
Karkala: जिंदगी तकदीर को कैसे चेंज कर देती है, उसका उदाहरण दे रहे है। सभी को इस बात पर यकीन नही होता है लेकिन ये सच है। किस्मत जिंदगी में करबट जरूर लेती है। एक ऐसे शख्स को देखकर लगता है, जो कभी मात्र 18 रुपए की नौकरी में ढाबे पर बर्तन धोया करते थे।
जिन्होंने कभी सोचा भी नही होगा कि वो कभी इतने बड़े बिजनेस मेन बन जाएंगे। लेकिन कभी हार ना मानने वाले और कड़ी मेहनत ने आज उन्हें देश और विदेशों में 60 से ज्यादा रेस्त्रां का मालिक बनाकर सभी को हैरान कर दिया है। आइये आपको भी बताते हैं, इस शख्स के बारे में और उसकी जिंदगी के संघर्ष के बारे में।
दोस्तों आज हम आपको कर्नाटक (Karnataka) के छोटे से गाँव करकला (Karkala) मे जन्मे जयराम बनान (Jairam Banan) के जिन्दगी संघर्ष की कहानी बताने जा रहे हैं। जयराम का जन्म एक ऐसे घर में हुआ था, जहाँ इन्हें छोटी सी गलतियों के लिए मारा जाता था। सिर्फ इतना ही नही इनके आँखों में मिर्च का पाउडर भी कई बार डाल दिया जाता था।
घर से भाग के आ गए मुम्बई
बता दें कि 13 वर्ष की उम्र में जयराम फेल हुए थे औऱ इसके लिए उन्हें क्या सजा मिलने वाली थी यह उनको मालूम हो चुका था। जयराम ने अपने पिता के जेब से कुछ पैसे निकाले और ये बिना किसी को बताए मुम्बई की बस में बिठा कर निकल गए।
उत्तर भारत का डोसा किंग
इसी बस में इनका परिचय एक शख्स से हुआ, इस शख्स ने जयराम (Jairam Banan) को एक निजी कैंटीन में काम करने के लिए ऑफर रखा। जयराम ने इस कार्य के लिए हाँ कर दी। तब बे इस काम को करके भी बहुत खुश रहे।
कैंटीन का मालिक चप्पल से मारता था
इस कैंटीन में कार्य करते हुए जयराम ने काफी अधिक यातना भी सही। कैंटीन का मालिक काफी घटों तक इनसे कार्य करवाता था और कार्य करने के बाद भी इन्हें चप्पलों से पीटता था। लेकिन जयराम परिश्रम करते रहे। कई दिनों तक मेहनत से कार्य करने के पश्चात् जयराम इसी कैंटीन में वेटर बन गए। और कुछ वक़्त बाद उन्होंने मैनेजर पद भी हासिल कर लिया।
शुरू किया खुद का व्यापार
जयराम को जब इस क्षेत्र में कार्य का अच्छा खासा अनुभव हो गया, तो उन्होंने निर्णय लिया कि वो खुद का काम प्रारंभ करेंगे। सारी चीजें तय करने के पश्चात् इन्होंने वर्ष 1986 में दिल्ली के डिफेंस कॉलनी (Defense Colony) में अपनी पहली दुकान खोली।
Another inspiring story from Mr. Jayaram banan the chairman of JRB group, Sagar Ratna,Swagath and shraman Hotel & Restaurants.
THE JOURNEY FROM EARNING EIGHTEEN RUPEE TO CRORE RUPEES.
-Hena paygham✍🏻 pic.twitter.com/uiXH9Q78NJ— VOW🗣 (@voiceofwomen20) May 12, 2021
इस दुकान का नाम सागर (Sagar) था, पहले दिन यहां से जयराम को मात्र 470 रुपए की आमदनी हुई थी और अगले ही सप्ताह में इनके यहां ग्राहकों की लंबी लाइन लगने लगी। इसके बाद समय के साथ इन्हें कामयाबी मिलती गई और 4 साल के बाद उन्होंने लोधी बाजार (Lodhi Bajar) में एक दुकान खोली। यही से इनकी क़िस्मत मे परिवर्तन आ गया।
Surnoli (a sweetish pancake), ragi dosa with finely chopped onions inside, Mysore masala dosa, puri korma. Sagar Ratna at Ocean Pearl Hotel, Mangalore. pic.twitter.com/OSn8EsPp7R
— Kalyan Karmakar (@Finelychopped) June 9, 2018
इस दुकान का नाम सागर रत्न (Sagar Ratna) रखा गया था। आज के समय में सागर रत्न की 30 शाखाएं। उत्तर भारत के साथ साथ सागर रत्न (Chain of Sagar Ratna Hotels) अब विदेशों में भी पहुँच चुका है। कुछ वक़्त बाद इन्होंने एक होटल की भी शुरुआत की जिसका नाम स्वागत है। वर्ष 2011 में सागर रत्न का कारोबार 172 करोड़ रुपए हो गया था।



