भारत की तीनों सेनाओं में अपना लोहा मनवाने वाले कर्नल पृथीपाल सिंह गिल के किस्से जान लो

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Indian Army Retired Colonel Prithipal Singh Gill
Indian Army Retired Colonel Prithipal Singh Gill Bravery Story in Hindi. Col Prithipal Singh, World War 2 veteran and only officer to serve in army, navy, air force. Colonel Gill who served in all 3 services passes away.

File Photo Credits: Social Media

Chandigarh: भारतीय सेना में ऐसे कई वीर रहे है और हैं, जिनकी वीरता और किस्से-कहानी जानकर आपके होश उड़ जायेंगे। फिर चाहे भारतीय सेना के जवान जसवंत सिंह रावत की कहानी हो या बाबा हरभजन सिंह की। आपको हैरान करने और सोचने को मज़बूर करने के लिए माँ भर्ती के लाल काफी है।

ऐसे में हाल ही में भारत की तीनों सेनाओं में अपना शौर्य और बहादुरी दिखाने वाले भारतीय सेना (Indian Army) के इकलौते कर्नल पृथीपाल सिंह गिल (Colonel Prithipal Singh Gill) का 100 साल की उम्र में देहांत हो गया।

रिटायर्ड कर्नल पृथीपाल सिंह गिल अभी अभी 11 दिसंबर को 101 साल के जो जाते, परन्तु उससे पहले ही भारतीय सेना का यह जाबाज़ सिपाही इस दुनिया से रुख्सत हो गया। उनकी फॅमिली के लोगो ने मीडिया सूत्रों को बताया कि वो पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उनकी तबियत बहुत ज्यादा ख़राब थी।

कुछ दिनों पहले ही उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली और हमें अलबिदा कह गए। बस फिर इस माँ भर्ती के लाल का अंतिम संस्कार चंडीगढ़ (Chandigarh) के सेक्टर 25 के श्मशान घाट में कर दिया गया। आपको बता दें की यह कर्नल बहुत ही खास शख्स थे। कर्नल पृथीपाल अपने समय में भारत की तीनों सेनाओं में अपना जलवा देखा चुके थे। इनके अलावा उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में भी सर्विस की थी।

आपको यह जानकर हैरानी होगी की रिटायर्ड कर्नल पृथीपाल सिंह गिल (Retired Colonel Prithipal Singh Gill) ने साल 1942 में ‘रॉयल इंडियन एयरफ़ोर्स’ में एक पायलट के रूप में अपनी सैन्य ड्यूटी की थी। उनके बाद इन्होने बहरतीय सेना और नेवी में भी अपनी सेवाएं दी और अपने शौर्य का परचम लहराया।

साल 1920 में पंजाब के पटियाला में जन्म लेने वाले पृथीपाल सिंह गिल भारतीय सेना के ऐसे अकेले कर्नल रहे हैं, जिन्होंने जल, थल और वायु तीनों सेनाओं के साथ ही पैरामिलिट्री फ़ोर्स में भी सेवाएं दी है। वे अभी तक ऐसा करने वाले एकलौते शख्स हैं।

पृथीपाल सिंह गिल वर्ल्ड वॉर 2 में भी सेवाएं दे चुके थे। भारत में ब्रिटिश शासन में वे एयरफ़ोर्स रहे थे। अपने सबसे शुरू के दिनों में पृथीपाल कराची में पोस्टेड थे। अब कराची बटवारे के बाद पाकिस्तान चला गया। गिल के कराची में रहने के दौरान उनके पिता को ऐसा लगा कि पृथीपाल को कही कुछ हो न जाएँ, तो उन्होंने अपनी बड़ी पहचान और सोर्स के चलते अपने बेटे को साल 1943 में नेवी की पोस्टिंग दिलवा दी।

फिर नेवई में भी पृथीपाल सिंह ने पाना लोहा मनवा लिया। यहां उन्होंने माइन स्वीपिंग शिप और आईएनएस (INS) में अपनी बेस्ट सर्विस दी। उस वक़्त वे नेवल गन के एक्सपर्ट माने जाते थे। ब्रिटिश अफसर भी उनसे सम्मानपूर्वक बात करते और मार्गदर्शन लेते थे।

नौसेना में पृथीपाल ने एक सब-लेफ़्टिनेंट के रूप में ‘Long Range Gunnery’ का कोर्स किया, इनमे भी वे टॉप पर रहे थे। हर तरफ उनकी तारीफ होने लगी थी। देश की आज़ादी के बाद भी वे साल 1951 में वो भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट का में पोस्टेड हुए। साल 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई जंग में भी पृथीपाल सिंह गिल की अहम् भूमिका रही।

उस वक़्त भारत-पाक के बीच हुई जंग के वक़्त गिल 71 मीडियम रेजिमेंट के कमांडर के तौर पर तैनात रहे। उस वक़्त का एक किस्सा बहुत मशहूर है। तब पाकिस्तानी सेना ने उनके कुछ साथियों और उनकी गन की बैटरी चोरी कर ली थी। कर्नल गिल को यह बात पता चली, तो वे विरोधी देश की सीमा के अंदर घुसने में तनिक भी नहीं डरे। पृथीपाल पाक इलाके में घुसे और गन की बैटरी वापस भी चीन लाये थे। आप सोचिये की जिस शख्स को गन की बैटरी इतनी प्यारी थी, तो देश कितना प्यारा रहा होगा।

पृथीपाल सिंह गिल के बेटे डॉ अजय पाल सिंह ने एक बार मीडिया में बताया था की उन्होंने अपने पिता से दूसरे विश्व युद्ध या भारत पाक युद्ध (1965) के बारे में कोई कहानी (Story) नहीं सुनी। वे खुद कुछ नहीं बताते थे। बताया जाता है की 1965 की जंग के दौरान पाक सेना की कार्रवाई में उनकी रेजिमेंट की चार तोपों को काटा गया था।

कर्नल गिल ने पर्सनली उन चार तोपों को के हिस्स्सों को फिरसे हासिल करने के लिए एक मिशन को लीड किया और सफलता भी हासिल की। परन्तु इस मिशन और वीरता के लिए उन्हें कोई पुरस्कार या सम्मान नहीं मिला। इसका कारण यह है की सेना में कुछ मिशन ख़ुफ़िया तौर पर किये जाते हैं। वे अपने समय भारतीय सेना के जेम्स बांड थे।

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