बटवारें में बिछड़े दो दोस्त करतारपुर में मिले, 74 साल बाद एक-दूसरे को देख आंखों में आंसू झलक आये

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Sardar Gopal Singh Friend
Kartarpur Corridor reunited two Sardar Gopal Singh (94) from India and Muhammad Bashir (91) from Pakistan. The Kartarpur Corridor reunited two friends who were separated at the partition of India into two countries.

Photo Credits: Twitter

Delhi: आज हम आपके दोस्ती की बात कर आ रहे हैं। आपके सबसे अच्छे दोस्त स्कूल-कॉलेज में ही बने होंगे। उसके बाद तो केवल काम की दोस्ती ही होती है। आपने साथ काम करने वाला आदमी आपका दोस्त कम और कॉम्पिटिटर या कलीग होता है। इसे दोस्ती नहीं कहते।

दोस्ती एक एहसास है, जो सालों साल दो दोस्तों के के दिल में भीतर होती है। आगे चलकर उस दोस्तों के बीच भला ही कितनी दूरी आ जाए और सरहदे खींच दी जाएँ। फिर भी वे कभी एक दूसरे से जुदा नहीं होते है, क्योंकि दोस्ती मन में जीवित रहती है।

हाल ही में एक ऐसी घटना घटी की आने वाले समय में वह मिसाल बन जाएगी। ऐसा ही कुछ करतारपुर के गुरुद्वारा दरबार साहिब (Gurudwara Darbar Sahib Kartarpur) में हुआ, जब में 74 साल पहले बिछड़े दोस्तों (Old Friends reunite at kartarpur) की मुलाकात हो गई। वह नज़ारा देखने लायक रहा।

जब हमारा देश अंग्रेजों की जुलाई से आजाद हो रहा था, तब 1947 में भारत के बटवारें के दौरान सरदार गोपाल सिंह (Sardar Gopal Singh) और उनके दोस्त मुहम्मद बशीर (Muhammad Bashir) एक दूसरे से अलग हो गए। उसकी सरहदे अलग अलग करके उन्हें अलग अलग देश का नागरिक बना दिया गया।

सरहदों के बनने के बाद भी उनकी बच्चपन की सच्ची दोस्ती में तनिक भी कमी नहीं आई। 74 साल बाद जब 94 साल के सरदार गोपाल सिंह और 91 साल के मुहम्मद बशीर की मुलाक़ात हुई, तो दोनों एक दूसरे को देखकर पहचान गए और फूट-फूटकर आंसू बहाने लगे।

अब उनकी मिलान की तस्वीर सोशल मीडिया वायरल हो रही है और लोग दोनों की दोस्ती पर चर्चा कर रहे है। हाल ही में भारत से जब गोपाल सिंह करतारपुर साहिब (Kartarpur Sahib) का दर्शन करने पाकिस्तान पहुंचे। तो वहां उनकी मुलाकात अपने पुराने बिछड़े हुए दोस्त बशीर से हुई।

बटवारे के बाद से बशीर पाकिस्तान के नरोवाल शहर में रहते हैं। पाकिस्तान के न्यूज प्लेटफार्म डॉन के मुताबिक़ दोनों जब छोटे थे, तो साथ में करतारपुर साहिब दर्शन (Kartarpur Sahib Darshan) करने जाते थे और चाय-नाश्ता किया करते थे। फिर इस सिलसिले का एन्ड विभाजन के चलते हो गया।

ट्विटर पर दोनों की तस्वीर बहुत पसंद की जा रही है। धर्म और तीर्थ यात्रा से अलग दिल को छू लेने वाली ये कहानी करतारपुर साहिब की है। करतारपुर गलियारा हाल ही में फिर से ओपन किया गया था। उससे पहले करतारपुर साहिब गुरुद्वारे की तीर्थयात्रा पिछले साल मार्च में महामारी के कारन रूक दी गई थी।

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की जयंती पर दोनों देशों के बीच 3 दिन के लिए करतारपुर गलियारा खोला गया था। इसके लिए वीजा की जरूरत नहीं पढ़ती है। करतारपुर गलियारा, पाकिस्तान में गुरुद्वारा दरबार साहिब को गुरदासपुर जिला स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से जोड़ता है। सिख धर्म में इस स्थान की बहुत अहमियत है और इसी धार्मिक भावनाओं के चलते Kartarpur Corridor को शुरू किया गया था।

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