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Delhi: पूरे देश ने देखा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 नवंबर, 2021 को उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के समाधि स्थल पर उनकी भव्य प्रतिमा (Adi Shankaracharya Statue) का अनावरण किया। परन्तु इससे भी बड़ी कहानी इस प्रतीमा को बनने वाले के साथ जुडी है। आदि गुरु शंकराचार्य की इस प्रतिमा का निर्माण मूर्तिकार अरुण योगीराज (Arun Yogiraj) ने किया है।
2013 की आपदा में केदारनाथ में आदिगुरु शंकराचार्य का समाधि स्थल और उनकी मूर्ति मंदाकिनी नदी के सैलाब में तबाह हो गई थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा निर्देश में केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों के तहत आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि विशेष डिजाइन से तैयार की गई है।
PM मोदी ने इस कार्य के लिए अरुण योगिराज (Arun Yogiraj) को चुना था। अरुण योगीराज का कहना है कि ये एक बड़ी जिम्मेदारी थी। पीएम मोदी स्वयं हर कार्य और गतिविधि के अपडेट्स लेते थे। इससे पहले उन्होंने 2 फुट का मॉडल तैयार किया था। फिर यह विशाल मूर्ति तैयार की।
37 वर्षीय अरुण योगीराज ने 12 फुट की इस पत्थर की प्रतिमा को उन्होंने मैसूर के सरस्वतीपुरम में तैयार किया। बताया गया कि प्रतिमा की चमक के लिए उसे नारियल पानी से पॉलिश किया गया है। अरुण योगीराज का कहना है कि ये उनके लिए बहुत ख़ुशी के पल है। उन्होंने दक्षिण भारत में शंकराचार्य की अन्य प्रतिमाओं को देखा और उन पर रिसर्च की।
उन्होंने शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठों और अन्य धार्मिक स्थलों के विद्वानों से संपर्क साधा और उनकी राये ली। ये प्रतिमा ब्लैक क्लोराइट शीस्ट की ‘कृष्ण शिला’ से बनी है, जिसका उपयोग हजारों वर्षों से होता रहा है। यह मूर्ति प्रकृति की भीषण मार झेलने में भी सक्षम है। इसे बनाने में अरुण ने 9 महीने रोज 14-15 घंटे की मेहनत की है।
अरुण योगीराज के पिता और दादा भी मूर्तिकार थे। अरुण के पिता गायत्री और भुवनेश्वरी मंदिर के लिए कार्य कर चुके हैं। मूर्तिकारों की पाँचवीं पीढ़ी में जन्मे अरुण योगीराज के पूर्वजों को मैसूर राजपरिवार का संरक्षण प्राप्त था। उनके पिता योगीराज शिल्पी अपने पिता बी बसवन्ना शिल्पी की 8 संतानों में से एक थे। अरुण उनके 17 पोते-पोतियों में से एक हैं।
मीडिया रिपोर्ट बताती है की कृष्णा राजा सागर बाँध पर कावेरी की प्रतिमा अरुण के दादा जी ने ही बनाई थी। वैसे अरुण योगिराज का सपना अपने पूर्वजों की तरह मूर्तिकार बनना नहीं था और 2008 में मैसूर विश्वविद्यालय से MBA की डिग्री लेने के बाद वो एक प्राइवेट कंपनी के लिए कार्य कर रहे थे। लेकिन, उनके दादा ने बचपन में ही भविष्यवाणी की थी कि अरुण बड़े होकर हाथों में औजार उठाएँगे और कलाकारों के इस परिवार का नाम और ऊँचा करेंगे।
फिर अरुण के पिता का हाल ही में एक दुर्घटना में देहांत हो गया। परन्तु, उससे पहले उन्होंने शंकराचार्य की प्रतिमा को पूरे होते देखा था और ख़ुशी से बेटे अरुण को आशीर्वाद दिया था। अरुण योगीराज ने इस कार्य को भखूबी पूरा किया है।
The statue of Poojya Adi Shankaracharya which will be unveiled by PM @narendramodi today at Kedarnath . Sri Ram Mandir & Deepotsav at Ayodhya , ongoing Kashi Vishwanath corridor work & today the works at Kedarnath . Giant strides towards cultural rejuvenation . pic.twitter.com/yKZAXlgjOA
— B L Santhosh (@blsanthosh) November 5, 2021
आपको बता दें की पहले ही खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी कला से बहुत प्रसन्न हो गए थे। इससे पहले अरुण योगीराज ने मैसूर में 14.5 फ़ीट की महाराजा जयचमराजेंद्र वोडेयार की संगमरमर की प्रतिमा बनाई थी। इसके अलावा वो रामकृष्ण परमहंस की मूर्ति भी बना चुके हैं।
उन्होंने भगवान शिव की सवारी नंदी, हनुमान, भगवान वेंकटेश्वर और भारत के पहले प्रख्यात इंजीनियर विश्वेश्वरैया की मूर्ति और 5.5 फ़ीट की गरुड़ की प्रतिमा भी बना चुके हैं। उन्होंने कभी सोचा नहीं था की उनकी बनाई आदिगुरु शंकरचार्य की प्रतिमा भगवान शिव की नगरी केदारनाथ की शोभा बन जाने वाली है।
First stone model presented in the year 2020 …. #Kedarnath #KedarnathDham #ShankaracharyaSamadhi #Shankaracharya #india #Karnataka #mysore pic.twitter.com/hMMJCFXQTA
— Arun Yogiraj (@yogiraj_arun) November 7, 2021
आदिगुरु शंकराचार्य के समाधिस्थल (Shankaracharya Samadhi Place) में सर्दियों के दौरान बर्फ को पिघलाने के लिए हिटिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। इसके लिए समाधि के निचले व मध्य हिस्से में गीजर रॉड लगाई गई हैं। बर्फ से बने पानी की निकासी मंदाकिनी नदी में होगी। साथ ही समाधि के चारों तरफ लाइटिंग की गई और स्पीकर लगाए गए हैं।
केदारनाथ में सरस्वती व मंदाकिनी नदी के बीच में स्थापित आदिगुरु शंकराचार्य की समाधिस्थल में दोनों नदियों का जल साल भर प्रवाहित होता रहेगा। यह जल समाधि के सबसे निचले हिस्से में निर्मित तालाब में मिलेगा।
Thank you #Arun_Yogiraja 🙏⛳
The models submitted by four sculptors were shortlisted by the PMO. Out of these, model presented by Arun Yogiraj was selected by PM himself in September 2020.
And once finalized, team of 9 artists led by Arun Yogiraj worked 12-14 hours daily for pic.twitter.com/lzSDPdIQpF
— Gyanendra Misra (@abhaya0930) November 7, 2021
भगवान केदारनाथ के मंदिर (Bhagwan Kedarnath Temple) के पास छह फीट नीचे खुदाई कर बनाए गए समाधि स्थल पर पीएम मोदी अकेले पहुंचे। शंकराचार्य की प्रतिमा को प्रणाम कर वे कुछ क्षण बैठे और आराधना की। मूर्तिकार योगीराज ने कहा कि केदारनाथ में शंकराचार्य की मूर्ति (Statue of Adi Shankaracharya) बनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।



