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Dhanbad: वैसे तो हम बड़े मॉर्डन युग में जी रहे हैं और विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है। अंधविश्वास और रूढ़िवादिता के लिए इस संसार में कोई जगह नहीं है। हम भी किसी अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देना चाहते हैं। फिर भी कुछ लोग भूत प्रेत देखने या उन्हें महसूस करने का दावा कर दिया करते हैं।
आये दिन पूरे देश और दुनिया से हॉन्टेड स्थानों के किस्से और कहानियां आती रहती हैं। ऐसे ही एक मामला धनबाद (Dhanbad) के एक रेलवे स्टेशन (Railway Station) से आया है। यह रेलवे स्टेशन लोगो में कौतुहल का विषय बना हुआ है।
रहस्यमई रेलवे स्टेशन बना खंडर
इस रेलवे स्टेशन के चलते लोगो में बड़ा अंधविश्वास पसरा हुआ है। यहाँ के लोकल लोगों का मानना है कि ये रेलवे स्टेशन नहीं बल्कि भूत बंगला (Haunted House) है। यह रहस्यमई रेलवे स्टेशन धनबाद जिले का झरिया (Jharia Railway Station) में मौजूद है।
लोगो का कहना है की इधर से पायल और घुंघरू की अजीब आवाज आया करती है। इस बात से यहाँ के लोग इतने खौफ में रहते हैं की वे इसके आसपास भी जाने से डरते हैं। इन्ही सब बे-फुजूल की बातों के चलते इस रेलवे स्टेशन के मेंटनेंस पर ध्यान नहीं दिया गया।
झरिया रेलवे स्टेशन लोगो को डराता है
बिहार से अलग हुए राज्य झारखण्ड के धनबाद जिले का झरिया पुराना रेलवे स्टेशन (Jhariya Purana Station) एक समय आबाद हुआ करता था और यहाँ लोगो की आवा जागी बनी रहती थी। स्टेशन के आसपास गुमटियों, चाय-पानी की दुकान, फेरी वालों और लोगों की भीड़ रहती थी। परन्तु अब देखने से यह स्टेशन खंडहर जैसा लगता है।
लोकल लोग इसके नाम से भी इस कदर डरे हुए हैं कि वो इसके आसपास भी जाने से कतराते हैं। अब तू हालत ऐसे हैं की रात। 730 बजे के बाद कोई भी इस स्टेशन की ओर नहीं जाता हैं। हमारे एक पाठक रमेश ने हमें कॉल पर बताया की वह इसी इलाके में रहते हैं और इस स्टेशन के खंडहर (Ruins) से कभी कभी पायल जैसी आवाज (Payal’s voice) आती है।
अब लोग स्टेशन नहीं भूत बंगला करते हैं
अब भारतीय रेलवे की इस स्टेशन को इग्नोर कर रहा है और यह टोटल खण्डार में तब्दील हो गया है। रमेश ने बताया की यहाँ के लोग अब इस स्टेशन को भूत बंगला (Bhoot Bangala) कह कर सम्बोधित करते हैं। इलाके में ऐसी अफवाह है कि इस पुराने स्टेशन (Old Railway Station) से रात के समय किसी के रोने की आवाज भी कुछ लोगो को सुनाई दी है।
साल 2002 में झरिया रेल लाइन पूरी तरह से बंद हो गई, इसके बाद से यह इमारत पूरी तरह खंडहर और वीराने में बदल गई। एक समय की बात थी, जब झरिया रेलवे स्टेशन पर कई ट्रेनों का स्टॉपेज रहा करता था और ट्रैन के रात्रियों का यहाँ जमावड़ा बना रहता था। परन्तु अब यहां एक छोटी सी केबिन में ट्रेनों की रिजर्वेशन की टिकट काटी जाती है। टिकट्स को लेने का समय भी केवल 4 बजे तक का होता है। 4 बजे के बाद स्टेशन टोटल वीरान हो जाता है।
रहस्यमई पायल की आवाज सुनाई देती है
अब लोगो को दिक्कत यह है की शाम के बाद यहाँ रहस्यमई आवाज (Mysterious Sound) सुनाई देने लगती है। कभी पायल और कभी रोने की आवाज़ तो कभी किसी साये का भय। ऐसे में रात में तो कोई भी इस तरफ जाने के बारे में सोच भी नहीं सकता है।
कुछ पुराने लोगो का कहना है की साल 2002 में इस ट्रैन स्टेशन के बंद हो जाने से यहाँ लोगो का आना जाना कम हो गया और फिर बंद ही हो गया। ऐसे में किसी इमारत के वीरान या सुनसान रहने से यहाँ भटकती आत्माएं अपना बसेरा बना लिया करती है।
इस वजह से वहां पॉजिटिव एनर्जी ख़तम हो जाती है और नेगेटिव एनर्जी छा जाती है। अब ऐसे में इस स्थान पर लोग जाने के बारे में सोचते भी नहीं है। हालाँकि विज्ञान इस सब बातों को नहीं मानता है और इसे मात्र एक वहम करार देता है। फिर भी लोग अपने अनुभव को ज्यादा तजब्बो देते हैं।



