मुकेश अम्बानी ने इस चालाकी से जेफ़ बेज़ोस को पछाड़कर बिग बाजार को अमेज़न से हासिल किया

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Reliance Big Bazaar
How Reliance stunned Amazon in battle for India's Future Retail in Hindi. Reliance Retail to set up own stores in Future's locations, launch soon.

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Delhi: भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय व्यवसाई मुकेश अम्बानी (Mukesh Ambani) का रुतबा है। उनकी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited) ने कई बड़े और छोटे बिज़नेस में अपनी पकड़ बना ली है। वे अब भी अपने बिज़नेस एम्पायर के विस्तार में लगे हुए है। अब Amazon.com Inc. भी उन कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो गयी है, जिसे मुकेश अंबानी की चतुराई का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने भारत के रिटेल मार्केट (Indian Retail Market) सेगमेंट पर अपना दबदबा बनाने की व्यापारिक जंग में बड़ी अमेरिकी कंपनी (American Company) को भी पछाड़ दिया है, बल्कि अब उनके पास खुदरा विक्रेता को खरीदने के लिए 3.4 बिलियन डॉलर का पावर कार्ड हैं। अब मुकेश अंबानी की ताकत और बढ़ गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स बताती है की फरवरी के आखिर दिनों में अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने गुपचुप तरीके से कर्मचारियों की भर्ती शुरू कर दी थी और फ्यूचर रिटेल लिमिटेड और फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशन लिमिटेड द्वारा चलाए जा रहे सैकड़ों स्टोरों के लीज एग्रीमेंट पर अपना हक़ जमा लिया था।

रिपोर्ट्स बताती है की अमेज़ॅन ने भारत और सिंगापुर से मुकदमों और मध्यस्थता के ज़रिये औपचारिक अधिग्रहण को रोकने के प्रयास भी किये थे। मुकेश अंबानी के इस कदम ने अमेज़ॅन (Amazon) को समझौता करने के लिए विवश कर दिया और भविष्य के निवेशकों और ऋणदाताओं को संपत्ति-विपणन से आगाह भी किया।

आपको बता दें की फ्यूचर रिटेल के चीफ फाइनेंसियल ऑफिसर चंद्र प्रकाश तोशनीवाल ने 2 मार्च को रिलायंस रिटेल की इकाइयों को लिखे एक लेटर में कहा था की “हमें उम्मीद नहीं थी कि हमारे साथ इस मामले पर चर्चा किए बिना, रिलायंस ग्रुप इस तरह की कड़ी कार्रवाई करेगा।” उन्होंने आगे कहा की इस बात को क्लियर करें की भुगतान में कोई ज्यादा कटौती नहीं की जाएगी।

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Mukesh Ambani File Photo Credits IANS

इसके अलावा 5 मार्च के एक और लेटर के मुताबिक़ (ब्लूमबर्ग के पास फ्यूचर लाइफस्टाइल द्वारा भेजे गए दोनों पत्रों की कॉपी हैं) फ्यूचर लाइफस्टाइल ने चिंता व्यक्त की और रिलायंस से गुज़ारिश कि वह ऐसी कार्रवाई न करे जिसे ऋणदाताओं द्वारा गंभीरता से देखा जाए, जिनके पास कंपनी की हालिया और अचल सम्पतियों का बोझ है। लेटर में कहा गया है कि बैंक फ्यूचर की क्रेडिट लाइनों को काट सकते हैं, जो पहले से ही नकदी की कमी वाले रिटेलर के पास बचा हुआ है। ऐसे में रिलायंस को एक बार विचार करने की जरुरत है।

बता दें की किशोर बियानी के नेतृत्व वाला फ्यूचर ग्रुप दो बड़े निगमों के बीच ऐसे उलझ गया, जब अमेज़ॅन ने रिलायंस के अगस्त 2020 के फ्यूचर रिटेल के स्टोर और गोदामों को 247.1 बिलियन रुपये (3.4 बिलियन डॉलर) में खरीदने के ऑफर पर आपत्ति जताई।

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अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी ने कहा कि इस सौदे ने फ्यूचर ग्रुप की एक अन्य फर्म के साथ 2019 के समझौते का उल्लंघन किया, क्योंकि इसने फ्यूचर रिटेल को खत्म कर दिया, जो ऋण दायित्वों से चूक गया है और अब नुक्सान का सामना कर रहा है।

लोकल मीडिया द्वारा रिलायंस के लगभग 200 स्टोरों के मौन अधिग्रहण की रिपोर्ट और फ्यूचर के स्टोर के लीज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर और फ्यूचर ग्रुप के 30,000 कर्मचारियों को नौकरी के प्रस्ताव भेजने की रिपोर्ट के बाद अमेज़न ने मामले को ख़तम करने की मांग की। अमेज़न की चीड़ पिछले हफ्ते अदालत की सुनवाई के दौरान सामने आ गई। उन्हें मामले की प्रगति को भारत के सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट करना है।

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