिक बायो प्लान्ट सिस्टम द्वारा तैयार किया गया है, जिसका फल सेब जैसा दिखाई देता है और खाने मे बेर जैसा स्वाद होता है। भारत मे इसे थाईलैण्ड (Thailand) से लगभग 10 साल पहले ही लाया गया है।

यह फल देखने में सामान्य बेर की अपेक्षा काफी बड़े होते है। थाई एप्पल बेर के एक फल का वजन 40 ग्राम से लेकर 120 ग्राम तक होता है। थाई एप्पल बेर में रोग प्रतिरोधक क्षमता उतनी ही होती है जितनी कि एक सेब फल की होती है।

इस खेती में कमाई (Earning) भी अच्छी खासी है। इसका पौधा एक साल का होने पर लगभग 20 से 25 किलों फल उत्पादन करता है। इसके बाद हर साल 50 से 100 किलो तक फल देने लगता है। यह पौधा लम्बी आयु का होता है, जो लगभग 50 वर्ष तक बना रहता है। बाज़ार में इस बेर का भाव ग्रेडिंग के मुताबिक 20 रु से 50 रु किलो तक रहता है। ऐसे में किसान सीजन के हिसाब से अच्छी कमाई कर लेते हैं।

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