हरियाणा के गाँव में आटा चक्की चलाने वाले पिता का बेटा अशोक कुमार बना न्यूक्लियर साइंटिस्ट

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Ashok Kumar Nuclear Scientist
Flour mill worker son Hisar youth Ashok become Nuclear scientist. Ashok has been appointed as a Nuclear Scientist at Bhabha Atomic Research Centre (BARC), Mumbai.

Photo Credits: Twitter

Hisar: कड़ी मेहनत के बल पर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। अगर आपके हौंसले बुलंद हैं और कुछ कर दिखाने की तम्मना आपके मन में है, तो आप कड़ी मेहनत करके मंजिल तक जरूर पहुँच जायेंगे। भला ही आप किसी छोटे गाँव के हों या किसी बड़े शहर के हों।

भला ही आपके पास धन दौलत हो या ना हो। इससे कोई फर्क नहीं पढता है। इसे साबित किया है, हरियाणा के हिसार (Hisar) जिले के एक गाँव से निकलकर आये अशोक कुमार (Ashok Kumar) ने। उनके पिता अपने गाँव में आटा चक्की चलाकर अपना जीवन यापन करते हैं।

हिसार जिले के गांव मुकलान में आटा चक्की चलाने वाले के पुत्र ने सभी को हैरान कर दिया और सफलता हासिल की। उनके परिवार के मुश्किल हालातों में रहने के बावजूद यह युवा भाभा में न्यूक्लियर साइंटिस्ट (Nuclear Scientist) बना है। हरियाणा के गांव के अशोक कुमार का सिलेक्शन भामा अटोमिक रिसर्च सेंटर (Bhabha Atomic Research Centre BARC) के लिए हुआ है।

साधारण परिवार के अशोक मार्च में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर रिक्रूटमेंट की परीक्षा समलित हुए थे। अशोक की इस सफलता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कॉरपरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी स्‍कीम (CSR Scheme) का अहम् योगदान रहा है। इस स्‍कीम की वजह से ही अशोक अपनी इंजी‍निय‍रिंग की पढ़ाई पूरी कर सके। उनकी पढ़ाई में उनके स्‍कूल के एक शिक्षक का योगदान रहा था, जिन्हे वह कभी नहीं भूलेंगे।

इस एग्जाम के बाद दिसंबर में इंटरव्यू हुआ और फिर उसका रिजल्ट जारी किया गया। 5 जनवरी को भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर की ओर से नतीजे घोषित किए गए हैं। जिसमे अशोक कुमार ने ऑल इंडिया 2nd रैंक हासिल की।

अशोक ने एक हिंदी अख़बार को बताया कि पूरे देश से लगभग 30 छात्रों का चयन हुआ है और इसमें उनका भी नाम भी दर्ज है। अशोक के पिता मांगेराम के गाँव में आटा चक्की चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं।

अशोक तीन भाई- बहनों में सबसे बड़ा है। उसका एक छोटा भाई विनोद और छोटी बहन ऋतु हैं। अशोक का सपना डॉ अब्दुल कलाम जैसा वैज्ञानिक बनने का है। अशोक को बचपन से ही अब्दुल कलाम काफी पसंद थे और वे उनके जैसा बनना चाहते थे। अशोक ने अपनी सफलता का क्रेडिट अपनी माँ कलावती और पिता मांगेराम को दिया है।

आज अशोक की सफलता पर उनके माता-पिता को गर्व है और वे बहुत खुश हैं। अशोक के पिता मांगेराम ने हिंदी अख़बार को बताया कि अशोक शुरू से ही पढ़ाई में बहुत अच्छा था। आर्थिक तंगी के चलते गांव के ही उसे सरकारी स्कूल में पढ़ाया और अशोक अच्छे से पढ़कर आगे बढ़ा।

अशोक ने गांव के सरकारी स्कूल में दसवीं तक की पढ़ाई करने के बाद 11वीं व 12वीं नॉनमेडिकल से प्राइवेट स्कूल से की। इसके बाद शहर जाकर बीटेक मैकेनिकल ब्रांच से पूरी की। डा. अब्दुल कलाम जैसा बनने की सपना लिए अशोक ने मार्च 2020 में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर रिक्रूटमेंट की परीक्षा दी। परीक्षा के बाद इंटरव्यू हुआ और इसके बाद रिजल्ट जारी हुआ।

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