अमेरिका से भारत आया शख्स, 68 साल पहले उधार के 28 रु चुकाने थे, ईमानदारी की कहानी जानें

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Haryana News Hindi
Retired Naval Commander BS Uppal repaid Rs 28 loan after 68 years in Hisar. The 68-year-old former Navy commander came to Hisar India from US to repay a loan of Rs 28.

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Hisar: कभी आपने भी किसी दूकान या टपरे में उधार में चाये की चुस्की ली होगी या समोसे भी खाये होंगे। हो सकता है की बाद में आप पैसे देना भूल गए होंगे और दुकानवाला हलवाई भी उस बात को इग्नोर कर दिया हो। फिर भी कुछ लोग ऐसे भी होने हैं, जो इस बात को याद रखते हैं। उनके मन में यह बात दबी रहती है की किसी ने पैसे उनके सर पर अभी भी उधार है। वह एक प्रकार का क़र्ज़ ही है।

अभी के समय में लोग पैसे लेकर वापिस नहीं देते है और कई बार भूल भी जाते है। इसके उलट हरियाणा के हिसार में एक हैरान करने वाला मामला देखने जो मिला है। हाल ही में यहां एक शख्य अपनी कई वर्षों पुरानी 28 रुपए की उधारी चुकाने के वास्ते दूर अमेरिका से हरियाणा आया और हिसार पहुँच गया।

यह शख्स हरियाणा में प्रथम नौसेना बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित होने वाले नौसेना कमांडर बीएस उप्पल (Navy Commander BS Uppal) थे। पूर्व अफसर बीएस उप्पल अपनी ड्यूटी से रिटायरमेंट के बाद अपने बेटे के पास अमेरिका चले गए और वहीँ रहते है। जिसके बाद उन्हें हिसार आने का अवसर ही नहीं प्राप्त हो सका।

फिर भी यह शख्स खास तौर से अपने उधारी के 28 रुपए चुकाने के लिए हिसार आए हैं। अमेरिका से भारत वापस आने के बाद भी हलवाई की दुकान के 28 रु उधर के उनको याद थे। जो उन्होंने लौटा दिए। यह किस्सा हरियाणा के हिसार से आया और अब वायरल हो रहा है। प्रथम लेवल ब्रेवरी अवार्ड (First Navy Bravery Award) विजेता नेवल कमांडर बीएस उप्पल की यह ईमानदारी लोगो को बहुत पसंद आ रही है।

बीएस उप्पल इतने सालों बाद अपने हिसार के मोती बाजार स्थित दिल्ली वाला हलवाई की दूकान पहुंचे और दुकान के ओनर विनय बंसल को बताया कि ‘तुम्हारे दादा शम्भू दयाल बंसल को मुझे साल 1954 में 28 रुपए देने थे। फिर मुझे एकदम से शहर से बाहर जाना पड़ा और में नौसेना में ज्वाइन कर लिया। आपके दादा की इस दुकान पर मैं दही की लस्सी में पेड़े डालकर पीता था। जिसके 28 रुपए में उस वक़्त दे रही पाया था और तत्काल में चला गया था।’ वही पैसे मुझे देने थे।

फिर रिटायरमेंट के बाद वह अपने पुत्र के साथ अमेरिका चले गए। जब वो 68 साल बाद 85 साल के हो गए, तब वापस हिसार आकर सीधे मोती बाजार में दिल्ली वाला हलवाई की दुकान चले गए और उनके मालिक विनय बंसल को कहा कि आपके दादा जी शंभू जी दयाल बंसल के साल 1956 में बकाया 28 रु ले लो।

उन्होंने कहा की मुझे नेवल में सर्विस मिलने से अचानक यह शहर छोड़ना पड़ा था, लेकिन मैं आपको यह पैसे देने के लिए अमेरिका से आया हूं। उन्होंने बताया की एक आपके दादा जी के 28 रुपए देने थे और दूसरा, मैं हरजीराम हिन्दू हाई स्कूल में दसवीं पास करने के बाद फिर कभी जा नहीं सका, तो वहां भी जाना है। बस इन्ही 2 कामों के लिए मैं अमेरिका से हिसार आया था।

बीएस उप्पल (Retired Naval Commander BS Uppal) ने अभी के दुकान मालिक विनय बंसल (Shop Owner Vinay Bansal) के हाथ में ब्याज के साथ 10000 रुपए दिए, तो विनय ने लेने से मना कर दिया। तब पूर्व अफसर बीएस उप्पल ने बहुत रिक्वेस्ट कि ‘मेरे सिर पर आपकी दुकान का क़र्ज़ चढ़ा हुआ है, इसे उतारने के लिए यह रकम प्लीज ले लो। मैं अमेरिका से खास तौर पर इसी काम के लिए आया हूं।

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बुजुर्ग शख्स (Former Navy Commander BS Uppal) की इस रिक्वेस्ट पर बड़ी मुश्किल से विनय बंसल (Vinay Bansal) ने वह रकम ली और बीएस उप्पल बड़े खुश हो गए। फिर वे अपने स्कूल गए और स्कूल को बंद देखकर थोड़े दुखी भी हुए। अपनी पुरानी यादों वाले शहर आकर वे खुश और थोड़े भावुक भी हुए।

ज्ञात हो की बीएस उप्पल नौसेना में उस पनडुब्बी के कमांडर थे, जिसने भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान के गाज़ी जहाज को डूबो दिया था और अपनी पनडुब्बी के साथ साथ सभी नौसैनिकों को सुरक्षित वापस ले आए थे। भारत की इसी जीत में उप्पल की विशेष भूमिका रही थी। इस बहादुरी के लिए उन्हें प्रथम नौसेना बहादुरी पुरस्कार से नज़वा गया था।

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